Hindi
Saturday 27th of November 2021
476
0
نفر 0
0% این مطلب را پسندیده اند

नौहा

नौहा



तुरबते बेशीर पर कहती थी माँ असग़र उठो
कब तलक तन्हाई में सोओगे ऐ दिलबर उठो


है अंधेरा घर में नज़रों में जहाँ तारीक है
कब तलक पिन्हाँ रहोगे ए महे अनवर उठो


हम सबों को कै़द करके अशक़िया ले जाऐगें
किस तरह तन्हा तुम्हें छोड़ेगी यह मादर उठो


गोद खाली देखकर पूछे अगर सुग़रा तुम्हें
क्या कहे इस नातवाँ से मादरे मुज़तर उठो


गोद से मेरी जुदा होते न थे तुम तो कभी
नींद इस सुनसान बन में आ गयी क्योंकर उठो


किसलिए नाराज़ हो आओ मना लूँ मैं तुम्हें
कुछ जुबां से तो कहो सदके़ गयी मादर उठो


दूध दो दिन से न पाया इसलिए रूठे हो क्या
बेकसो मजबबूर है माँ है एै मेरे दिलबर उठो


किस तरह तन्हा अंधेरी रात में नींद आएगी
आओ सीने से लगा लें माँ अली असग़र उठो


हो गई है ज़िन्दगी दुश्वार अब अफकार से
'फिक्र' रौज़े पर चलो बस या अली कहकर उठो

476
0
0% (نفر 0)
 
نظر شما در مورد این مطلب ؟
 
امتیاز شما به این مطلب ؟
اشتراک گذاری در شبکه های اجتماعی:

latest article

शहादत हज़रत मोहम्मद बाकिर (अ)
पैग़म्बर स.अ. की भविष्यवाणी।
ईरान में हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया ...
इमाम अली नक़ी (अ.) की ज़िंदगी पर एक ...
इमाम जाफ़र सादिक़ अ. आयतुल्लाह ...
हज़रत फ़ातिमा सलामुल्लाह अलैहा की ...
इमाम अली नक़ी (अ.) की ज़िंदगी पर एक ...
आशूरा का पैग़ाम, इमाम हुसैन ...
इमाम हसन अलैहिस्सलाम का शुभ जन्म दिवस
वहाबियत एक नासूर

 
user comment