Hindi
Wednesday 10th of August 2022
Kalam and Beliefs
ارسال پرسش جدید

सूर –ए- तौबा की तफसीर 2

सूर –ए- तौबा की तफसीर 2
ताएफ़ नगर के निकट एक क्षेत्र है जहां हुनैन नाम का युद्ध हुआ।  ताएफ़वासी विशेषकर दो कबीलों एक “हवाज़न” और दूसरे “सक़ीफ़” के नाम से प्रसिद्ध थे। इस्लामी सेना ने जब ...

ज़ीक़ाद महीने के आमाल

ज़ीक़ाद महीने के आमाल
 कुरान में जिन महीनो को हुरमत वाले महीने करार दिया गया है, यह इनमें से पहला महीना है, सैय्यद इब्ने तावूस रावी हैं की ज़ीक़ाद में तंगी दूर होने की दुआ कबूल होती है! इस माह में ...

सुशीलता

सुशीलता
इस्लाम ने बातचीत में एवं व्यवहार में हमेशा अपने अनुयाइयों से नम्रता एवं भद्रता का आहवान किया है और अभद्रता एवं अशिष्टता से रोका है। इस लिए कि इस्लाम की यह शिक्षा जीवन में ...

ज़ाते ख़ुदा की हक़ीक़त सबसे पौशीदा है

ज़ाते ख़ुदा की हक़ीक़त सबसे पौशीदा है
हमारा अक़ीदह है कि इसके बावुजूद कि यह दुनिया अल्लाह के वुजूद के आसार से भरी हुई है फ़िर भी उसकी ज़ात की हक़ीक़त किसी पर रौशन नही है और न ही कोई उसकी ज़ात की हक़ीक़त को समझ ...

रोज़े आशूरा के आमाल

रोज़े आशूरा के आमाल
रोज़े आशूरा मुहम्मद और आले मुहम्मद (स.अ.) पर मुसीबत का दिन है। आशूर के दिन इमाम हुसैन अ. ने इस्लाम को बचाने के लिए अपना भरा घर और अपने साथियों को ख़ुदा की राह में क़ुर्बान कर ...

बेनियाज़ी

बेनियाज़ी
नबी ए अकरम (स) ने फ़रमाया: خيرالغني غني النفس बेहतरीन बेनियाज़ी नफ़्स की बेनियाज़ी है। तबीयत एक अच्छा मदरसा है जिसकी क्लासों में तरबीयत की बहुत सी बातें सीखी जा सकती हैं। तबीयत ...

दीन क्या है?

दीन क्या है?
दीन अरबी शब्द है जिस का मतलब आज्ञापालन, परोतोषिक आदि बताया गया है लेकिन दीन या दीन की परिभाषा होती है इस सृष्टि के रचयता और उसके आदेशों पर विश्वास व उस के प्रति आस्था रखना इस ...

सिफ़ाते जमाल व जलाल

सिफ़ाते जमाल व जलाल
हमारा अक़ीदह है कि अल्लाह की ज़ाते पाक हर ऐब व नक़्स से पाक व मुनज़्ज़ह और तमाम कमालात से आरास्ता,बल्कि कमाले मुतलक़ व मुतलक़े कमाल है दूसरे अलफ़ाज़ में यह कहा जा सकता है कि ...

इस्लाम-धर्म में शिष्टाचार

इस्लाम-धर्म में शिष्टाचार
सदाचारः पैग़म्बरे अकरम (सा) की वाणी अनतं जीवन के लिए जीवित व ज़िन्दा है। (انما بعثت لاتمم مکارم الاخلاق) यक़ीनन मैं मबऊस हूआ हुँ ताकि नेक व शिष्टाचार-चरित्र को सम्पूर्ण करुँ, रसूल (सा) ...

आलमे बरज़ख

आलमे बरज़ख
हमारा अक़ीदह है कि इस दुनिया और आख़ेरत के बीच एक और जहान है जिसे “बरज़ख़” कहते हैं।मरने के बाद हर इँसान की रूह क़ियामत तक इसी आलमे बरज़ख़ में रहती है।“व मिन वराइहिम ...

माद्दी व मअनवी जज़ा

माद्दी व मअनवी जज़ा
माद्दी व मअनवी जज़ा हमारा अक़ीदह है कि क़ियामत में मिलने वाली जज़ा में माद्दी और मानवी दोनों पहलु पाये जाते है,और वह इस लिए कि मआद भी रूहानी और जिस्मानी है। क़ुरआने करीम की ...

पाप एक बीमारी 1

पाप एक बीमारी  1
पुस्तक का नामः पश्चताप दया का आलंगन लेखकः आयतुल्लाह अनसारियान   प्रत्येक व्यक्ति भीतरी स्वभाव एवं गरिमा की दृष्टि से किसी भी परिस्थिति मे जन्म लेता है। लालच, ईर्ष्या, ...

तौहीद, तमाम इस्लामी तालीमात की रूहे है

तौहीद, तमाम इस्लामी तालीमात की रूहे है
हमारा अक़ीदह है कि अल्लाह की माअरफ़त के मसाइल में मुहिमतरीन मस्ला माअरफ़ते तौहीद है। तौहीद दर वाक़ेअ उसूले दीन में से एक अस्ल ही नही बल्कि तमाम अक़ाइदे इस्लामी की रूह है। ...

अल्लामा इक़बाल की ख़ुदी

अल्लामा इक़बाल की ख़ुदी
अल्लामा इक़बाद उन शायरों और विचारकों में शामिल हैं जिनकी ख्याति भौगोलिक सीमाओं में नहीं समा सकी और उन्होंने क्षेत्र के स्तर से ऊपर उठकर अपनी पहचान बनाई। अल्लामा इक़बाल ...

क़ियामत और शफ़ाअत

क़ियामत और शफ़ाअत
हमारा अक़ीदह है कि क़ियामत के दिन पैग़म्बर,आइम्मा-ए-मासूमीन और औलिया अल्लाह अल्लाह के इज़्न से कुछ गुनाहगारों की शफ़ाअत करें गे और वह अल्लाह की माफ़ी के मुस्तहक़ क़रार ...

पश्चाताप

पश्चाताप
लेखक: आयतुल्लाह हुसैन अनसारियान   किताब का नाम: किताब का नाम: तोबा आग़ोशे रहमत     शांति और सुरक्षा, नफ्स की रज़ाइल से सुरक्षा, गंदे विचारों से हिफाज़त, अच्छा कर्म, अख़लाक़ ...

सुन्नत अल्लाह की किताब से निकली है

सुन्नत अल्लाह की किताब से निकली है
हमारा अक़ीदह है कि कोई भी यह नही कह सकता है कि “कफ़ाना किताबा अल्लाहि ”हमें अल्लाह की किताब काफ़ी है और अहादीस व सुन्नते नबवी (जो कि तफ़्सीर व क़ुरआने करीम के हक़ाइक़ को ...

क़रआन व इँसान की माद्दी व मानवी ज़रूरतें

क़रआन व इँसान की माद्दी व मानवी ज़रूरतें
वह तमाम चीज़ें जिन की इंसान को अपनी माद्दी व मानवी ज़िन्दगी में ज़रूरत है उन के उसूल कुरआने करीम में बयान कर दिये गये हैं। चाहे वह हुकूमत चलाने के क़वानीन हों या सियासी ...

क़ज़ा व क़दर अर्थात भाग्य पर विश्वास के प्रभाव

क़ज़ा व क़दर अर्थात भाग्य पर विश्वास के प्रभाव
र्इश्वर के क़ज़ा व क़दर अर्थात र्इश्वर द्वारा निर्धारित भाग्य व सीमा पर विश्वास र्इश्वर की पहचान के महत्वपूर्ण चरण तक मनुष्य को पहुँचाने के साथ ही साथ बौध्दिक रूप से ...

शरमिन्दगी की रिवायत

शरमिन्दगी की रिवायत
खलीफाऐ अव्वल अबुबकर बिन अबुक़हाफा एक रिवायत की बिना पर अपनी उम्र के आखरी लमहो मे तीन कामो के करने, तीन कामो के न करने, और पैग़म्बर से तीन सवालो के न पूछने से शरमिंदगी का ...