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Friday 14th of May 2021
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दुआए अहद

दुआए अहद

इमाम जाफर अल-सादिक़ (अ:स) से नकल हुआ है की जो शख्स चालीस रोज़ तक हर सुबह इस दुआए अहद तो पढ़े तो वोह इमाम (अ:त:फ) के मददगारों में से होगा और अगर वो इमाम (अ:स) के ज़हूर के पहले मर जाता है तो खुदा वंद करीम इसे क़ब्र से उठाएगा ताकि वो इमाम के हमराह हो जाए, अल्लाह ता-आल़ा इस दुआ के हर लफ्ज़ के बदले इसे एक हज़ार नेकियाँ अता करेगा और इस्ले एक हज़ार गुनाह माफ़ कर देगा, वोह दुआए अहद यह है :

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
 
अल्लाहुम्मा रब्बन-नूरिल अध्वीमी व रब्बल कुर्सिय्यिर-रफ़ी'इ व रब्बिल बहरिल मस्जूरी व मुन्ज़िलत-तौराती वल  इन्जीली वज़-ज़बूर
व रब्बद-ज़िल्ली वल हरूरी, व  मुन्ज़ीलाल कुर'आनिल अध्वीमी व रब्बल मला-ई-कातिल मुक़र्रबींन  वल  अम्बियाई वल मुरसलीन.
अल्लाहुम्मा इन्नी अस' अलुका  बी वज'हिकल  करीम व बी नूरी वज हिकल  मुनीरी  व  मुल्किकल  क़दीमी  या  हय्यु  या क़य्यूमु
अस'अलुका बिस्मिकल-लज़ी अश्रकत बिहिस-समावातु  वल  अर्ज़ूना व बिस्मिकल-ल्ज्ही यस्लाहू बिहिल अव्वालून
वल आखिरून या हय्याँ क़ब्ला कुल्ली हय्यीं व या  हय्याँ  बा'अदा  कुल्ली हय्यीं व या हय्यान हीना ला हय्या या मुहयी
-यल मौता व मुमीतातल अहया'इ या हय्यु ला इलाहा इल्ला  अन्ता अल्लाहुम्मा बल्लिग़ मव्लानल इमामल हादियल  मह्दिय्यल क़ैमा
बी अम्रीका स्वलावा तुल्लाही अलय्ही व अला आबैहित-ताहिरीन  अन जमी'इल मु'मिनीना वल मु'मिनाति फी  मशारिकिल
अर्ज़ी व मगारिबिहा, सहलिहा व जबलिहा, बर्रिहा व बहरिहा, व  अन्नी व अन वालिद्या, मिनस-सलावाती  जिनता  अर्शिल्लाही
व मिदादा कलिमातिही, वामा अह्स्वाहू इल्मुहु व अहाता  बिही  किताबुहू,  अल्लाहुम्मा इन्नी उजद्दीदु लहू फी सबीहती  युमी हाज़ा
वमा इश्तु मिन अय्यामी, अहदन व अकदन व बे'अतन  लहू  फी उनुक़ी ला अहउलू अंह वाला अजूलू अबादान. अल्लाहुम्माज
'अल्नी मिनंसअआरिही व अ'अवानिही वध-जाब्बीना अन्हु, वल मुसारी'इन  इलाय्ही फी  क़जाई  हवाईजिही  वल  मुम'तथिलीना
ली अआमिरिही वल मुहा-मीना अन्हु, वस-साबिकीना इला इरादातिही वल मुस्ताश'हदीना बयना यदय्ही. अल्लाहुम्मा  इन  हाला बयनी
व बय्नाहुल मव्तुल-लज़ी जा'अल्ताहू अला  इबादिक  हतमन  मक्धिय्याँ, फ अख्रिज्नी मिन काबरी मु'ताज़िरण, कफनी शाहिरन
सय्फी मुजर्रिदन, कनाती मुलाब्बियाँ, दा'अवाताद-दाई  फिल   हाजिरी वल बादी. अल्लाहुमा अरिनित-तवल'अतर-रशीदाता
वल गुर्रतल हमीदाता, वक्हुल नाज़री बी नजरतींन  मिन्नी  इलाय्ही, व अज्जिल फराजहू,व सह्हिल मख्राजहू, व औसी'अ  मन'हजाहू
व अन्फिज़ अम्रहू, वाश्दुद  अज्रहू व'मुरिल्ला-हम्मा  बिही  बिलादक, व अहई बिही इबादक, फ इन्नका
कुलता व कौलुकल हक्कू ज़हरल फसादु फिल बर्री वल बहरी, बीमा कसबत ऐय्दिन्नासी, फ अज्हिरी-ल्लाहुम्मा लाना
वालिय्यिक बिनती नाबिय्यिकल मुसम्म, बिस्मि रसूलिक, हत्ता ला याज्फारा बी शय'इन
मिनल बात्विली इल्ला मज्ज़क़हू, व युहिक्काल    हक्का, व  युहक्किक़हू  वज'अल्हु अल्लाहुम्मा  मफ्ज़ा'अन ली  मजलूमि इबादिक  व नासिरण लीमन
ला यजिदु लहू नासिरण गैयरक, व मुजददिदन  लीमा  उत्त्विला  मिन अहकामी किताबिक, व मुशय्यिदन  लीमा  वरदा मिन अ'अलामी
दीनिक,व सुनानी नाबिय्यिक सल्लल्लाहु अलय्ही व आलिहि   वज'अल्हु . अल्लाहुम्मा मिम्मान  हस्स्वन्ताहू  मिन बा'असिल मु'तदीन,
अल्लाहुम्मा व सुर्रा  नाबिय्यिक मुहम्मदीन सल्लल्लाहु अलय्ही  व आलिहि, बी रु'यातिही  वामन तबिअहू अला  डा'अवातिही, वार्हमिस्तिकान्तिना बा'अदाहू,
अल्लाहुमाक-शिफ हाधिहिल गुम्मता अन हादिहिल उम्मते, बी हुजूरिही व अज्जिल लाना ज़ुहूराहू, इन्नहुम  यारौनाहू  बईदन व नाराहू
करीबन बी रह्मतिका या अर्हमर-राहिमीन.
या मौलाया या साहेबज़-ज़मान
फिर तीन बार दायें रान पर हाथ मारे और हर बर कहे :
अल-अजल अल-अजल अल-अजल
अल्लाहूम्मा सल्ले अला मोहम्मदीन वा आले मोहम्मद

दुआए अहद का हिंदी अनुवाद
अल्लाहूम्मा सल्ले अला मोहम्मदीन वा आले मोहम्मद
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

ऐ माबूद, ऐ अज़ीम नूर के परवरदिगार, ऐ बुलंद कुर्सी के परवरदिगार ऐ मौजें मारते समुन्दर के परवरदिगार और ऐ तौरैत और इंजील और ज़बूर के नाज़िल करने वाले और ऐ साया और धुप के परवरदिगार, ऐ क्कुराने अज़ीम के नाज़िल करने वाले, ऐ मुक़र्रिब फरिश्त्तों और फरास्तादाह नबियों और रसूलों के परवरदिगार, ऐ माबूद बेशक मै सवाल करता हूँ तेरी ज़ात करीम के वास्ते से तेरी रौशन ज़ात के नूर के वास्ते से और तेरी क़दीम बादशाही के वास्ते से ज़िंदा, ऐ पा-इन्दाह मै तुझ से सवाल करता हूँ तेरे नाम के वास्ते से जिस से चमक रहे हैं सारे आसमान और सारी ज़मीनें तेरे नाम के वास्ते से जिस से अव्वलीन व आखेरीन ने भलाई पायी, ऐ जिंदा से पहले और ऐ जिंदा हर जिंदा के बाद और ऐ ज़िंदा जब कोई ज़िंदा न था और ऐ मुर्दों को जिंदा करने वाले ऐ जिन्दों को मौत देने वाले ऐ वोह जिंदा के तेरे सिवा कोई माबूद नहीं, ऐ माबूद हमारे मौला इमाम हादी मेहदी को जो तेरे हुक्म से क़ाएम हैं, इन पर और इनके पाक बुज़ुर्गान पर खुदाई रहमतें हों और तमाम मोमिन मर्दों और मोमिना औरतों की तरफ से जो ज़मीन के मश्रीकों और मग्रिबों में है मैदानों और पहाड़ों और खुस्कियों और समुन्दरों में मेरी तरफ से मेरे वालेदैन की तरफ से बहुत दरूद पहुंचा दे जो हम-वज़न हो अर्श और उसके कलमात की रोशनाई के और जो चीज़ें इसके इल्म में हैं और इस की किताब में दर्ज हैं ऐ माबूद में ताज़ा करता हूँ इन के लिए आज के दिन की सुबह को और जब तक जिंदा हूँ बाक़ी है यह पैमान यह बंधन और इनकी बय्यत जो मेरी गर्दन पर है न इस से मकरुन्गा न कभी तर्क करूंगा ऐ माबूद  मुझे इन के मददगारों इन के साथियों और इन का दफा-अ करने वालों करार दे मैं हाजत बर आरी के लिए इन की तरफ बढ़ने वालों इनके अहकाम पर अमल करने वालों इनकी तरफ से दावत देने वालों इनके इरादों को जल्द पूरा करने वालों और इनके सामने शहीद होने वालों में करार दे ऐ माबूद अगर मेरे और मेरे इमाम (अ:स) के दरम्यान मौत हायेल हो जाए जो तुने अपने बन्दों के लिए आमादा कर रखी है तो फिर मुझे क़ब्र से इस तरह निकालना के मेरा लिबास हो मेरी तलवार बे-नियाम हो मेरा नैज़ा बुलंद हो दाइए हक़ की दावत पर लब-बैक कहूं   और शहर गाँव में ऐ माबूद मुझे हज़रत का रूखे ज़ेबा आप की दरख्शां पेशानी दिखा, इन के दीदार को मेरी आँखों का सुरमा बना, इन की कशा-इश में जल्दी फर्मा, इन के ज़हूर को आसान बना, इन का रास्ता वसी-अ कर दे और मुझ को इन की राह पर चला, इन का हुक्म जारी फर्मा, इन की क़ुव्वत को बढ़ा और ऐ  माबूद इन के ज़रिया अपने शहर आबाद कर और अपने बन्दों को इज्ज़त की ज़िंदगी दे क्योंकि तुने फरमाया और तेरा कौल हक़ है की जाही हुआ फसाद खुश्की और समुन्दर में यह नतीजा है लोगों के गलत आमाल और अफ-आल का पस, ऐ माबूद ! ज़हूर कर हमारे लिए अपने वली (अ:स) और अपने नबी की दुखतर (स:अ) के फरजंद का जिन का नाम तेरे रसूल (स:अ:व:व)  के नाम पर है यहाँ तक की वूह बातिल का नाम व निशाँ मिटा डालें हक़ को हक़ कहें और इसे क़ाएम करें, ऐ माबूद करार दे इनको अपने मजलूम बन्दों के लिए जाए पनाह और इनके मददगार जिन के तेरे सिवा कोई मददगार नहीं बना इनको अपनी किताब के अहकाम के ज़िंदा करने वाले जो भुला दिए गए इन को अपने दीन के ख़ास अहकाम और अपने नबी के तरीकों को रासुख़ करने वाला बना इन पर और इनकी अल (स:अ) पर खुदा की रहमत हो और ऐ माबूद इन्ही लोगों में रख़ जिनको तुने जालिमों के हमले से बचाया ऐ माबूद खुशनूद कर अपने नबी मुहम्मद (स:अ:व:व) को इनके दीदार से और जिन्हों इनकी दावत में इनका साथ दिया और इनके बाद हमारी हालतज़ार पर रहम फरमा ऐ माबूद इनके ज़हूर से उम्मत की इस शकल और मुसीबत को दूर करदे और हमारे लिए जल्द इनका ज़हूर फर्मा के लोग इनको दूर और हम इन्हें नज़दीक समझते हैं तेरी रहमत का वास्ता ऐ सब से ज़्यादा रहम करने वाले या मौलाया या साहेबुज़-ज़मान
फिर तीन बार दायें रान पर हाथ मारे और हर बर कहे :
जल्द आइये जल्द आइये जल्द आइये

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