Hindi
Wednesday 8th of July 2020
  2553
  0
  0

हज़रत अली (अ.स.) की नज़र में हज़रते ज़हरा

शादी के अगले दिन जब पैगंबर ने अली (अ.स.) से पूछा:ऐ अली तुमने मेरी बेटी जहरा को कैसा पाया? इमाम ने जवाब दिया, फातिमा अल्लाह की इताअत में सबसे अच्छी मददगार हैं। अमीरुल-मोमनीन(अ.स.)फ़रमाते हैं: फातिमा कभी भी मुझसे नाराज़ नहीं हुईं और न मुझको नाराज़ किया। जब भी मै उनके चेहरे पर नज़र करता हूं मेरे सभी दुख सुलझ जाते हैं और सारी तकलीफ़ें दूर हो जाती हैं।
हज़रत अली (अ.स.) की नज़र में हज़रते ज़हरा



शादी के अगले दिन जब पैगंबर ने अली (अ.स.) से पूछा:ऐ अली तुमने मेरी बेटी जहरा को कैसा पाया? इमाम ने जवाब दिया, फातिमा अल्लाह की इताअत में सबसे अच्छी मददगार हैं।


अमीरुल-मोमनीन(अ.स.)फ़रमाते हैं: फातिमा कभी भी मुझसे नाराज़ नहीं हुईं और न मुझको नाराज़ किया।


जब भी मै उनके चेहरे पर नज़र करता हूं मेरे सभी दुख सुलझ जाते हैं और सारी तकलीफ़ें दूर हो जाती हैं।


न उन्हों ने कभी मुझे क्रोधित किया और न कभी मैने उनको रसूल्लाह स.व. फ़रमाते हैं अगर अली न होते तो फ़ातिमा के कोई बराबर न होता।


source : alhassanain
  2553
  0
  0
امتیاز شما به این مطلب ؟

latest article

    इमाम हसन असकरी अलैहिस्सलाम की ...
    बच्चों के साथ रसूले ख़ुदा (स.) का बर्ताव
    हज़रत इमाम नक़ी (अ.स.) की इमामत
    28 सफ़र रसूले इस्लाम स. और इमाम हसन अ. की ...
    चेहलुम, इमाम हुसैन अहलैबैत की नज़र में
    मासूमाऐ क़ुम जनाबे फातेमा बिन्ते ...
    कर्बला के संदेश
    जीवन में प्रगति के लिए इमाम सादिक (अ) ...
    मुआविया के युग में आंदोलन न करना
    इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम की अहादीस

 
user comment