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Wednesday 27th of October 2021
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न मुसलमान, आतंकवादी और न कभी शिया- सुन्नी दंगे हुए!

भारत के राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित इमामबाड़ा सिब्तैनाबाद में शनिवार को एक ऐतिहासिक शिया-सुन्नी एकता सम्मेलन हुआ, जिसमें शिया-सुन्नी मुसलमानों के वरिष्ठ धर्मगुरूओं और विद्वानों ने भाग लिया।
न मुसलमान, आतंकवादी और न कभी शिया- सुन्नी दंगे हुए!

भारत के राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित इमामबाड़ा सिब्तैनाबाद में शनिवार को एक ऐतिहासिक शिया-सुन्नी एकता सम्मेलन हुआ, जिसमें शिया-सुन्नी मुसलमानों के वरिष्ठ धर्मगुरूओं और विद्वानों ने भाग लिया।
 
 
 
शिया-सुन्नी एकता सम्मेलन में भारत की महत्वपूर्ण खानक़ाहों और दरगाहों के सज्जादा नशीनों ने भी भाग लिया। सम्मेलन के आरंभ में शाह सैयद वली उल्लाह सज्जादा नशीन खानक़ाह बकाईया सफीपुर ने भाषण देते हुए कहा कि इस्लाम ने कभी अराजकता और कलह की दावत नहीं दी बल्कि इस्लाम शांति व एकता का संदेश देता है इसलिए हम आज एकजुट होकर मौलाना कल्बे जवाद नक़वी के साथ आए हैं ताकि दुनिया जान ले कि शिया व सुन्नी मुसलमानों में कोई मतभेद नहीं है।
 
 
 
सम्मेलन में शामिल मौलाना हबीब हैदर ने कहा कि मानवता के नाते हर धर्म के लोगों को एकजुट होना चाहिए, क्योंकि इस्लाम समुदायों और धर्मों के अधार पर एकता का संदेश नहीं देता, बल्कि मानवता के अधार पर प्रत्येक व्यक्ति को संदेश देता है, उन्होंने कहा कि इस्लाम किसी एक समुदाय के लिए नहीं आया है, बल्कि पूरी मानवता जाति के लिए आया है।
 
 
 
सम्मेलन में भारत के वरिष्ठ शिया धर्मगुरू और इमामे जुमा लखनऊ मौलाना सैयद कल्बे जवाद नक़वी ने अपने भाषण में कहा कि शिया और सुन्नी सूफियों का यह पहला संयुक्त सम्मेलन है और अब इसके बाद हर आंदोलन और हर कार्यक्रम चाहे धार्मिक हो या राजनीतिक हम एकजुट होकर करेंगे।
 
 
 
उन्होंने कहा कि शिया और सुन्नी सूफियों के साथ आज तक हर सरकार अन्याय करती आई है और  खानक़ाहों और मज़ारों में भारत के 90 प्रतिशत मुसलमान आस्था रखते हैं और दूसरा पंथ जो हर सरकार में शामिल है वह केवल दस प्रतिशत है, लेकिन क्या कारण है कि हमारी 90 प्रतिशत आबादी को सरकार क्यों स्वीकार नहीं करती, हमें अल्पसंख्यक संस्थानों में प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दिया जाता।
 
मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि यह सम्मेलन दादरी में हुई घटना की निंदा के लिए भी है, केंद्र सरकार और राज्य सरकार दादरी मामले पर गंभीर हो और सख्त कार्यवाही करे।
 
 
 
उन्होंने कहा कि यमन में आतंकवाद जारी है और मुसलमानों की हत्या और नरसंहार किया जा रहा है, पुरी दुनिया में आतंकवाद की तारीख़ उठाकर देख लें ना शिया आतंकवादी मिलेगा न सुनी बल्कि एक पंथ है जो हर आतंकवादी घटना के लिए ज़िम्मेदार है।
 
 
 
शिया-सुन्नी सम्मेलन में शामिल हुए सैयद सलमान चिश्ती सज्जादा नशीन दरगाह गरीब नवाज़ अजमेर शरीफ़ ने कहा कि इस्लाम बिना शर्त प्यार और शांति का संदेश देता है और अगर आज भी हम एकजुट नहीं हुए तो दुश्मन ने हमारी जड़ें खोदना शुरू कर दी हैं ऐसा न हो के इस्लाम तो रहे हम न रहें।
 
 
 
किछौछा शरीफ़ के ऑल इंडिया मशाएख़ बोर्ड के चेयरमैन सय्यद अशरफ़ अशरफ़ी ने कहा कि आज इस्लाम बनाम इस्लाम अभियान चलाया जा रहा है लेकिन मैं पूरे विश्वास के साथ कह रहा  हूँ कि कभी  कहीं भी शिया व सुन्नी दंगा नहीं हुआ और न होगा बल्कि मुसलमान और वहाबियों के बीच दंगा होता है।
 
 
 
उन्होंने ने कहा कि उत्तर से लेकर पश्चिम तक अहले सुन्नत इमाम हुसैन की अज़ादारी करते हैं भला वो कैसे अज़ादारी के ख़िलाफ़ हो सकते हैं, हमारे और वहाबियों की विचारधारा में अंतर है और वहाबियों की ही विचारधारा पूरी दुनिया में आतंकवाद फैला रही है।
 
 
 
सय्यद अशरफ़ी ने कहा कि वहाबियों की इस विचारधारा का शिकार शिया व सुन्नी उलेमा होते रहे हैं, इस विचारधारा ने इस्लाम को दरिंदगी का धर्म बनाकर पेश किया है। उन्होंने कहा कि यह लोग उस समय चुप होकर बैठ जाएंगे जब हम लोग एकजुट होकर इनके सामने खड़े हो जाएंगे।
 
 
 
शिया-सुन्नी एकता सम्मेलन में भाग लेने आए धर्मगुरूओं और बुद्धिजीवियों ने इस अवसर पर विश्व भर में हो रहे आतंकवाद की कड़े शब्दों में निंदा की और सांप्रदायिक ताकतों की साज़िशों व योजनाओं  से होशियार रहने पर बल देते हुए कहा कि सांप्रदायिकता हमारे देश के लोकतंत्र के लिए नासूर है ऐसी सोच पर  काबू  करना अत्यंत आवश्यक है।
 
 
 
सम्मेलन में शामिल धर्मगुरूओं और सज्जादा नशीनों ने सर्वसम्मति से कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने मुसलमानों से जो चुनावी वादे किए थे, उन पर अभी तक विचार तक नहीं हो सका है इसलिए जल्द से जल्द इन सभी वादों को पूरा किया जाए। हमारी मांग है कि मुसलमानों के लिए 18 प्रतिषत आरक्षण का वादा जो राज्य सरकार ने किया था अब तक पूरा नहीं हो सका है  इस लिए  इस वादे को पूरा किया जाए। (RZ)


source : irib
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