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Friday 2nd of October 2020
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पाप 2

पाप 2

पुस्तक का नामः पश्चाताप दया का आलंग्न

लेखकः आयतुल्ला अनसारीयान

 

पूर्व लेख मे यह बात बताई गई थी कि बड़े पापो का करना, आज्ञा का पालन ना करना, पाप करना, बुराईयो का चयन, वासना के साथ मिलना, संक्षिप्त मे प्रत्येक प्रकट तथा गुप्त पाप का जान बूझ कर अथवा अनजाने मे करना।  

इस लेख मे हम उन पापो की विषय सूची का स्पष्टीकरण कर रहे है जिनका त्यागना अनिवार्य है।

अधर्म रक्त का बहाना, माता पिता का आक़ करना, समबंधो का समाप्त करना, युद्धस्थल से भागना, प्रांजल व्यक्ति की झूठी निंदा (पाक दामन पर तोहमत लगाना), ज़ुल्म व अत्याचार करके अनाथो का माल हड़पना, झूठी गवाही देना, गवाही का छुपाना, कम मूल्य मे धर्म का बेचना, ब्याज़ का खाना, देशद्रोही, हराम माल, जादू, कहानत, अपशकुन बाते करना, शिर्क, कपट (पाखंड), चोरी, शराब पीना, कम तौलना, डंडी मारना, घृणा तथा शत्रुता, दुलब्बापन, वचन का तोडना, इलज़ाम लगाना, छल और षडयंत्रकारी, धिम्मियो के ख़िलाफ़ प्रतिबद्धता का तोड़ना, सौगंध, बुराई करना, गपशप, तिरस्कार, चुग़्ली करना और मीन मेख निकालना, बुरा कहना, व्यक्तियो के बुरे नाम रखना, पडौसी को कष्ठ पहुँचाना, बिना अनुमति लोगो के घरो मे प्रवेश करना, घमंड करना, हेकडी दिखाना, निरंतर

पाप करना, अभिमानी की आत्मा, घमंड के साथ चलना, आदेश का पालन करने मे ज़ुल्म करना, क्रोध के समय अत्याचार, पक्षपात, अत्याचारी का सुद्दढ़ीकरण, पाप तथा शत्रुता मे सहायता, समपत्ति बच्चो मे अल्पसंख्या, लोगो के प्रति ग़लत विचार, हवस का पालन, वासना की आज्ञाकारिता, बुराई की ओर दावत, अच्छाई से रोकना, धरती पर भ्रष्टाचार, हक़ को नकारना, अत्याचारियो को सिंहासन देना, छल, धोखा, लोभ, अज्ञात बाते करना, मुर्दा रक्त तथा सूअर का मांस खाना, और उन जानवरो का खाना जिन्हे अवैधरूप से (ग़ैर क़ानूनी) मारा गया हो, ईर्ष्या, बुराई की ओर दावत देना, जो ईश्वर की ओर से प्रदान कि गई है उनकी तमन्ना करना, खुदी, क्षमा करने मे विनति करना, अत्याचारिता, क़ुरआन का इनकार करना, अनाथ का अपमान करना, फ़क़ीर को धुतकारना, क़सम तोड़ना, झूठी क़सम खाना, लोगो की समपत्ति मे अत्याचार करना, बुरि नज़र करना, बुराई सुनना, बुरा कहना, बुरे कार्य करना, ग़लत क़दम उठाना, बुरि नियत से किसी चीज को स्पर्श करना, आत्म कथन की करूपता, झूठी क़सम[1]

इन सभी पापो का त्यागना अनिवार्य है तथा इन से संक्रमित होना हराम (अवैध) है, इस मलाकूती लेख मे छठे इमाम से इस बात का स्पष्टीकरण हुआ है कि जिन पापो से पश्चाताप करना अनिवार्य है इसमे उनकी गणना हुई है।



[1] बिहारुल अनवार, भाग 94, पेज 328, अध्याय 2

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