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Saturday 4th of July 2020
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कुरआन मे प्रार्थना 2

कुरआन मे प्रार्थना 2

लेखक: आयतुल्लाह हुसैन अनसारियान

 

किताब का नाम: शरहे दुआ ए कुमैल

 

इस से पूर्व हमने क़ुरआन का एक छंद  बयान किया था जिस मे कहा गया है कि (जिस समय मेरे सेवक तुझ से मेरे बारे मे प्रश्न करे, (उत्तर यह है) निश्चित रूप से मै नज़दीक हूँ प्रार्थी की आवाज़ सुनता हूँ जब भी वह प्रार्थना करता है।)

 

 

हा, परमेश्वर के आलावा कोई भी सेवको (बन्दो) से नज़दीक नही है, वह निकट है वह मनुष्य का जन्मदाता, उसने मनुष्य का गर्भ मे पालन पोषण किया, गर्भ से उसे संसार मे लाकर अपने इस अतिथि के हेतु आध्यात्मिक एवम भौतिक (मानावी ओर माद्दी) चीज़ो को फैलाया, मार्ग दर्शन एवम दुनीया और आखेरत की समृद्धि (सआदत) के हेतु ईश्वरदूतो (अंबिया) को भेजा, क़ुरान और मासूम इमाम जैसी अनूठी नेमत प्रदान की, प्यास को साफ़ एनम स्वच्छ पानी से, भूख को पर्याप्त एवम स्वादिष्ट भोजन से दूर किया। उसकी बीमारी का इलाज करता है। अकेलेपन को महीलाओ और बच्चो। मित्रो और साथीयो से क्षतिपूर्ति की। उसकी नग्नता को अनेक प्रकार के वस्त्रो से ढका। उसके प्रति प्रेम को ह्रदय मे डाला। कठिनाईया चाहे गंभीर हो या कठोर उनको सरल करता है। स्वास्थय को जारी रखता है। उसकी इज़्ज़त और श्रेय (वक़ार, साख) को बढ़ाता है। परमेश्वर के अलावा कौन है जो इन सारी चीज़ो को उसे प्रदान करे और कौन है जो ईश्वर के समान, हालात और उसकी आवश्यकताओ का ज्ञान रखता है।      

हा, वह (परमेश्वर) मनुष्यो के सबसे अधिक समीप है जहा तक पवित्र क़ुरान मे का कथन है

وَ لَقَد خَلَقنَا الاِنسَان وَ نَعلَمُ مَا تُوَسوِسُ بِہِ نَفسُہُ وَ نَحنُ أَقرَبُ اِلَیہِ مِن حَبلِ الوَرَید(सूराए क़ाफ़,50, आयत 16)

और हमने मनुष्य को पैदा किया है और हमे ज्ञान (मालूम) है कि यह नफ़्स किन वसवसो को जन्म देता है और हम इस से गरदन की रग से अधिक समीप (क़रीब) है।

ईश्वरदूत (अम्बिया) बुद्धि, चातुर्य (दरायत), दृष्टि एवम आदरता (करामत) के लिहाज़ से मनुष्यो मे बेहतर है। उनकी जान, ह्रदय सभी की जान और ह्रदयो से अधिक नूरानी है। उनको अनदेखे तत्थो की हक़ीक़त और अंतर्ज्ञान (शुहूद) का पुर्ण ज्ञान है वास्तविकताओ (सच्चाईयो) को जानते है, प्रार्थना के प्रति दिलि गहरा लगाव था, इसीलिए इस से मज़बूत संबंध थे, कोई दिन और रात ऐसा नही था कि वह अपनी आयु का एक हिस्सा प्रार्थना करने मे खर्च ना करते हो और प्रार्थना के मार्ग से अमने महबूब के सामने हाज़िर ना होते हो।   

 

जारी

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