Hindi
Monday 25th of September 2017
Articles

शहीदो के सरदार इमाम हुसैन की अज़ादारी

मोहर्रम का दुःखद महीना फिर आ गया। लोग मोहर्रम मनाने की तैयारी करने लगे हैं। मोहर्रम आने पर बहुत से लोग यह सोचने लगते हैं कि आखिर क्या वजह है कि १४ शताब्दियां बीत जाने के ...

इमाम ह़ुसैन (स अ) के भाई जो कर्बला में शहीद हुए

कर्बला में जिन नेक और अच्छे इंसानों ने सह़ी और कामयाब रास्ते को अपनाया और अपने ज़माने के इमाम के नेतृत्व में बुरे लोगों के मुक़ाबले, अपनी ख़ुशी के साथ जंग की और शहीद हुए ...

करबला....अक़ीदा व अमल में तौहीद की निशानियाँ

तौहीद का अक़ीदा सिर्फ़ मुसलमानों के ज़हन व फ़िक्र पर असर अंदाज़ नही होता बल्कि यह अक़ीदा उसके तमाम हालात शरायत और पहलुओं पर असर डालता है। ख़ुदा कौन है? कैसा है? और उसकी ...

इंतेख़ाबे शहादत

वाक़ेया ए करबला रज़्म व बज़्म, सोज़ व गुदाज़ के तास्सुरात का मजमूआ नही, बल्कि इंसानी कमालात के जितने पहलु हो सकते हैं और नफ़सानी इम्तियाज़ात के जो भी असरार मुमकिन हैं उन सब ...

आशूरा का रोज़ा

जैसे ही नवासा ए रसूल (स) हज़रत इमाम हुसैन (अ) के क़याम व शहादत का महीना, मोहर्रम शुरु होता है वैसे ही एक ख़ास सोच के लोग इस याद और तज़करे को कमरंग करने की कोशिशें शुरु कर देते ...

माहे मुहर्रम

इमाम हुसैन (अ:स) अपने नाना रसूल अल्लाह (स:अ:व:व) से उम्मत द्वारा किये गए ज़ुल्म को ब्यान करते हुए कहते हैं :नाना आपके बाद आपकी उम्मत ने माँ फातिमा (स:अ) पर इतना ज़ुल्म ढाया की मेरा ...

पूरी दुनिया में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई ईदे ग़दीर।

अहलेबैत (अ )न्यूज़ एजेंसी अबना : इस्लामी राष्ट्र ईरान समेत समस्त विश्व में ईदे ग़दीर का जश्न पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। 18 जिल्हिज्जा 10 हिजरी को रसूले अकरम ...

सब से बड़ा मोजिज़ा

हमारा अक़ीदा है कि क़ुरआने करीम पैग़म्बरे इस्लाम (स.) का सब से बड़ा मोजज़ा है और यह फ़क़त फ़साहत व बलाग़त, शीरीन बयान और मअनी के रसा होने के एतबार से ही नही बल्कि और ...

क़ुरआने करीम की तफ़्सीर के ज़वाबित

हमारा मानना है कि क़ुरआने करीम के अलफ़ाज़ को उनके लुग़वी व उर्फ़ी मअना में ही इस्तेमाल किया जाये,जब तक आयत में अलफ़ाज़ के दूसरे मअना में इस्तेमाल होने का कोई अक़्ली या ...

हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम

माता पिताहज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम के पिता हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम तथा आपकी माता हज़रत फ़ातिमा ज़हरा थीं। आप अपने माता पिता की प्रथम संतान थे।जन्म तिथि व जन्म ...

अमीरुल मोमिनीन अ. स.

नाम व उपाधियाँआपका नाम अली व आपके अलक़ाब अमीरुल मोमेनीन, हैदर, कर्रार, कुल्ले ईमान, सिद्दीक़,फ़ारूक़, अत्यादि हैं।माता पिताआपके पिता हज़रतअबुतालिब पुत्र हज़रत अब्दुल ...

इमाम अली (अ) और आयते मुबाहला

ख़ुदा वंदे आलम फ़रमाता है:(सूरह आले इमरान आयत 61)ऐ पैग़म्बर, इल्म के आ जाने के बाद जो लोग तुम से कट हुज्जती करें उनसे कह दीजिए कि (अच्छा मैदान में) आओ, हम अपने बेटे को बुलायें तुम ...

** 24 ज़िलहिज्ज - ईद मुबाहिला **

मुबाहिला का वाकया हिजरी कैलन्डर के 9वें साल में हुआ। इस घटना में 14 ईसाई विद्वानों (नजरान) का एक दल इस्लाम की सत्यता पर तर्क करने हज़रत मोहम्मद (स:अ:व:व) के पास आया ! दोनों पक्षों ...

ईदे मुबाहेला के अवसर पर विशेष

इस्लामी हिजरी क़मरी वर्ष के बारहवें महीने ज़िल्हज्जा की 24 तारीख़ को पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम तथा नजरान क्षेत्र के ईसाइयों के बीच मुबाहेला हुआ ...

क़ुरआन और इल्म

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीमक़ुरआन और इल्म क़ुरआन और इल्म के रिश्ते को समझने के लिए इतना काफ़ी है कि क़ुरआन आलमें इंसानियत की रहबरी के लिए आया है और आलमे इंसानियत का कमाल ...

उलूमे क़ुरआन का परिचय

क़ुरआने करीम ज्ञान पर आधारित एक आदर्श किताब है।परन्तु इसके भाव हर इंसान नही समझ सकता। जब कि क़ुरआन अपने आश्य को समझाने के लिए बार बार एलान कर रहा है कि बुद्धि से काम क्यों ...

इमाम काज़िम और बीबी शतीता

इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम के ज़माने मे नेशापुर के शियो ने मौहम्मद बिन अली नेशापुरी नामी शख़्स कि जो अबुजाफर खुरासानी के नाम से मशहूर था, को कुछ शरई रकम और तोहफे साँतवे इमाम ...

इमाम काज़िम की एक नसीहत

इमाम मूसा काजि़म (अ) के एक हक़ीक़ी शीया ‘‘सफ़वान‘‘ ने एक ज़ालिम को ‘‘सफ़रे हज‘‘ के लिए अपने ऊँट किराए पर दे दिए थे, एक रोज़ सफ़वान की मुलाक़ात इमाम मूसा काजि़म (अ) ...

इमामे मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम

अब्बासी शासक हारून बड़ा अत्याचारी एवं अहंकारी शासक था। वह स्वयं को समस्त चीज़ों और हर व्यक्ति से ऊपर समझता था।वह विश्व के बड़े भूभाग पर शासन करता और अपनी सत्ता पर गर्व ...

हदीसे ग़दीर की सेहत का इक़रार करने वाले उलामा ए अहले सुन्नत

बहुत से ने हदीसे गदीर की सेहत का इक़रार किया है जैसे:1. इब्ने हजरे हैतमीमौसूफ़ कहते हैं: हदीसे ग़दीर सही है और उसमें किसी तरह कोई शक व शुब्हा नही है, एक जमाअत जैसे तिरमिज़ी, ...