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Friday 14th of December 2018
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दुआ-ए-सनमी क़ुरैश

दुआ-ए-सनमी क़ुरैश
इब्ने अब्बास बयान करते हैं कि एक रात मैं मस्जिदे रसूल में गया ताकि नमाज़े शब वहीं अदा करू ,चुनॉचे मैंने हज़रते अमीरूलमोमिनीन (अ.स.) को नमाज़ में मशग़ूल देखा ,एक गोशे में बैठकर ...

दुआ - उल - अ'दीला

दुआ - उल - अ'दीला
अ'दीला मौत से मुराद, मौत के वक़्त हक़ से बातिल की तरफ़ फिर जाना है, यानी जाँ-कुनी (मौत) के वक़्त शैतान शक में डाल कर गुमराह कर देता है और यू इंसान ईमान छोड़ बैठता है!यही वजह है की ...

ज़ोहर की नमाज़ की दुआऐ

ज़ोहर की नमाज़ की दुआऐ
जोहर की नमाज़ पढने के पहले की दुआ जैसे ही दोपहर का वक़्त हो यह दुआ पढ़ें! रिवायत है की इमाम अल-बाक़र (अ:स) ने मोहम्मद इब्न मुस्लिम को यह दुआ बराबर पढने की ताकीद की थी ताकि उनकी ...

असर की नमाज़ की दुआऐ

असर की नमाज़ की दुआऐ
असर की नमाज़ पढने के पहले की नाफ़िलह नमाज़ :   8 रक्'अत नमाज़ (2-2 रक्'अत में….2x4) जोहर की नाफ़िलह नमाज़ पढ़ें! इसे असर की नमाज़ से से पहले पढने की ताकीद की गयी है।   इमाम जाफ़र ...

इस्लाम मानव जीवन को चलाया करता है

इस्लाम मानव जीवन को चलाया करता है
इस के पूर्व कथा हूई है, कि मानव जीवन को चलाने के लिए ख़ूबसूरत व उत्तम क़ानून पवित्र इस्लाम-धर्म में उपस्थित है। जो बयान हूआ है. कि इस्लाम एक ऐसा उत्तम व ख़ूबसूरत क़ानून है, जो ...

कस्बे रोज़ी

कस्बे रोज़ी
मतने हदीस अन अबी उमर क़ाला : क़ला रसूलुल्लाहि(स.):लैसा शैउन तुबाइदुकुम मिन्नारि इल्ला व क़द ज़करतुहु लकुम व ला शैउन युक़र्रिबुकुम मिनल जन्नति इल्ला व क़द दलल्तुकुम अलैहि ...

नज़र अंदाज़ करना

नज़र अंदाज़ करना
  बे अहमीयत चीज़ों से लापरवाही बरतते हुए उन्हे नज़र अंदाज़ करके अपनी शख़्सियत की हिफ़ाज़त करें। क्यों नज़र अंदाज़ करना चाहिये?   समाजी ज़िन्दगी और घरेलू ज़िन्दगी में ...

एकता मुसलमानों की प्रगति रेखा

एकता मुसलमानों की प्रगति रेखा
वास्तव में हम मुसलमानों को क्या हो गया है?। बहुत आश्चर्य की बात है कि हम सारे मुसलमान एक अल्लाह की इबादत करते हैं, एक पैग़म्बर को मानते हैं, एक ही किताब पर ईमान रखते हैं तथा ...

तजुर्बे

तजुर्बे
अज़ीजों ज़िन्दगी तजुर्बों का ही नाम है, तजर्बे इंसान की ग़लतीयो की इस्लाह करते हैं और इंसान को ज़िन्दगी बसर करने के बेहतरीन तरीक़े सिखाते हैं। तजर्बे, हर तरह की शको तरदीद ...

पाँच नेक सिफ़तें

पाँच नेक सिफ़तें
पाँच नेक सिफ़तें हदीस- अन अनस बिन मालिक क़ाला “समिति रसूलल्लाहि(स) फ़ी बाअज़ि ख़ुतबिहि व मवाइज़िहि..... रहिमल्लाहु अमराअनक़द्दमा ख़ैरन,व अनफ़क़ा क़सदन, व क़ाला सिदक़न व ...

दुआ और उसकी शर्तें

दुआ और उसकी शर्तें
अगर आज हम अपनी दुनिया और आस-पास के वातावरण में देखें तो हर इंसान को कुछ न कुछ आवश्यकता होती है कुछ ज़रूरत होती है कभी किसी मुश्किल में घिरा होता है तो कभी परिवार की परेशानी ...

इंसान की आज़ादी

इंसान की आज़ादी
हमारा अक़ीदह यह है कि अल्लाह ने इंसान को आज़ाद पैदा किया है । इंसान अपने तमाम कामों को अपने इरादे व इख़्तेयार के साथ अंजाम देता हैं। अगर हम इंसान के कामों में जब्र के क़ाईल ...

इंसान की आज़ादी

इंसान की आज़ादी
हमारा अक़ीदह यह है कि अल्लाह ने इंसान को आज़ाद पैदा किया है । इंसान अपने तमाम कामों को अपने इरादे व इख़्तेयार के साथ अंजाम देता हैं। अगर हम इंसान के कामों में जब्र के क़ाईल ...

रसूले ख़ुदा(स)की अहादीस

रसूले ख़ुदा(स)की अहादीस
जो व्यक्ति शिक्षा प्राप्ति हेतु एक घंटे के अपमान को सहन नहीं करेगा वह सदैव अज्ञानता के अपमान में ग्रस्त रहेगा। हमारा चाहने वाला वो हैं जो हमारा अनुसरण करे हमारे ...

आसमान वालों के नज़दीक इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) की उपाधि पहले से ही सादिक़ थी।

आसमान वालों के नज़दीक इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) की उपाधि पहले से ही सादिक़ थी।
हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ का नाम जाफ़र, आपकी कुन्नियत अबू अब्दुल्लाह, अबू इस्माईल और आपकी उपाधियां, सादिक़, साबिर व फ़ाज़िल और ताहिर हैं, अल्लामा मज़लिसी लिखते हैं कि ...

मैराजे पैग़म्बर

मैराजे पैग़म्बर
किताबे मुन्तहल आमाल मे बयान किया गया है कि आयाते क़ुराने करीम और अहादीसे मुतावातिरा से साबित होता है कि परवरदिगारे आलम ने रसुले अकरम स.अ.व.व. को मक्का ए मोअज़्ज़मा से ...

सहीफ़ए सज्जादिया का परिचय

सहीफ़ए सज्जादिया का परिचय
सहीफ़ए सज्जादिया जिसे, उख़्तुल क़ुरआन यानी क़ुरआने मजीद की बहन कहा जाता है इमाम ज़ैनुल आबेदीन अ. की वह दुआएं हैं जो आपने अपनी पूरी ज़िन्दगी ख़ास तौर से कर्बला के बाद पैंतीस ...

इमाम महदी(अ.स) की ज़ियारत

इमाम महदी(अ.स) की ज़ियारत
इस ग़ैबत के ज़माने की सब से बड़ी मुश्किल और परेशानी यह है कि शिया अपने मौला व आक़ा के दर्शन से वंचित हैं। ग़ैबत का ज़माना शुरु होने के बाद से उनके ज़हूर का इन्तेज़ार करने ...

चेहलुम के दिन की ज़ियारत हिन्दी अनुवाद के साथ

चेहलुम के दिन की ज़ियारत हिन्दी अनुवाद के साथ
सफ़र महीने की बीसवी तारीख़ को इमाम हुसैन (अ) की ज़ियारत के लिए दो तरीक़े बयान किए गए हैं पहला तरीक़ा वह है जिसे शेख़ तूसी ने तहज़ीब और मिस्बाह नामक किताबों में सफ़वान जम्माल ...

आमाले लैलतुल रग़ा'ऐब

आमाले लैलतुल रग़ा'ऐब
लैलतुल रग़ा'ऐब - रजब की पहली शबे जुमा (नौचंदी जुमारात) मोहम्मदे मुस्तफ़ा(स.अ) नें फ़रमाया कि :रजब की पहली शबे जुमा से ग़ाफ़्लि ना होना कि इसे फ़रिशते लैलतुल रग़ा'ऐब कहते हैं । ...