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Thursday 18th of October 2018
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ईश्वरीय दूतों का वियोग

ईश्वरीय दूतों का वियोग
ईश्वरीय दूतों का एक महत्वपूर्ण दायित्व अज्ञानता, अधर्मिता, अंध विश्वास के विरुद्ध संघर्ष और अन्याय, अत्याचार एवं मानवाधिकारों के हनन के विरुद्ध आंदोलन छेड़ना था। अंतिम ...

एहसान

एहसान
एहसान इंसानी समाज में बहुत कॉमन लफ़्ज़ है। एर ग़ैर मुस्लिम भी एहसान को अच्छी तरह जानता है। बस फ़र्क़ यह है कि जो एहसान का लफ़्ज़ हमारे समाज में इस्तेमाल होता है वह क़ुरआन ...

आशूरा के पैग़ाम

आशूरा के पैग़ाम
कर्बला के वाक़ये और हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के अक़वाल पर नज़र डालने से आशूरा के जो पैग़ाम हमारे सामने आते हैं, उनको इस तरह बयान किया जा सकता। पैग़म्बर (स.) की सुन्नत को ...

करबला....अक़ीदा व अमल में तौहीद

करबला....अक़ीदा व अमल में तौहीद
तौहीद का अक़ीदा सिर्फ़ मुसलमानों के ज़हन व फ़िक्र पर असर अंदाज़ नही होता बल्कि यह अक़ीदा उसके तमाम हालात शरायत और पहलुओं पर असर डालता है। ख़ुदा कौन है? कैसा है? और उसकी ...

हज़रत इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम का जीवन परिचय

हज़रत इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम का जीवन परिचय
नाम व अलक़ाब (उपाधियाँ) इमामे सज्जाद अलैहिस्सलाम का नाम अली व आपकी मुख्य उपाधि सज्जाद हैं।   माता पिता आपके पिता हज़रत इमामे हुसैन अलैहिस्सलाम व आपकी माता हज़रते शहरबानो ...

एहसान

एहसान
एहसान इंसानी समाज में बहुत कॉमन लफ़्ज़ है। एर ग़ैर मुस्लिम भी एहसान को अच्छी तरह जानता है। बस फ़र्क़ यह है कि जो एहसान का लफ़्ज़ हमारे समाज में इस्तेमाल होता है वह क़ुरआन ...

पेंशन

पेंशन
एक नसरानी बूढ़े ने ज़िन्दगी भर मेहनत करके ज़हमतें उठाईं लेकिन ज़ख़ीरे के तौर पर कुछ भी जमा न कर सका, आख़िर में नाबीना भी हो गया। बूढ़ापा, नाबीनाई, और मुफ़लिसी सब एक साथ जमा हो ...

बदकारी

बदकारी
बदकारी की सुरक्षा के लिये इस्लाम ने दो तरह के इंतेज़ामात किये हैं: एक तरफ़ इस रिश्ते की ज़रूरत और अहमियत और उसकी सानवी शक्ल की तरफ़ इशारा किया है तो दूसरी तरफ़ उन तमाम ...

मानव की आत्मा की स्फूर्ति के लिए आध्यात्म एक मूलभूत आवश्यकता है

मानव की आत्मा की स्फूर्ति के लिए आध्यात्म एक मूलभूत आवश्यकता है
मानव इतिहास के आरंभ से आज तक, जबकि वर्तमान समय में वैज्ञानिक तथा तकनीकी प्रगति हर क्षेत्र में दिखाई दे रही है, मनूष्य में सदा ही धर्म की ओर झुकाव देखा गया है तथा वह आध्यात्म ...

सलाह व मशवरा

सलाह व मशवरा
कामों में दूसरों से मशवरा करो। समाजी तरक़्क़ी का एक पहलू मशवरा करना है। मशवरा यानी मिलकर फ़िक्र करना। इसमें कोई शक नही है कि जो लोग मशवरा करते हैं, उनमें अक़्ल व फ़िक्र ...

सिलये रहम

सिलये रहम
मनुष्य सहित हर जीवित प्राणी अपनी आधार भूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रयास करता है क्योंकि उसकी आवश्यकताओं के पूरा न होने की स्थिति में चाहे वे आवश्यकताएं भौतिक हों या ...

ख़ड़ा डिनर है ग़रीबुद्दयार खाते हैं

ख़ड़ा डिनर है ग़रीबुद्दयार खाते हैं
बचपन में बारहा देखा है कि अगर फ़क़ीर दरवाज़े पर आजाता तो खाने का सवाल करना न भूलता और घर वाले भी फ़राख़ दिली से फ़क़ीर के लिए खाना भेज देते, वह बेचारा इतना भूका होता कि दिया ...

तक़वा

तक़वा
 एक जाना पहचाना और बहुत ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला लफ़्ज़ (शब्द) है। कुर्आन में यह लफ़्ज़ noun और verb दोनों सूरतों में पचासों जगह पर आया है। यह लफ़्ज़ लगभग उतनी ही बार इस्तेमाल ...

हज़रत इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम का जीवन परिचय

हज़रत इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम का जीवन परिचय
नाम व अलक़ाब (उपाधियाँ) इमामे सज्जाद अलैहिस्सलाम का नाम अली व आपकी मुख्य उपाधि सज्जाद हैं।   माता पिता आपके पिता हज़रत इमामे हुसैन अलैहिस्सलाम व आपकी माता हज़रते शहरबानो ...

हस्त मैथुन जवानी के लिऐ खतरा

हस्त मैथुन जवानी के लिऐ खतरा
आम तौर से यह बात समझी जाती है कि जवानी में केवल लड़के ही हस्त मैथुन (मुश्त ज़नी) जैसा खतरनाक काम करते हैं जब कि यह गलत है क्योंकि इस बात का सुबूत मौजूद है कि हस्त मैथुन ...

अज़ादारी रस्म (परम्परा) या इबादत

अज़ादारी रस्म (परम्परा) या इबादत
आमपौर पर (अधिकतर) हमारी ज़बानों से एक वाक्य सुनने को मिलता है रवासिमे अज़ा (रीतियाँ) मरासिमे अज़ा (प्रथाऐं) जिसका अर्थ हर वह कार्य होता है जिसका सम्बन्ध अज़ादारी से हो। ...

प्रकाशमयी चेहरा “जौन हबशी”

प्रकाशमयी चेहरा “जौन हबशी”
जौन बिन हुवैइ बिन क़तादा बिन आअवर बिन साअदा बिन औफ़ बिन कअब बिन हवी (1), कर्बला के बूढ़े शहीदों मे से थे। आप अबूज़र ग़फ़्फ़ारी और इमाम हुसैन (अ) के दास थे। आप अबूज़र ग़फ़्फ़ारी ...

हुसैन(अ)के बा वफ़ा असहाब

हुसैन(अ)के बा वफ़ा असहाब
मैंने अपने असहाब से आलम और बेहतर किसी के असहाब को नही पाया। हमारी दीनी तालीमात का पहला स्रोत क़ुरआने मजीद है। क़ुरआन के बाद हम जिन रिवायात का तज़किरा करते हैं वह दो तरह की ...

अज़ादारी और इसका फ़लसफ़ा

अज़ादारी और इसका फ़लसफ़ा
हमारा अक़ीदह है कि शोहदा-ए- इस्लाम मख़सूसन शोहदा-ए-कर्बला के लिए अज़ादारी बरपा करना, इस्लाम की बक़ा के लिए उनकी जाफ़िशानी व उनकी याद को ज़िन्दा रखने का ज़रिया है। इसी वजह से ...

आशूरा के बरकात व समरात

आशूरा के बरकात व समरात
इस्लाम की फ़तह हुई और मिटने से महफ़ूज़ रहा क्योकि मंसबे इलाही पर ख़ुद ग़ासिब ख़ुद साख़्ता अमीरुल मोमिनीन यज़ीद ने अपने शैतानी करतूतों से इस्लाम के नाम पर इस्लाम को इतना ...