Hindi
Monday 24th of September 2018

शहादते इमामे मूसा काज़िम



इमामे हफतुमी मूसीए काज़िम दिलबरे ज़हरा
वसीए सादिके आले नबी को ज़हर से मारा


मुकय्यद सत्तरह साल आप ज़िन्दा में रहे पैहम
मगर शिकवा बजुज़ जिक्रे खुदा लब तक नहीं आया


नमाज़े पढ़ता था वक़्ते फज़ीलत रोज़ादार उठकर
फ़रागत पाते ही करता था फिर माबूद का सजदा


सुना यूँ शह को कहते बारहा दरबारे ज़िन्दां ने
के ख्वाहिश थी दिया तूने मुझे ताअत को घर तन्हा


थे एक दिन मुबतिलाए दर्द मौला यह ख़बर सुनकर
तबीबे ख़ास को हारुन रशीदे नहस ने भेजा


यह फहमाएश हकीमे रू सियाह से की थी ताकीदन
दवा में इब्ने फ़रज़न्दे नबी को ज़हर दे देना।

latest article

      आशूरा के असरात
      माहे मुहर्रम
      हुसैन ने इस्लाम का चिराग़ बुझने न दिया
      शहीदो के सरदार इमाम हुसैन की अज़ादारी
      हदीसे ग़दीर को छिपाने वाले
      इमाम अली नक़ी (अ.स.) के करामात
      इमाम अली नक़ी अ.स. के क़ौल
      सूरए हिज्र की तफसीर 1
      सूरे रअद का की तफसीर 2
      माहे ज़ीक़ाद के इतवार के दिन की नमाज़

user comment