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Tuesday 21st of May 2019
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दर्द नाक हादसों का फ़लसफ़ा

हमारा अक़ीदह है कि वह दर्दनाक हादसे जो इस दुनिया में वाक़े होते हैं (जैसे ज़लज़ला, आसमानी या ज़मीनी बलाऐं वग़ैरह)

वह कभी अल्लाह की तरफ़ से सज़ा के तौर पर होते हैं जैसे जनाबे लूत की क़ौम के बारे में ज़िक्र हुआ है फ़लम्मा जाआ अमरुना जअलना आलियाहा साफ़िलहा व अमतरना अलैहिम हिजारतन मिन सिज्जीलिन मनज़ूदिन [1] यानी जब हमारा हुक्म(अज़ाब के लिए) पहुँचा तो हम ने उनके शहरों को ऊपर नीचे कर दिया और उन पर पत्थरों की बारिश की।

 मुल्के सबाके नाशुक्रे लोगों के बारे में फ़रमाया कि फ़अरिज़ू फ़अरसलना अलैहिम सैला अलअरिमि यानी उन्होंने अल्लाह की इताअत से रूगरदानी की बस हमने उन को विरान करने वाले सैलाब में मुबतला कर दिया।

कभी यह हादसे इंसान को बेदार करने के लिए होते हैं ताकि वह राहे हक़ पर लौट आयें जैसे कि क़ुरआने करीम में इरशाद हुआ है ज़हर अलफ़सादु फ़ी अलबर्रि व अलबहरि बिमा कसबत अयदि अन्नासि लियुज़िक़ाहुम बअज़ा अल्लज़ी अमिलू लअल्लाहुम यरजिऊना[2] यानी दरिया व ख़ुश्की में जो तबाही फैली वह उन कामों की वजह से थी जो लोगों ने अंजाम दिये , अल्लाह यह चाहता है कि लोगों को उनके आमाल की सज़ा का एक छोटा सा हिस्सा चखाये शायद वह राहे हक़ की तरफ़ लौट आयें। बस दर्दनाक हादसों का यह हिस्सा दर असल अल्लाह का एक लुत्फ़ है।

कभी यह मुसीबतें ख़ुद इंसान के अपने कामों की नतीजा होती हैं।इन्ना अल्लाहा ला युग़य्यिरु मा बिक़ौमिन हत्ता युग़य्यिरू मा बिअनफ़ुसिहिम[3] यानी अल्लाह किसी भी क़ौम की हालत को उस वक़्त तक नही बदलता जब तक वह ख़ुद अपनी हालत न बदलें।

मा असाबका मिन हसनतिन फ़मिन अल्लाहि व मा असाबका मिन सय्यिअतिन फ़मिन नफ़्सिका[4] जो अच्छाईया तुम को हासिल होती हैं वह अल्लाह की तरफ़ से है और जो बुराईयाँ व मुश्किलें तुम्हारे सामने आती हैं वह ख़ुद तुम्हारी तरफ़ से है।



[1] सूरए हूद आयत न. 82

[2] सूरए रोम आयत न. 41

[3] सूरए रअद आयत न. 11

[4] सूरए निसा आयत न. 79


source : http://al-shia.org
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