हदीसे किसा


خیر و شر - شب اول - محرم 1437 - هئت سجادیه نازی آباد -  

बिसमिल्ला हिर रहमानिर रहीम
अन फ़ा'तिमा'तज़ ज़हरा ( अलय्हस-सलाम ) बिनती रसूलिल-लाही सल-लाल-लाहो अलैहे वसल्लम क़ालत : दख़'अला अलैय-या अबी रसूलुल-लाही ( स' ) फ़ी बा'-ज़िल अय-यामी फ़'क़ाला : अस-सलामु अलैय-की या फ़ा'तिमा फ़क़ुल-तू :अलैय-कस-सलाम क़ाला : इन-नि अजिदु फ़ी बद'अनी ज़ू'अ'फ़न' फ़क़ुल-तू लहू : उई'इज़'उका बिल-लाही या अ'बता'हु म'अनज़'-ज़ुआ'फ़ि फ़'क़ाला : या फ़ा'ति-मतु ईत-तीनी बिल-कसा-इल-यमा'नी फ़ग'हत-तीनी बिही फ़ अतए-तू'हु बिल-किसा'-इल-यमा'नी  फ़ग'हत-तय-तुहू बिही व सूरतु अन'ज़ुरू इल्य-ही व इज़'आ वजह-हू यातल-लौ का'अन्नाहुल बदरू फ़ी लै'लती तमा'मीही व कमालिह फ़मा कानत इल्ला सा'अतौ-व इज़ा बी वालादियल ह'सनी (अलय्हिस-सलाम) क़द अक़'बला व क़ाला: अस-सलामु अलयकी या उम्माहो फ़क़ुलतू : व अलय'कस-सलामु या क़ुर'रता अय-नी व समरता फ़ूआदी फ़क़ाला : या उम्माहू इन्नी अशुम-मु इन्दाकी रा'इहातिन तय'यिबतिन का'अन्नहा रा'इहतु जददी रसूलिल्लाह फ़'क़ुल्तु : ना'अम इन्ना जद'दका  तहतल किसा फ़'अक़बलल हुसैनु नहवल किसा'ई व क़ाला : अस'सलामु अलैका या जद-दाहू या रसूलल्लाही अत-ज़नु ली अन अदख़ुला मा'का तहतल -किसा क़ाला : व अलैकस सलामु या वलादी व या  साहिबा हौज़ी क़द अज़िन्तु लका फ़'दख़ला माहू तहतल किसा! फ़मा कानत इल्ला सा'अतों व ईज़ा  बी' वलादियल हुसैनी क़द अक़'बला व क़ाला : अस-सलामु अलैकी या उम्माह  फ़क़ुल-तू : व अलैकस सलामु या वलादी व या क़ुर'रता ऐनी व सम'रता फ़ू'आद फ़'क़ाला ली : या उम्माहो इन्नी अ-शुम्मु इन्दाकी रा'इहातिन तय-यिबतन  का'अन्नाहा रा'इहातु जददी रसूलिल्लाह फ़क़ुल-तू : ना'अम  इन्ना जद-दका व अखाका तहतल किसा  फदनल-हुसैनु नहवल किसा'ई व क़ाला : अस-सलामु अलैका या जद'दाहुस सलामु अलैका या  मनीख़-ता'रहुल-लहू अत-ज़नू'ली अन अद-ख़ुला मा'कुमा तहतल किसा फ़'क़ाला : व अलैकस सलामु या वलादी व या शाफ़िया' उम्मती क़द अज़िन्तु लका फ़'दखला मा'हुमा  तहतल किसा फ़'अक़बला  इन्दा  ज़ालिका  अबुल-ह'सनी अली इब्ने अबी तालिब व क़ाला : अस-सलामु अलैकी  या बीनता रसूलिल्लाह फ़क़ुलतू व  अलैकस-सलामु या अबल-हसन व या अमीरल मुमिनीन फ़'क़ाला या फ़ाति'मातु इन्नी अशुममु इन्दकी रा-इहतन तय-यिबतन  का'अन्नहा रा'इहातु अखी वबनिया'म-मी रसूलिल्लाह फ़क़ुल-तू ना'अम हा हुवा मा' वालादयका तहतल किसा फ़'अक्बला अली-युन नहवल किसाइ व क़ाला : अस्सलामु  अलैका या रसूलल्लाही अत-ज़ानु ली अन  अकूना मा'अकुं  तहतल किसा क़ाला लहू : व अलैकस सलामु या अखी व या  वसी'यी व ख़ली-फती व साहिबा  लिवा-ई  क़द अ'ज़िन्तु लक फ़'दख़'अला अली-युन तहतल किसा सुम्मा आ'तय तू  नहवल किसाइ व क़ुल्तु  : अस-सलामु  अलैका  या अबाताह या रसूलल्लाही अता-ज़ानूली  अन अकूना  माकुम  तहतल किसा क़ाला : व अलैकिस सलामु या  बिनती या बज़'अती क़द अज़िन्तु लकी फ़'दख़ल'तू तहतल किसा फल-लमक-तमल-ना जमीअन तहतल किसा-इ  अख्ज़'अ अबी रसूलुल्लाहि बी'तरा'फाईल किसा-इ व औ-मा बियादिहिल-युम-ना इलस-समा-इ व क़ाला : अल्लाहुम्मा इन्ना हा-उला-इ अहलुल'बैते व ख़ा'अस'सती व हा'अम'मती लह'मुहम लहमी व  दम'उहुम दमी युलिमुनी मा यु-लिमुहुम व  यह'ज़ुनुनी मा यह'ज़ुनुहुम अना हरबुल-लीमन हराबहुम व सिल्मुल लीमन  सालाम्हुम व अदू'वुल लीमन आदाहुम व मुहिब-बुल-लीमन अह'अब'बहुम इन-नहुम-मिन-नी व अना मिन्हुम फ़ज-अल सलावातिका व बरकातिका व रहमतिका व  गुफ़रानिका व रिज़वानिका अलय'या व अ'ले-हिम व अज़्हिब अन- हुमुर-रिज-सा व तह'हिरुहुम तत'हीरा फ़ाक़ा'लल-लाहू  अज़'-ज़ा व जल-ला :या मला-इ'कती व या सुक'काना समावाती इन-नी मा ख़लक़तू समाअम मबनी यातव व ला अर्ज़म मद'ही यातव व ला क़मरम मुनीरव व ला शम्सम मुज़ी अतव व ला फ़लाके यदु'रु व ला बहरे यजरी इल्ला  फ़ी महाब्बती हा उलाइल ख़मसतील लज़ीना हुम तहतल किसा फ़क़ालाल अमीनु जिब'राइलू : या रब्बी व मन तहतल कि सा फ़क़ाला अज़-ज़ा व जल्ला : हुम अहलेबैती'न-नुबूवती व मा'दिनुर रिसालाती हुम  फ़तिमतु व अबूहा व बा'लूहा व बनूहा फ़'क़ाला जिबरा'इलू : या रब्बी अता-ज़ानू ली अन अह्बिता इलल अर्ज़ी ली अकूना माहुम सादिसा फ़'क़ाला लहू : ना'अम क़द अज़िन्तु लक फ़'हबतल'अमीनु जिब'राइलू व क़ाला : अस'सलामु अलैका या रसूलाल्लाहिल-अली-युल-आला  युक़-री'उकस  सलामु व य'ख़स' सुका बिल- तहियेती वल इकराम व याक़ूलुका : व इज़्ज़ती व जलाली  इन्नी  मा  ख़लक़तू  समाअम मबनी यत्व व ला अर्ज़म मदही यत्व व ला क़मरम मुनीरण व ला शम्सम मुज़ी'अतव व ला बहरे यजरी वला फुल्कई यसरी इल्ला ली'अज्लिकुम व महब'बतिकुम व क़द अज़ीना ली अन अद'ख़ुला माकुम फ़हल ता'ज़ानु ली  या रसूलल्लाही फ़'क़ाला रसूलुल्लाहि : व अलैकस सलामु या अमीना वह'ईल-लाही ना'अम क़द अज़िन्तु लक फ़'दख़ला   जिबरा'इलू माना तहतल किसा'ई फ़'क़ाला ली अबी : इन्नल'लाहा क़द औ'हा इलैय्कुम य'क़ूलू :इन्नमा युरीदुल'लाहू  ली'यूज़'हिबा अन्कुमुर'रिज्सा अहलाल्बैती व यु'तह'हिराकुम तत'हीरा फ़'क़ाला अली'युल ली'अबी : या रसूलल्लाही  अख़'बीरनी मा ली'जुलूसिना हाज़ा तहतल किसा'इ मिनल फ़ज़ली इंदल लाह फ़'क़ालन नबीयु सल्लल्लाहो अलैहि व आलिहि : वल लज़ी बा'असनी बी'हक़'क़ी नाबीयौ वस''तफानी बीर'रिसा'लती नजीया मा  ज़ुकिरा ख़बा'रुना  हाज़ा  फ़ी  मह्फ़लिम मीम महाफ़िली अहलिल अर्ज़ी व फ़ीही जम'उम  मिन शी'अतिना व मुहिब्बी'ना इल्ला व न'ज़लत अली'हुमुर रह'माह व हफ़'फ़त बिहिमु ला-मला'इकह वसत्ग'फ़ेरत लहुम इला यता'फ़र'रक़ू फ़'क़ाला अली'युन अलैहिस सलामु : इज़ौ वल'लाही फुज़्ना व फाज़ा शी'अतुना व रब्बिल काबा फ़'क़ाला अबी रसूलुल्लाहि सल्लाल'लाहो अलैही व  आलिहि : या  अली'यु वल'लज़ी बा''सानी बिल'हक़'क़ी नबी'यौ  वस''ताफ़ानी बीर'रिसालती नजी'य़ा मा ज़ुकिरा ख़बा'रुना हाज़ा फ़ी  माह'फ़लिम मीम'महाफ़िली अहलिल अर्ज़ी व फ़ीही जम'उम मिन शी'अतिना व मुहिब'बीना व फ़ीहीम मह'मूमुन इल्ला व  फ़र'रजल लाहो हम'महू वला  ग़'मूमुन इल्ला व कशा'फल लाहो ग़म'माहू व ला तालिबू  हा'जतिन  इल्ला  व  क़ज़'अल लाहो हा'जताह फ़'क़ाला अली'युन अलैहिस सलामु इज़ौ वल-लाही फ़ुज़'ना व  सुई'दना व क़ज़ा''लिका  शी'अतुना  फ़ाज़ू  व सुई'दू फ़ीद'दुन्या वल आख़ीरति व रब्बिल का'बा
अल्लाह हुम्मा सल्ले अला मुहम्मा व आले मुहम्मद

हिन्दी अनुवाद
बिसमिल्ला हिर रहमानिर रहीम
जाबिर इब्न अब्दुल्लाह अंसारी बीबी फ़ातिमा ज़हरा (स:अ) बिन्ते रसूल अल्लाह (स:अ:व:व) से रिवायत करते हुए कहते हैं के मैने जनाब फ़ातिमा ज़हरा (स:अ) से सुना है की वो फ़रमा रहीं थीं के एक दिन मेरे बाबा जान रसूले ख़ुदा (स:अ:व:व) मेरे घर तशरीफ़ लाये और फ़रमाने लगे, "सलाम हो तुम पर ऐ फ़ातिमा (स:अ)" मैने जवाब दिया, "आप पर भी सलाम हो" फिर आप ने फ़रमाया :"मै अपन जिस्म में कमज़ोरी महसूस कर रहा हूँ" मै ने अर्ज़ किया की, "बाबा जान ख़ुदा न करे जो आप में कमज़ोरी आये" आप ने फ़रमाया: "ऐ फातिमे (स:अ) मुझे एक यमनी चादर लाकर उढ़ा दो" तब मै यमनी चादर ले आई और मैंने वो बाबा जान क़ो ओढ़ा दी और मै देख रही थी के आपका चेहरा-ए-मुबारक चमक रहा है, जिस तरह चौदहवीं रात क़ो चाँद पूरी तरह चमक रहा हो, फिर एक लम्हा ही गुज़रा था की मेरे बेटे हसन (अ:स) वहां आ गए और बोले, "सलाम हो आप पर ऐ वालिदा मोहतरमा (स:अ)!" मैंने कहा और तुम पर भी सलाम हो ऐ मेरी आँख के तारे और मेरे दिल के टुकड़े - वोह कहने लगे, "अम्मी जान (स:अ), मै आप के यहाँ पाकीज़ा ख़ुशबू महसूस कर रहा हूँ जैसे वोह मेरे नाना जान रसूले ख़ुदा (स:अ:व:व) की ख़ुशबू हो" मैंने कहा, "हाँ तुम्हारे नाना जान चादर ओढ़े हुए हैं" इसपर हसन (अ:स) चादर की तरफ़ बढे और कहा, "सलाम हो आप पर ऐ नाना जान, ऐ ख़ुदा के रसूल! क्या मुझे इजाज़त है के आपके पास चादर में आ जाऊं?" आप ने फ़रमाया, "तुम पर भी सलाम हो ऐ मेरे बेटे और ऐ मेरे हौज़ के मालिक, मै तुम्हें इजाज़त देता हूँ" बस हसन आपके साथ चादर में पहुँच गए! फिर एक लम्हा ही गुज़रा होगा के मेरे बेटे हुसैन (अ:स) भी वहां आ गए और कहने लगे :"सलाम हो आप पर ऐ वालिदा मोहतरमा (स:अ) - तब मैंने कहा, "और तुम पर भी सलाम हो ऐ मेरे बेटे, मेरी आँख के तारे और मेरे कलेजे के टुकड़े" इसपर वो मुझे से कहने लगे, "अम्मी जान (स:अ), मै आप के यहाँ पाकीज़ा ख़ुशबू महसूस कर रहा हूँ जैसे वोह मेरे नाना जान रसूले ख़ुदा (स:अ:व:व) की ख़ुशबू हो" मैंने कहा, "हाँ तुम्हारे नाना जान और भाई जान इस चादर में हैं" बस हुसैन (अ:स) चादर के नज़दीक आये और बोले, "सलाम हो आप पर ऐ नाना जान! सलाम हो आप पर ऐ वो नबी जिसे ख़ुदा ने चुना है - क्या मुझे इजाज़त है के आप दोनों के साथ चादर में दाख़िल हो जाऊं?" आप ने फ़रमाया, "और तुम पर भी सलाम हो ऐ मेरे बेटे, और ऐ मेरी उम्मत की शफ़ा'अत करने वाले, तुम्हें इजाज़त देता हूँ" तब हुसैन (अ:स) ईन दोनों के पास चादर में चले गए, इसके बाद अबुल हसन (अ:स) अली इब्न अबी तालिब (अ:स) भी वहां आ गए और बोले, "सलाम हो आप पर ऐ रसूले ख़ुदा की बेटी!" मैंने कहा, "आप पर भी सलाम हो ऐ अबुल हसन (अ:स), ऐ मोमिनों के अमीर" वो कहने लगे, "ऐ फ़ातिमा (स:अ) मै आप के यहाँ पाकीज़ा ख़ुशबू महसूस कर रहा हूँ, जैसे वो मेरे भाई और मेरे चचाज़ाद, रसूले ख़ुदा की ख़ुशबू हो" मैंने जवाब दिया, "हाँ वो आप के दोनों बेटों समेत चादर के अन्दर हैं" फिर अली (अ:स) चादर के क़रीब हुए और कहा, " सलाम हो आप पर ऐ ख़ुदा के रसूल - क्या मुझे इजाज़त है के मै भी आप तीनों के पास चादर में आ जाऊं?" आप ने इनसे कहा, "और तुम पर भी सलाम हो ऐ मेरे भाई, मेरे क़ायेम मुक़ाम, मेरे जा'नशीन, मेरे अलम'बरदार, मै तुम्हें इजाज़त देता हूँ" बस अली (अ:स) भी चादर में पहुँच गए - फिर मै चादर के नज़दीक आये और मैंने कहा, "सलाम हो आप पर ऐ बाबा जान, ऐ ख़ुदा के रसूल, क्या आप इजाज़त देते हैं के मैन आप के पास चद्दर में आ जाऊं?" आप ने फ़रमाया, "और तुम पर भी सलाम हो मेरी बेटी और मेरी कलेजे की टुकड़ी, मैंने तुम्हे इजाज़त दी" तब मै भी चादर में दाख़िल हो गयी! जब हम सब चादर में इकट्ठे हो गए तो मेरे वालिदे गिरामी रसूल अल्लाह (स:अ:व:व) ने चादर के दोनों किनारे पकड़े और दायें हाथ से आसमान की तरफ़ इशारा करके फ़रमाया, "ऐ ख़ुदा! यक़ीनन यह हैं मेरे अहलेबैत (अ:स), मेरे ख़ास लोग, और मेरे हामी, इनका गोश्त मेरा गोश्त और इनका ख़ून मेरा ख़ून है, जो इन्हें सताए वो मुझे सताता है, और जो इन्हें रंजीदा करे वो मुझे रंजीदा करता है! जो इनसे लड़े मै भी उस से लडूंगा, जो इनसे सुलह रखे, मै भी उस से सुलह रखूओंगा, मै इनके दुश्मन का दुश्मन और इनके दोस्त का दोस्त हूँ, क्योंकि वो मुझ से और मै इनसे हूँ! बस ऐ ख़ुदा तू अपनी इनायतें और अपने बरकतें और अपनी रहमत और अपनी बखशिश और अपनी खुशनूदी मेरे और इनके लिये क़रार दे, इनसे नापाकी क़ो दूर रख, इनको पाक कर, बहुत ही पाक", इसपर खुदाये-बुज़ुर्ग-ओ-बरतर ने फ़रमाया, "ऐ मेरे फरिश्तो और ऐ आसमान में रहने वालो, बेशक मैंने यह मज़बूत आसमान पैदा नहीं किया, और न फैली हुई ज़मीन, न चमकता हुआ चाँद, न रौशन'तर सूरज, न घुमते हुए सय्यारे, न थल्कता हुआ समुन्दर, और न तैरती हुई किश्ती, मगर यह सब चीज़ें ईन पाक नफ्सों की मुहब्बत में पैदा की हैं जो इस चादर के नीचे हैं" इसपर जिब्राइल अमीन (अ:स) ने पुछा, "ऐ परवरदिगार! इस चादर में कौन लोग हैं?" खुदाये-अज़-ओ-जल ने फ़रमाया की वो नबी (स:अ:व:व) के अहलेबैत (अ:स)  और रिसालत का ख़ज़ीना हैं, यह फ़ातिमा (स:अ) और इनके बाबा (स:अ:व:व), इनके शौहर (अस:) इनके दोनों बेटे (अ:स) हैं! तब जिब्राइल (अ:स) ने कहा, "ऐ परवरदिगार! क्या मुझे इजाज़त है की ज़मीन पर उतर जाऊं ताकि इनमे शामिल होकर छठा फ़र्द बन जाऊं?" खुदाये ताला ने फ़रमाया, " हाँ हम ने तुझे इजाज़त दी" बस जिब्राइल ज़मीन पर उअतर आये और अर्ज़ की, "सलाम हो आप पर ऐ ख़ुदा के रसूल! खुदाये बुलंद-ओ-बरतर आप क़ो सलाम कहता है, आप क़ो दुरूद और बुज़ुर्गवारी से ख़ास करता है, और आप से कहता है, मुझे अपने इज़्ज़त-ओ-जलाल की क़सम के बेशक मै ने नहीं पैदा किया मज़बूत आसमान और न फैली हुई ज़मीन, न चमकता हुआ चाँद, न रौशन'तर सूरज, न घुमते हुए सय्यारे, न थल्कता हुआ समुन्दर, और न तैरती हुई किश्ती, मगर सब चीज़ें तुम पाँचों की मुहब्बत में पैदा की हैं और ख़ुदा ने मुझे इजाज़त दी है की आप के साथ चादर में दाख़िल हो जाऊं, तो ऐ ख़ुदा के रसूल क्या आप भी इजाज़त देते हैं?" तब रसूले ख़ुदा बाबा जान (स:अ:व:व) ने फ़रमाया , "यक़ीनन की तुम पर भी हमारा सलाम हो ऐ ख़ुदा की वही के अमीन (अ:स), हाँ मै तुम्हे इजाज़त देता हूँ" फिर जिब्राइल (अ:स) भी हमारे साथ चादर में दाख़िल हो गए और मेरे ख़ुदा आप लोगों क़ो वही भेजता है और कहता है वाक़ई ख़ुदा ने यह इरादा कर लिया है की आप लोगों ए नापाकी क़ो दूर करे ऐ अहलेबैत (अ:स) और आप क़ो पाक-ओ-पाकीज़ा रखे", तब अली (अ:स) ने मेरे बाबा जान से कहा, "ऐ ख़ुदा के रसूल बताइए के हम लोगों का इस चादर के अन्दर आ जाना ख़ुदा के यहाँ क्या फ़ज़ीलत रखता है?" तब हज़रत रसूले ख़ुदा ने फ़रमाया, "इस ख़ुदा की क़सम जिस ने मुझे सच्चा नबी बनाया और लोगों की निजात की ख़ातिर मुझे रिसालत के लिये चुना - अहले ज़मीन की महफ़िलों में से जिस महफ़िल में हमारी यह हदीस ब्यान की जायेगी और इसमें हमारे शिया और दोस्तदार जमा होंगे तो इनपर ख़ुदा की रहमत नाज़िल होगी, फ़रिश्ते इनको हल्क़े में ले लेंगे, और  जब वो लोग महफ़िल से रूखसत न होंगे वो इनके लिये बखशिश की दुआ करेंगे", इसपर अली (अ:स) बोले, " ख़ुदा की क़सम हम कामयाब हो गए और रब्बे काबा की क़सम हमारे शिया भी कामयाब होंगे" तब हज़रत रसूल ने दुबारा फ़रमाया, "ऐ अली (अ:स) इस ख़ुदा की क़सम जिस ने मुझे सच्चा नबी बनाया, और लोगों की निजात की ख़ातिर मुझे रिसालत के लिये चुना, अहले ज़मीन की महफ़िलों में से जिस महफ़िल में हमारी यह हदीस ब्यान की जायेगी और इस्मे हमारे शिया और दोस्तदार जमा होंगे तो इनमे जो कोई दुखी होगा ख़ुदा इसका दुख़ दूर कर देगा, जो कोई ग़मज़दा होगा ख़ुदा इसके ग़मों से छुटकारा देगा, जो कोई हाजत मंद होगा झुदा इसकी हाजत क़ो पूरा कर देगा" तब अली (अ:स) कहने लगे, "ब'ख़ुदा हमने कामयाबी और बरकत पायी और रब्बे काबा की क़सम की इस तरह हमारे शिया भी दुन्या व आख़ेरत में कामयाब व स'आदत मंद होंगे!
अल्लाह हुम्मा सल्ले अला मुहम्मा व आले मुहम्मद

हदीसे किसा का विस्तारपूर्वक विवरण :

हदीसे किसा एक विनीत वर्णन है, जो एक परम्परा भी है और एक घटना का विवरण भी, यह उत्कृष्टता का एक भी वर्णन है और समृद्धि का कारण भी! विश्वासियों के बीच ऐसा कोई नहीं जिसे ईन शब्दों या इस धार्मिक हदीस की जानकारी नहीं, यह हदीस बीमार क़ो चिकित्सा प्रदान करने में,  इच्छुक की इच्छाओं को पूरा करने में, आपदाओं में फंसे असहाय व्यक्ति क़ो समर्थन प्रदान करने का माध्यम है, इस तथ्य को भी उस में उल्लेख किया गया है की इसको पढ़ने से अल्लाह की दयालुता प्राप्त होती है, और फ़रिश्ते माफ़ी की दुआ करते है, इसको पढ़ने से विशाल शर्तों क़ो सुनवाई जल्द प्राप्त होती है, जरूरतमंद अपनी जरूरतों को पूरा कर  सकते हैं, और सैकड़ों वर्ष से इस हदीस द्वारा विश्वासियों क़ो गौरव प्रदान हुआ है, और यह क्यों न हो! यह मासूमों (अ:स) और पवित्रता के मालिकों (अ:स) की एक हदीस है, जिसमे सिद्दीका-ए-ताहेरा (स:अ:व:व) का वर्णन है,  पवित्र क़ुरान की तफ़सील है, अल्लाह की रौशनी भरी सभा की एक घटना है, यह विस्मय और आशा है अल्लाह द्वारा प्रदान की गयी गद्दी के निवासियों (अ:स) के लिये, और जो महान और उत्कृष्टत इंसान हैं, और जड़ें पाक हैं!  अगर इन विशिष्टताओं की मौजूदगी में अनुग्रह, समृद्धि और दया की प्राप्ति नहीं होगी तो कब होगी?

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