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Wednesday 3rd of June 2020
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ईरान में पैग़म्बरे आज़म-6 मीज़ाइल अभ्यास

इस्लामी गणतंत्र ईरान में इस्लामी क्रान्ति के संरक्षक बल सिपाहे पासदाराने इंक़ेलाब आज सोमवार से फ़ार्स खाड़ी में पैग़म्बरे आज़म-6 नामक मीज़ाइल अभ्यास आरंभ कर रहा है।

इस्लामी गणतंत्र ईरान में इस्लामी क्रान्ति के संरक्षक बल सिपाहे पासदाराने इंक़ेलाब आज सोमवार से फ़ार्स खाड़ी में पैग़म्बरे आज़म-6 नामक मीज़ाइल अभ्यास आरंभ कर रहा है। यह अभ्यास दस दिनों तक जारी रहेंगे। मीज़ाइल अभ्यास में लम्बी दूरी, मध्यम दूरी तथा कम दूरी की मारक क्षमता वाले मीज़ाइल सतह और पानी में अपने लक्ष्यों को ध्वस्त करेंगे। सिपाहे पासदाराने इंक़ेलाब के कमांडर अली हाजी ज़ादे ने पत्रकारों को बताया कि यह अभ्यास शांति एवं मित्रता के संदेश के साथ किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अभ्यास में सिज्जील, फ़ातेह, क़ेयाम, ख़लीजे फ़ार्स, शहाब एक व शहाब दो तथा ज़िलज़ाल मीज़ाइलों की क्षमता का प्रदर्शन किया जाएगा।इस्लामी गणतंत्र ईरान की सामरिक क्षमता पूर्णतः आत्म रक्षा के सिद्धांत पर आधारित है और थोड़े थोड़े अंतराल से सैन्य अभ्यासों से यह सिद्ध होता है कि ईरान के सुरक्षा बल हर प्रकार के अतिक्रमण का सामना करने के लिए सदैव तैयार रहते हैं। इस्लामी गणतंत्र ईरान की कैस्पियन सागर में आठ सौ किलोमीटर लम्बी जल सीमा है, फ़ार्स खाड़ी में ईरान की जल सीमा की लम्बाई एक हज़ार किलोमीटर है जबकि ओमान सागर तथा हिंद महासागर में उसकी जलसीमा 900 किलोमीटर लम्बी है। ईरान का कहना है कि क्षेत्र के देश अपनी स्थानीय क्षमताओं के सहारे क्षेत्र की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाएं क्योंकि अनुभवों से सिद्ध हो चुका है कि बाहरी शक्तियां फ़ार्स की खाड़ी में सुरक्षा स्थापित करने के बजाए असुरक्षा व आतंकवाद को बढ़ावा दे रही हैं। ईरान ने अपनी प्रतिरोधक क्षमताओं में उल्लेखनीय प्रगति की है तथा यह देश प्रक्षेपास्त्र की तकनीक को विकसित कर चुका है और इस प्रकार उसने सिद्ध कर दिया है कि बड़ी शक्तियों की सहायता के बग़ैर भी रक्षा सहित सभी क्षेत्रों में टिकाऊ प्रगति की जा सकती है।

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