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Sunday 13th of June 2021
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अमरीका और तालेबान के बीच वार्ता

यद्यपि समाचार एजेन्सियों ने बहुत पहले ही अमरीका और तालेबान के बीच वार्ता का रहस्योद्घाटन किया था किंतु इस बात को अब अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है। तालेबान ने अभी इस वार्ता की पुष्टि नहीं की है बल्कि वे तो अमरीका के साथ युद्ध को जारी रखने पर बल दे रहे हैं।

यद्यपि समाचार एजेन्सियों ने बहुत पहले ही अमरीका और तालेबान के बीच वार्ता का रहस्योद्घाटन किया था किंतु इस बात को अब अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है। तालेबान ने अभी इस वार्ता की पुष्टि नहीं की है बल्कि वे तो अमरीका के साथ युद्ध को जारी रखने पर बल दे रहे हैं। राजनैतिक टीकाकारों के अनुसार हालिया दिनों में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा कई तालेबान नेताओं के नामों को अपनी ब्लैक लिस्ट से निकालने और तालेबान तथा अलक़ाएदा को अलग-अलग श्रेणी में रखने के पश्चात हामिद करज़ई की ओर से तालेबान और अमरीका के बीच वार्ता की आधिकारिक पुष्टि बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हामिद करज़ई को इस बात की आशा है कि उनकी यह कार्यवाही, तालेबान को अमरीका के साथ सांठगांठ के लिए प्रेरित करेगी। हालांकि इससे पूर्व तालेबान ने कहा था कि तालेबान और अमरीका के बीच वार्ता जैसी बातें सार्वजनिक करने का उद्देश्य तालेबान के बीच मतभेद उत्पन्न करना और उनके मनोबल को तोड़ना है। इसके बावजूद अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति शांति परिषद का गठन करके तालेबान के साथ वार्ता प्रक्रिया को मज़बूत करना चाहते हैं। इस बात को सार्वजनिक करने के पीछे हामिद करज़ई का उद्देश्य अफ़ग़ानिस्तान के राजनैतिक पटल पर तालेबान की उपस्थिति के लिए इस देश के आम जनमत को तैयार करना है। इन सब बातों के बावजूद अफ़ग़ानिस्तान सरकार के बहुत से गुटों ने तालेबान के साथ अमरीका की सांठगांठ का खुलकर विरोध किया है। अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति चुनावों में हामिद करज़ईं के मुख्य प्रतिद्वंद्वी और विपक्ष के नेता अब्दुल्लाह-अब्दुल्लाह ने इस विषय पर अपने विरोध की घोषणा करते हुए इसे विफल अनुभव की संज्ञा दी। उनका मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान के राजनैतिक पटल पर तालेबान के आने से अतिवाद को बढ़ावा मिलेगा और आंतरिक मतभेद बढ़ेंगे। अमरीका जिसने दस वर्ष पूर्व तथाकथित आतंकवाद विरोधी अभियान की आड़ में अफ़ग़ानिस्तान पर आक्रमण करके इस देश का अतिग्रहण किया था अब अफ़ग़ानिस्तान की दलदल से स्वयं को मुक्ति दिलाने के लिए उसके पास तालेबान के साथ सांठगांठ के अतिरिक्त कोई अन्य मार्ग नहीं दिखाई दे रहा है। कुछ टीकाकारों का यह मानना है कि तालेबान अभी भी पाकिस्तान और अमरीका की कठपुतली हैं जो उन्ही के हितों के लिए कार्यरत हैं। अब जब कि अमरीका बराक ओबामा द्वारा दिये गए वचन के आधार पर स्वंय को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकालने के लिए तैयार कर रहा है, वाशिंग्टन, तालेबान के साथ समझौता करके अपने दृष्टिगत विशिष्टताएं देते हुए इसे अफ़ग़ानिस्तान के राजनैतिक पटल पर लाने का प्रयास कर रहा है। साथ ही दूसरी ओर वह यह भी प्रयास कर रहा है कि तालेबान के बीच मतभेद फैलाकर उन्हें अपने ही नियंत्रण में रखे ताकि अमरीका और अफ़ग़ानिस्तान के बीच शांति समझौते और इस देश में सैनिक छावनियां बनाने के समझौतों पर हस्ताक्षर की भूमि प्रशस्त की जा सके।


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