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Wednesday 10th of August 2022
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इमाम अली नक़ी अ.स. के क़ौल

इमाम अली नक़ी अ.स. के क़ौल

1.    مَنِ اتَّقىَ اللهَ يُتَّقى، وَمَنْ أطاعَ اللّهَ يُطاعُ، وَ مَنْ أطاعَ الْخالِقَ لَمْ يُبالِ سَخَطَ الْمَخْلُوقينَ، وَمَنْ أسْخَطَ الْخالِقَ فَقَمِنٌ أنْ يَحِلَّ بِهِ سَخَطُ الْمَخْلُوقينَ .
जो अल्लाह से डरेगा लोग उससे डरेंगे और जो अल्लाह की इताअत करेगा उसकी इताअत की जाऐगी, और जो खालिक़ की इताअत करता है उसे मखलूक़ की नाराज़गी की परवाह नही होती और जो खालिक़ को नाराज़ करेगा वो मखलूक़ की नाराज़गी से भी रूबरू होने के लिए लायक़ हैं।


2.    السَّهَرُ أُلَذُّ الْمَنامِ، وَ الْجُوعُ يَزيدُ فى طيبِ الطَّعامِ.
शब बेदारी, नीदं को है बेहद लज़ीज़ बना देती है और भूक ग़िज़ा के मज़े को दोबराबर कर देती है।


3.    لا تَطْلُبِ الصَّفا مِمَّنْ كَدِرْتَ عَلَيْهِ، وَلاَ النُّصْحَ مِمَّنْ صَرَفْتَ سُوءَ ظَنِّكَ إلَيْهِ، فَإنَّما قَلْبُ غَيْرِكَ كَقَلْبِكَ لَهُ
जिससे किना रखते हो उस से मोहब्बत की तलाश में ना रहो-जिससे बदगुमान हो उससे खैरख्वाही की उम्मीद न रखो इसलिए कि दूसरे का दिल तुम्हारे लिऐ ऐसा ही है जैसा की तुम्हारा दिल उसके लिऐ है।


4.    الْحَسَدُ ماحِقُ الْحَسَناتِ، وَالزَّهوُ جالِبُ الْمَقْتِ
हसद नेकीयो को तबाह करने वाला और घमंड दुश्मनी लाने वाला है।


5.    الْهَزْلُ فکاهَةُ السُّفَهاءِ، وَ صَناعَةُ الْجُهّالِ
(भद्दा) मज़ाक बेवकूफो की आदत और जाहिलो का पेशा है।


6.    الدُّنْيا سُوقٌ رَبِحَ فيها قَوْمٌ وَ خَسِرَ آخَرُونَ
दुनिया एक बाज़ार है जिसमे एक गिरोह ने नुख्सान और दूसरे फायदा उठाया है।


7.    النّاسُ فِي الدُّنْيا بِالاْمْوالِ وَ فِى الاْخِرَةِ بِالاْعْمالِ
लोगो की हैसीयत दुनिया मे माल से और आखेरत मे आमाल (कर्मो) से है।


8.    مُخالَطَةُ الاْشْرارِ تَدُلُّ عَلى شِرارِ مَنْ يُخالِطُهُمْ
बुरे लोगो के साथ बैठना उन बैठने वालो की बुराई का सूबूत है।


9.    الْغَضَبُ عَلى مَنْ لا تَمْلِكُ عَجْزٌ، وَ عَلى مَنْ تَمْلِكُ لُؤْمٌ
जिस पर तुम्हारा बस नही उसपर ग़ुस्सा होना तुम्हारी मजबूरी है और जो तुमसे कमज़ोर है उस पर ग़ुस्सा होना तुम्हारी पस्ती की निशानी है।


10.    مَنۡ جَمَعَ لَكَ وُدَّه وَ رَأیَه فَاجۡمَعۡ لَہ طَاعَتَكَ
जो भी तुम्हारी दोस्ती का दम भरे और तुम्हे नेक कामो का मशवरा दे तो अपने पूरे वुजुद के साथ उसकी इताअत करना (उसकी हर बात को मान लेना)।


11.    مَنْ رَضِىَ عَنْ نَفْسِهِ كَثُرَ السّاخِطُونَ عَلَيْهِ.
जो अपने आप (अपने कामो) से राज़ी होता है तो उस पर ग़ुस्सा करने वाले बढ़ जाते है।


12.    مَنْ هانَتْ عَلَيْهِ نَفْسُهُ فَلا تَأمَنْ شَرَّهُ
जिस का नफ्स पस्त हो जाऐ उसके शर (बुराई) से खुद को महफूज़ न समझो।


13.    الْعُجْبُ صارِفٌ عَنْ طَلَبِ الْعِلْمِ، داع إلىَ الْغَمْطِ وَ الْجَهْلِ
घमंड इल्म हासिल करने से रोकता है और जाहिल व बेवकूफ बना देता है।


14.    لا تُخَيِّبْ راجيكَ فَيَمْقُتَكَ اللّهُ وَ يُعاديكَ
अपने से उम्मीद रखने वाले को नाउम्मीद न करो कि खुदा तुमसे नाराज़ हो कर तुमसे दुश्मनी करने लगेगा।


15.    مَا اسْتَراحَ ذُو الْحِرْصِ
लालची को कभी सुकून नही मिलता।

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