Hindi
Monday 1st of June 2020
  1799
  0
  0

दुआ ऐ सहर

ऐ गमो अन्दोह मे मेरी पनाहगाह या मफज़ई इन्दा कुरबती يَا مَفْزَعِي عِنْدَ كُرْبَتِي ऐ मुश्किलो मे मेरी मदद करने वाले या ग़ौसी इन्दा शिद्दती وَ يَا غَوْثِي عِنْدَ شِدَّتِي मै तेरी पनाह मे आया हुँ और मै तुझसे ही दुआ माँगता हुँ इलेय
दुआ ऐ सहर

ऐ गमो अन्दोह मे मेरी पनाहगाह
    

या मफज़ई इन्दा कुरबती
    

يَا مَفْزَعِي عِنْدَ كُرْبَتِي

ऐ मुश्किलो मे मेरी मदद करने वाले
    

या ग़ौसी इन्दा शिद्दती
    

وَ يَا غَوْثِي عِنْدَ شِدَّتِي

मै तेरी पनाह मे आया हुँ और मै तुझसे ही दुआ माँगता हुँ
    

इलेयका फज़अतो वा बेकस तग़सतो
    

اِلَيْكَ فَزِعْتُ وَ بِكَ اسْتَغَثْتُ

और तुझसे ही पनाह चाहता हुँ और किसी से पनाह नही चाहता।
    

बेका लुज़तो ला अलूज़ो बे सिवाका
    

وَ بِكَ لُذْتُ لا اَلُوذُ بِسِوَاكَ

अपनी मुश्किलो के हल तेरे अलावा किसी और से नही चाहता। बस तू ही मेरी मदद फरमा।
    

वला अतलोबुल फरजा इल्ला मिन्का
    

وَ لا اَطْلُبُ الْفَرَجَ اِلا مِنْكَ فَاَغِثْنِي

मेरे कामो को आसान करदे ऐ वो ज़ात जो कम अमल को भी कुबुल करता है।
    

व फर्रिज अन्नी या मन यक़बलुल यसीर / मैय्य यक़बलुल यसीर
    

وَ فَرِّجْ عَنِّي يَا مَنْ يَقْبَلُ الْيَسِيرَ

और बहुत ज्यादा गुनाहो को भी बख्श देता है। मेरी कम इबादतो को कुबुल फरमा।
    

व यअफु अनील कसीर इक़बल मिन्नील यसीर
    

وَ يَعْفُو عَنِ الْكَثِيرِ اقْبَلْ مِنِّي الْيَسِيرَ

मेरे बहुत ज्यादा गुनाहो को माफ फरमा क्योकि तू माफ करने वाला और महरबान है।
    

वअफु अन्नील कसीर ,

इन्नका अन्तल ग़फूरूर रहीम
    

وَ اعْفُ عَنِّي الْكَثِيرَ اِنَّكَ اَنْتَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ

परवरदिगारा मै तुझसे ऐसा ईमान चाहता हुँ कि जिसमे मेरा दिल साथ हो।
    

अल्लाहुम्मा इन्नी असअलोका ईमानन तुबाशेरो बेही क़लबी
    

اللّٰهُمَّ اِنِّي اَسْاَلُكَ اِيمَانا تُبَاشِرُ بِهِ قَلْبِي

ऐसा यक़ीन चाहता हुँ कि कोई चीज़ मुझे ऐसी नही मिली कि
    

व यक़ीना हत्ता आलमा अन्नहु लनयुसीबनी /लैय्य युसीबनी
    

و یقینا حَتَّى اَعْلَمَ اَنَّهُ لَنْ يُصِيبَنِي

जिसे तूने मेरे नसीब मे न लिखा हो।
    

इल्ला मा कतबता ली
    

اِلا مَا كَتَبْتَ لِي

और जो कुछ तूने मुझे दिया है मुझे उससे राज़ी कर दे। ऐ महरबानी करने वालो मे सबसे ज्यादा महरबान
    

व रज़्ज़ेनी मिनल ऐशे बेमा क़समता ली या अरहमर्र राहेमीन
    

وَ رَضِّنِي مِنَ الْعَيْشِ بِمَا قَسَمْتَ لِي يَا اَرْحَمَ الرَّاحِمِينَ

ऐ गमो अन्दोह मे मेरे सामाने सफर
    

या उद्दती फी कुरबती
    

يَا عُدَّتِي فِي كُرْبَتِي

ऐ मुश्किलो मे मेरे साथी
    

या साहेबी फी शिद्दती
    

وَ يَا صَاحِبِي فِي شِدَّتِي

ऐ नेमतो मे मेरे सरपरस्त
    

या वलीय्या फी नेअमती
    

وَ يَا وَلِيِّي فِي نِعْمَتِي

ऐ मेरी चाहतो की इन्तेहा
    

या ग़ायती फी रग़बती
    

وَ يَا غَايَتِي فِي رَغْبَتِي

तूही मेरी बुराईयो को छुपाने वाला है।
    

अन्तस सातेरो औरती
    

اَنْتَ السَّاتِرُ عَوْرَتِي

और घबराहट मे मेरे लिऐ जाऐअमन है।
    

वल आमेनो रोअती
    

وَ الْآمِنُ رَوْعَتِي

और मेरी गलतीयो को माफ करने वाला है।
    

वल मुक़ीलो असरती
    

وَ الْمُقِيلُ عَثْرَتِي

मेरी गलतीयो को माफ फरमा।
    

फ़ग़ फिरली खतीअती
    

فَاغْفِرْ لِي خَطِيئَتِي

ऐ रहम करने वालो मे सबसे ज़्यादा रहम करने वाले
    

या अरहमर्र रा


source : alhassanain
  1799
  0
  0
امتیاز شما به این مطلب ؟

latest article

    ज़ुहुर या विलादत
    हज़रत ज़ैनब के शुभ जन्म दिवस के अवसर ...
    आयतुल्ला ख़ुमैनी की द्रष्टि से हज़रत ...
    अमीरुल मोमिनीन अ. स.
    आसमान वालों के नज़दीक इमाम जाफ़र ...
    हज़रत अली अलैहिस्सलाम की शहादत
    मानवाधिकार आयुक्त का कार्यालय खोलने ...
    इमाम तकी अलैहिस्सलाम के मोजेज़ात
    इमामे रज़ा अलैहिस्सलाम
    इमाम महदी (अ.स) से शिओं का परिचय

 
user comment