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Saturday 27th of November 2021
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भारत के पूर्व राष्ट्रपति और 'मिसाइल मैन' अब्दुल कलाम नहीं रहे।

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का 84 वर्ष की अवस्था में सोमवार को निधन हो गया। कलाम आईआईएम शिलॉन्ग में भाषण दे रहे थे। इसी वक्त उनकी तबीयत बिगड़ गई। कलाम का निधन अस्पताल ले जाते समय रास्ते में हुआ। कलाम के निधन का समाचार पाकर पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। पूर्व राष्ट्रपति सोमवार शाम करीब 6:30
भारत के पूर्व राष्ट्रपति और 'मिसाइल मैन' अब्दुल कलाम नहीं रहे।

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का 84 वर्ष की अवस्था में सोमवार को निधन हो गया। कलाम आईआईएम शिलॉन्ग में भाषण दे रहे थे। इसी वक्त उनकी तबीयत बिगड़ गई। कलाम का निधन अस्पताल ले जाते समय रास्ते में हुआ। कलाम के निधन का समाचार पाकर पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई।
पूर्व राष्ट्रपति सोमवार शाम करीब 6:30 बजे आईआईएम में एक व्याख्यान के दौरान गिर गए और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। राष्ट्रपति बनने से पहले कलाम को दुनिया भर में मिसाइल मैन के रूप में जाना जाता था। 25 जुलाई कलाम 2002 में भारत के राष्ट्रपति बने। 11वें राष्ट्रपति के रूप में उनका कार्यकाल 2007 तक रहा। भारत की मिसाइल तकनीक को विकसित करने में कलाम का अहम योगदान माना जाता है। कलाम चार दशक तक डीआरडीओ में वैज्ञानिक थे।
कलाम वर्ष 1962 में इसरो से जुड़े। कलाम ने स्वदेशी गाइडेड मिसाइल डिजायन की। उन्होंने अग्नि, पृथ्वी मिसाइल को स्वदेशी तकनीक से बनाया। 1997 में उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया।
भारत के पोखरण परमाणु परीक्षण में कलाम का प्रमुख योगदान था। पूर्व राष्ट्रपति बच्चों में काफी लोकप्रिय थे। कलाम कहा करते थे कि सपने सच करने के लिए सपना देखना जरूरी होता है। 2007 में राष्ट्रपति भवन से विदा होने के बाद वह सार्वजनिक जीवन में लगातार सक्रिय रहे। आए दिन वह देश के बड़े शिक्षा प्रतिष्ठानों में व्याख्यान देने के लिए जाया करते थे।
डा कलाम को शाम करीब साढे छह बजे व्याख्यान के दौरान गिरने के बाद नाजुक हालत में बेथनी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया और उसके दो घंटे से अधिक समय बाद उनके निधन की पुष्टि की गयी। डा. कलाम अक्तूबर में 84 साल के होने वाले थे।
देश के सर्वाधिक लोकप्रिय राष्ट्रपति माने जाने वाले कलाम ने 18 जुलाई 2002 को देश के 11वें राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला लेकिन राष्ट्रपति पद पर दूसरे कार्यकाल के लिए उनके नाम पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी। वह राजनीतिक गलियारों से बाहर के राष्ट्रपति थे।
कलाम को अस्पताल में भर्ती कराए जाने की खबर मिलने के तुरंत बाद अस्पताल पहुंचे मेघालय के राज्यपाल वी षणमुगम ने बताया कि कलाम ने शाम सात बजकर 45 मिनट पर अंतिम सांस ली। चिकित्सकों की अथाह कोशिशों के बावजूद उन्हें नहीं बचाया जा सका।
मुख्य सचिव पीबीओ वारजिरी ने अस्पताल के बाहर संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने कलाम के पार्थिव शरीर को मंगलवार को गुवाहाटी से नई दिल्ली ले जाने का इंतजाम करने के लिए केंद्रीय गृह सचिव एल सी गोयल से जरूरी प्रबंधन करने के वास्ते बातचीत की है ।
खासी हिल्स के पुलिस अधीक्षक एम खारकरांग ने इससे पूर्व बताया था, ‘पूर्व राष्ट्रपति को नाजुक हालत में बेथनी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।’ उन्होंने बताया था कि पूर्व राष्ट्रपति शाम करीब साढ़े छह बजे भारतीय प्रबंधन संस्थान में एक व्याख्यान के दौरान गिर पड़े और उन्हें तुरंत मेघालय की राजधानी में नानग्रिम हिल्स में एक अस्पताल में ले जाया गया जहां उन्हें सघन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भर्ती किया गया।
सैन्य अस्पताल और नार्थ इस्टर्न इंदिरा गांधी रीजनल इंस्टीट्यूट आफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज (एनईआईजीआरआईएचएमएस) के डाक्टरों ने बेथनी अस्पताल पहुंच कर उन्हें बचाने की भरसक कोशिश की लेकिन वे नाकाम रहे। केंद्रीय गृह सचिव एल सी गोयल ने बताया कि केंद्र द्वारा सात दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की जाएगी। संसद के दोनों सदनों में कल कलाम को श्रद्धांजलि देने के बाद उनके सम्मान में कार्यवाही को स्थगित किए जाने की संभावना है।
एवुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम बेहद साधारण पृष्ठभूमि से ऊपर उठकर, अटल बिहारी वाजपेयी की राजग सरकार के कार्यकाल में अद्भुत रूप से राष्ट्रपति पद तक पहुंचे। वाम दलों को छोड़कर सभी दलों में राष्ट्रपति पद पर उनकी उम्मीदवारी को लेकर सर्वसम्मति बनी और बड़े शानदार तरीके से वह राष्ट्रपति चुन लिए गए।
माना जाता है कि भारत के मिसाइल कार्यक्रम के पीछे मद्रास इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलोजी से एयरोनोटिक्स इंजीनियरिंग करने वाले कलाम की ही सोच थी और वाजपेयी के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार पूर्व राष्ट्रपति ने 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण में निर्णायक भूमिका निभाई। बतौर राष्ट्रपति कलाम ने छात्रों से संवाद के हर मौके का इस्तेमाल किया और खासतौर से स्कूली बच्चों को उन्होंने बड़े सपने देखने को कहा ताकि वे जिंदगी में कुछ बड़ा हासिल कर सकें।
पूर्व राष्ट्रपति ने विवाह नहीं किया था। वह वीणा बजाते थे और कर्नाटक संगीत में उनकी खास रुचि थी। वह जीवन पर्यंत शाकाहारी रहे। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर शोक जताया है। राष्ट्रपति ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि देश ने एक महान सपूत खो दिया जो अपने जीवनकाल में जनता का राष्ट्रपति था और मृत्यु के बाद भी रहेगा। प्रधानमंत्री ने उन्हें ‘मार्गदर्शक’ बताया जबकि गृह मंत्री ने उन्हें एक पूरी पीढ़ी के लिए प्रेरणा बताया। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कलाम युवाओं और छात्रों के बेहद प्रिय थे।
आजाद ने कहा कि कलाम हमेशा बच्चों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहद खुश रहते थे। यहां तक कि उन्होंने एक शैक्षणिक संस्थान में ही अंतिम सांस ली। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने कहा कि हालिया इतिहास में कुछ ही लोगों को युवाओं, बुजुर्गो, गरीब अमीर, शिक्षित और अशिक्षित और विभिन्न धर्मो में आस्था रखने वाली तथा अलग-अलग भाषाएं बोलने वालों का प्यार मिला है।


source : abna
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