Hindi
Monday 21st of September 2020
  12
  0
  0

पवित्र रमज़ान-१

पवित्र रमज़ान-१

पवित्र रमज़ान का महीना, ईश्वर के बनाए हुए महीनों में सर्वोत्तम है। पवित्र क़ुरआन इसी महीने में उतरा है। धार्मिक कथनों में आया है कि आकाश और स्वर्ग के द्वार इस महीने में खोल दिये जाते हैं जबकि नरक के द्वार बंद हो जाते हैं। क़ुरआने मजीद की आयतों में आया है कि रमज़ान महीने की रातों में एक ऐसी रात भी है जिसमें की जाने वाली उपासना एक हज़ार महीनों तक की जाने वाली उपासना के बराबर मानी जाती है। पैग़म्बरे इस्लाम (स) शाबान के अपने विशेष भाषण में कहते हैं कि हे, ईश्वर के बंदों, ईश्वर की अनुकंपाओं, अनुशंसाओं और क्षमा का महीना आपके सामने है। वह महीना जो ईश्वर के निकट सबसे उत्तम महीना है। जिसके दिन, उत्तम दिन, जिसकी रातें सबसे अच्छी रातें और जिसकी घड़ियां उत्तम घड़ियां हैं। आपको ईश्वरीय आतिथ्य का निमंत्रण दिया गया है। आप सम्मानीय लोगों के गुट में सम्मिलित हुए हैं। इस महीने में आपकी सांसें ईश्वरीय गुणगान, आपकी नींद ईश्वर की उपासना, आपके कर्म स्वीकारीय और आपकी दुआएं पूरी होती हैं अतः सच्ची भावना और पवित्र हृदय से अपने पालनहार को पुकारिये ताकि रोज़ा रखने और क़ुरआन पढ़ने में वह आपकी सहायता करे। कितना अभागा है वह व्यक्ति जो इस महान महीने में ईश्वरीय क्षमा का पात्र न बन सके। आप इस महीने की भूख और प्यास की कल्पना कीजिए। इसके पश्चात पैग़म्बरे इस्लाम (स) रोज़ा रखने वालों के कर्तव्यों को गिनवाते हैं और इस महीने में निर्धनों को दान देने, बड़े-बूढ़ों के सम्मान, बच्चों पर कृपा, निकट संबन्धियों से मेल-मिलाप, ज़बान-आंख और कान को हराम और वर्जित बातें कहने, देखने और सुनने से रोकने, यतीमों के प्रति कृपा तथा उपासना और लोगों विशेषकर दीन-दुखियों को भोजन कराने के पुण्य की व्याख्या करते हैं। श्रोता मित्रों, रमज़ान का महीना ईश्वर की विभूतियों का महीना है। यदि रोज़े को पूरे ज्ञान के साथ रखा जाए तो यह महीना मनुष्य के शरीर, उसकी आत्मा और उसके समाज के लिए अत्यन्त सकारात्मक आयामों वाला अवसर है। हमारी ईश्वर से प्रार्थना है कि वह हमें रोज़े को उसके वास्तविक अर्थों और उद्देश्यों के साथ रखने की क्षमता प्रदान करे। आमीन।


source : hindi.irib.ir
  12
  0
  0
امتیاز شما به این مطلب ؟

latest article

बिस्मिल्लाह से आऱम्भ करने का कारण1
घास और उनके आश्चर्यजनक लाभ 1
अर्रहीम 2
क्या कुरआन को समझ कर पढना ज़रुरी हैं ...
हज अमीरूल-मोमिनीन (अ.) की निगाह में
इमाम नक़ी अलैहिस्सलाम की अहादीस
आसमान वालों के नज़दीक इमाम जाफ़र ...
सबसे पहला ज़ाएर
सलाह व मशवरा
तव्वाबीन 2

 
user comment