Hindi
Monday 21st of September 2020
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मौत के बाद का अजीब आलम

हमारा अक़ीदह है कि वह चीज़े जो मौत के बाद उस जहान में क़ियामत,जन्नत ,जहन्नम में रूनुमाँ होंगी हम इस महदूद दुनिया में उस से बाख़बर नही हो सकते चूँकि वह हमारी फ़िक्र से बहुत बलन्द चीज़ें हैं। फ़ला तअलमु नफ़सुन मा उख़फ़िया लहुम मिन क़ुर्रति आयुनिन”[100] किसी नफ़्स को मालूम नही है कि उस के लिए क्या क्या ख़ुन्की-ए- चश्म का सामान छुपा कर रक्खा गया है जो उन के आमाल की जज़ा है।

पैग़म्बरे इस्लाम (स.)की एक मशहूर हदीस में इरशाद हुआ है कि इन्ना अल्लाहा यक़ुलु आदद्तु लिइबादिया अस्सालिहीना मा ला ऐनुन राअत वला उज़नुन समिअत व ला ख़तरा अला क़ल्बि बशरिन। ”[101] यानी अल्लाह तआला फ़रमाता है कि मैनें अपने नेक बन्दों के लिए जो नेअमतें आमादह की हैं वह ऐसी हैं कि न किसी आँख नें ऐसी नेअमते देखी हैं न किसी कान ने उनके बारे में सुना है और न किसी दिल में उन का तसव्वुर पैदा हुआ है।

हक़ीक़त यह है कि हमारी मिसाल इस दुनिया में उस बच्चे की सी है जो अभी अपनी माँ के शिकम में है और पेट की महदूद फ़ज़ में ज़िन्दगी बसर कर रहा है। फ़र्ज़ करो कि अगर यह बच्चा जो अभी माँ के पेट में है अक़्ल व शऊर भी रखता हो तो बाहर की दुनिया में मौजूद चमकता हुए सूरज दमकते हुए चाँद, फूलों के मनाज़िर, हवाओं के हल्के हल्के झोंकों,दरिया की मोजों की सदा जैसे मफ़ाहीम व हक़ाइक़ को दर्क नही कर सकता। बस यह दुनिया भी उस जहान के मुक़ाबिल माँ के पेट की तरह है। इस पर तवज्जोह करनी चाहिए।


source : alhassnain.com
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