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Thursday 1st of October 2020
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शरीर की रक्षा प्रणाली 1

शरीर की रक्षा प्रणाली 1

पुस्तक का नामः दुआए कुमैल का वर्णन

लेखकः आयतुल्लाह अनसारीयान

 

ईश्वर ने मानव शरीर की रचना करने के उपरान्त अपनी कृपा एंव प्रेम के आधार पर उसके अंदर ऐसी शक्ति प्रदान की जिसके कारण हमलावर शत्रुओ का मुक़ाबला कर सकता है अर्थात वह माइक्रोब Microbe  तथा रोग उस से दूर रहते है और मनुष्य को अपनी रक्षा करने के लिए पाँच शक्तिया प्रदान की है।

1- त्वचाः जिसने हमारे पूरे शरीर को एक महल के समान सुरक्षित बनाया है।

2- लसीका Lymphe: यह शरीर की त्वचा के नीचे होते है जो क्रीम रंग के होते है तथा कभी कभी इनके रंग मे परिवर्तन भी आ जाता है।

यह शरीर के कुच्छ भाग मे मोटे मोटे होते है तथा कभी कभी महीन, जब मैक्रोब तथा रोग शरीर मे प्रवेश करते है तो यह उसका विरोद्ध करते है।

3- श्लेष्मा झिल्लीः यह झिल्ली शरीर के अंगो पर होती है तथा उसका रंग उसी अंग के अनुसार होता है और इसका काम भी उस अंग की सुरक्षा करना है।

शरीर के कुच्छ अंग जैसे हृदय पर दो झिल्ली होती है एक हृदय के बाहर होती है जिसको बाहरी श्लेष्मा कहते है तथा दूसरी झिल्ली हृदय के अंदर होती है जिसे भीतरी श्लेष्मा कहते है।

4- किडनी की खटासः यदि कोई रोग इन झिल्लीयो से मुक़ाबला करके शरीर के भीतर प्रवेश करके किडनी तक पहुंचती है तो किडनी की खटास उसका विनाश कर देती है।

5- सफ़ेद कोशिका White Globule[1]: सफ़ेद कोशिका जो गेद के समान होती है, जब गंदे मेक्रोब शरीर मे प्रवेश करके रक्त मे मिलते है तो यही सफ़ेद कोशिकाए उन से जंग करके उनका विनाश करती है।

 

जारी



[1] मनुष्य के रक्त मे दो प्रकार की लाल और सफ़ेद कोशिकाए होती है। जब लाल कोशिकाओ मे कमी होती है तो मानव शरीर मे रक्त कम हो जाता है। एक मिली लीटर रक्त मे पांच मिलियन लाल कोशिकाए तथा 6 से 7 हज़ार सफ़ेद कोशिकाए होती है। (अनुवादक) 

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