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Sunday 27th of September 2020
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ईश्वर की दया के विचित्र जलवे 2

ईश्वर की दया के विचित्र जलवे 2

पुस्तक का नामः दुआए कुमैल का वर्णन

लेखकः आयतुल्लाह अनसारीयान

 

इसके पूर्व के लेख मे ईश्वर की दया के विचित्र जलवे का विस्तार करते हुए कहा था कि यदि कोई 50 वर्ष का व्यक्ति अपनी जीवनी को बिना किसी कमी और ज्यादती के लिखने का इच्छुक हो, तो उस को लिखने के लिए लगभग 20 पन्नो पर आधारित ऐसे 16 करोड़ समाचार पत्रो की आवश्यकता है जिन मे महीन महीन लिखा जाए, भूतकाल की बातो को ज़हन मे लाना टेप आडियो कैसिट के समान है, इस अंतर के साथ कि मनुष्य के ज़हन की कैसिट स्वयं इंसान के ज़हन से चलती है परन्तु उसे घुमाने की आवश्यकता नही है। अब आप इसके दूसरे भाग मे इस बात का अध्ययन करेंगे कि यदि ध्यानपूर्वक मशीन का निर्माण भी किया जाए तो वह मनुष्य के दिमाग़ी कार्यो को नही कर सकती।   

यदि ध्यानपूर्वक एक ऐसी मशीन का निर्माण किया जाए, जो मनुष्य के सभी दिमाग़ी कार्यो को कर सके तो एक इतनी बड़ी मशीन बनाने की आवश्यकता होगी जो संसार की सबसे बड़ी बिल्डिंग से दुगनी बड़ी हो, तथा उसके लिए बड़े से बड़े झरनो द्वारा उत्पन्न होने वाली विधुत की आवश्यकता है, और क्योकि इलैक्ट्रोनिक बल्ब तथा तार इत्यादि उसमे इतनी गर्मी पैदा कर देंगे जिस से उसको ठंडा करने के लिए उस झरने के पूर्ण पानी की आवश्यकता होगी, तो उस समय भी ऐसी मशीन का निर्माण नही कर पाऐंगे जो एक सामान्य इंसान की सभी विचार धाराओ का कार्य कर सके।

मा के स्तन से दूध पीने का आदेश शिशु के ज़हन से होटो द्वारा पारित होता है तथा शिशु बिना किसी ग़लती के मा का दूध पीने लगता है।

मा के शरीर मे एक स्वचलित रसायनिक फैक्ट्री होती है जो रक्त को उत्कृष्ट (बेहतरीन, अच्छा) तथा उपयोगी आहार (अर्थात दूध) मे परिवर्तित कर देती है, और शिशु की पाचन प्रणाली के लिए भी उचित होता है।

इस फ़ैक्ट्री से उत्पन्न होने वाला दूध मा के स्तन मे एकत्रित हो जाता है तथा शिशु के पेट मे जाकर शिशु के शरीर का भाग बन जाता है।

   

जारी

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