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Thursday 22nd of August 2019
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महासचिव के पद पर बान की मून का पुनः चयन

संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा ने 63 वर्षीय बान की मून को एक बार फिर पांच वर्षों के लिए राष्ट्र संघ के महासचिव के पद के लिए चुन लिया है। सुरक्षा परिषद के पंद्रह सदस्यों ने भी शुक्रवार को इस पद पर बान की मून के बने रहने का समर्थन किया था। इस पद पर उनका पहला पांच वर्षीय कार्यकाल 31 दिसम्बर 2011 को समाप्त हो रहा है।

संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा ने 63 वर्षीय बान की मून को एक बार फिर पांच वर्षों के लिए राष्ट्र संघ के महासचिव के पद के लिए चुन लिया है। सुरक्षा परिषद के पंद्रह सदस्यों ने भी शुक्रवार को इस पद पर बान की मून के बने रहने का समर्थन किया था। इस पद पर उनका पहला पांच वर्षीय कार्यकाल 31 दिसम्बर 2011 को समाप्त हो रहा है। उन्होंने पर्यावरण में परिवर्तन, आर्थिक प्रगति और अरब देशों में जनान्दोलनों के समर्थन को दूसरे कार्यकाल में अपनी प्राथमिकताओं में बताया। पिछले पांच वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं और राजनैतिक टीकाकारों के अनुसार बान की मून ने इन परिवर्तनों के संबंध में केवल दर्शक की भूमिका निभाई है। मध्यपूर्व के परिवर्तन और विश्व का आर्थिक संकट दो ऐसे विषय हैं जिनके संबंध में संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपेक्षित भूमिका नहीं निभाई है। बान की मून ने पिछले पांच वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय मामलों में अमरीका की इच्छा के अनुसार काम किया और इसी लिए उन्हें अमरीका का व्यापक समर्थन भी प्राप्त रहा और दूसरे कार्यकाल के लिए भी अमरीका ने उन्हें राष्ट्र संघ का महासचिव बनाए जाने का भरपूर समर्थन किया। प्रजातंत्र, आतंकवाद और निरस्त्रीकरण जैसे विषय बान की मून की दृष्टि में अमरीका के दृष्टिगत लिब्रल प्रजातंत्र के समान हैं। दूसरे शब्दों में जिस देश ने भी अमरीका की हां में हां मिलाई उसे बान की मून का स्नेह प्राप्त रहा जबकि अमरीका से अलग एवं स्वतंत्र नीतियां अपनाने वाले देश उनके ध्यान के पात्र नहीं रहे। संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव ने वर्ष 2008 में ज़ायोनी शासन द्वारा ग़ज़्ज़ा पट्टी पर किए गए पाश्विक आक्रमण के विध्वंसकारी परिणामों को अपनी आंखों से देखने के बाद भी इस संबंध में न केवल यह कि कोई ठोस क़दम नहीं उठाया बल्कि उनका व्यवहार ऐसा रहा कि जिससे अमरीका व इस्राईल अप्रसन्न न हों। इस आक्रमण के बाद इस्राईल द्वारा ग़ज़्ज़ा पट्टी के अत्याचारपूर्ण परिवेष्टन के संबंध में भी बान की मून ने ज़ायोनी शासन की निंदा में एक शब्द भी नहीं कहा। प्रत्येक दशा में बान की मून के पास अन्य पांच वर्षों का समय है कि वे अंतर्राष्ट्रीय परिवर्तनों के संबंध में सक्रिय भूमिका निभाएं। विश्व समुदाय को आशा है कि वे लीबिया में आम नागरिकों का जनसंहार रोकने, स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी देश के गठन, इराक़ व अफ़ग़ानिस्तान का अतिग्रहण समाप्त कराने और इसी प्रकार राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में मूल सुधार के संबंध में ठोस क़दम उठाएंगे।

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