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Thursday 12th of December 2019
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गुद मैथुन इस्लाम की निगाह मे

गुद मैथुन इस्लाम की निगाह मे

हस्त मैथुन की तरह गुद मैथुन (इग़लाम बाज़ी अर्थात लड़कों के साथ बुरा काम करना) भी केवल पुरूषों में नही है बल्कि दुनियाँ में गुद मैथुन क्रिया की शिकार औरतों में भी पाई जाती हैं जो अपनी सेक्सी इच्छा के संतोष के लिए इधर उधर मुँह मारती फिरती हैं। अपने सेक्सी अंगों को दिखाती हैं ताकि अधिक से अधिक लड़के (पुरूष) उनकी ओर आकर्षित हों। अधिकतर देखा गया है कि ऐसी औरतें बड़ी आयु के लोगों को घांस नही डालती हैं बल्कि नौजवानों को चुनती हैं और वह जल्द उन औरतों के मुहब्बत के जाल मे गिरफ्तार हो जाते हैं। यह ज़माने को देखी हुई औरतें चूँकि सेक्स और मैथुन के सभी उसूलों और तरीकों को जानती हैं इस लिए जब नौजवान को अपनी मुहब्बत के जाल में फंसाने के लिए उस से लिपटती , चिमटती , चूमती और उसके लिंग को पकड़ कर मसलती और प्यार करती हैं तो नौजवान लड़का अपनी भावनाओं (जज़्बे पर काबू नही रख पाता। फिर वह इस तरह से मैथुन करती है कि बस वह उसी का गुलाम हो कर रह जाता है ( 12) ----- फिर कुछ दिन बाद ऐसे नौजवान सेक्सी तौर पर बेकार हो जाते हैं। और वह औरतें दूसरे नौजवान को तलाश कर लेती हैं।

पुरूष में यह सेक्सी लगाव अपनी ही जाती (लिंग) अर्थात् लड़को की तरफ होता है जिनसे दोस्ती पैदा कर लेने में ज्यादा कठिनाई नही होती। लेकिन यह रास्ता पहले (अर्थात हस्त मैथुन) से भी अधीक तबाह करने वाला होता है। क्योंकि पैदा करने वाले (अर्थात खुदा) ने पुरूष को पुरूष के साथ बुरा काम करने के लिए नही पैदा किया है।

ग़ौर से देखें और दुनिया की सभी चीज़ों का निरीक्षण करें तो मालूम होगा कि चौपाये , पंक्षी और जंगली जानवर सब इस जुर्म और बुरी आदत से बहुत दूर हैं। इन्सान के अतिरिक्त किसी दूसरे जानवर में नर को नर के साथ बुरा काम करते नही देखा जा सकता है।( 13) अर्थात एक ऐसा जुर्म है जिसकी कल्पना भी उनमें मौजूद नही। लेकिन यह इन्सान का अभाग्य है कि उसने अपनी तबाही के लिए नया रास्ता निकाल लिया है। आदम की औलादों में सब से ज़्यादा बुरा , खराब और बेग़ैरत वह लड़का है जो दूसरे से बुरा काम करवाता है और बहुत लानत है उस लड़के पर जो अपने ही जैसे लड़के के साथ बुरा काम करता है।

कुर्आने करीम में यह वाकेया मौजूद है कि शैतान ने क़ौमे-ए-लूत ( 14) को एक ऐसे बुरे काम में फसा दिया जो उनसे पहले दुनिया की किसी क़ौम का फर्द (मनुष्य) ने नही किया था और न किसी को उसकी खबर थी। वह बुरा काम यह था कि मर्द नौजवान लड़कों के साथ बुरा काम करते थे और अपनी सेक्सी इच्छा को औरतों के बजाए लड़कों से पूरा करते थे। इस पर अल्लाह ने अपने पैग़म्बर हज़रत लूत (अ.) को आदेश दिया कि वह इन लोंगो को इस से बचे रहने की नसीहत करें। आपने अल्लाह के आदेश का पालन करते हुए , अपनी कौंम को , कौंम की लड़कियों से निकाह करने के लिए कहा। लेकिन इस काम में फंसे लोगों ने आप की एक न सुनी। आख़िर कार लूत (अ ,) की कौम पर खुदा का अज़ाब (पाप) आया और इस काम में फंसे लोग अपने पूरे माल व असहाब (अर्थात सामान) और शान व शौकत के साथ हमेशा-हमेशा के लिए ग़र्क हो (डूब) गए।

अतः इस बुरे और खराब काम से बचना ज़रूरी है। वरना लूत की कौम वाला हाल हो जाएगा। ऐसे लोगों की सज़ा इस्लाम में कत्ल है।( 15) इससे लिंग की रगें मर जाती हैं और आदमी नामर्द (नपुंसक) हो जाता है साथ ही साथ सहत व तनदुरूस्ती ख़त्म और बीमारियाँ लग जाती हैं। जबकि इस्लाम मनुष्य को तन्दुरूस्त देखना चाहता है न कि बीमार।

क़ुर्आन में गुद मैथुन अर्थात अपनी ही लिंग से सेक्सी इच्छा को पूरा करने वाले लोगों से सम्बन्धित यह मिलता हैः-

“ (हाँ) तुम औरतों को छोड़कर सेक्सी इच्छा की पूर्ति के वास्ते मर्दों की ओर आकर्षित होते हो (हालांकि इसकी ज़रूरत नहीं) मगर तुम लोग हो ही बेहूदा (बेकार) सर्फ़ (खर्च) करने वाले (कि नुतफ़े अर्थात वीर्य को नष्ट करते हो)। “ (16)

और

“ क्या तुम औरतों को छोड़ कर काम वासना (इच्छा पूर्ति) से मर्दों के पास आते हो (यह तुम अच्छा नही करते) बल्कि तुम लोग बड़ी अनपढ क़ौम हो ”।( 17)

या

“ क्या तुम लोग (औरतों को छोड़कर काम वासना के लिए) मर्दों की तरफ गिरते हो और (मुसाफिरों की) रहज़नी (लूट पाट) करते हो ”।( 18)

यह भी है कि

“ क्या तुम लोग (काम वासना के लिए) सारी दुनिया के लोगों में मर्दों ही के पास जाते हो और तुम्हारे लिए जो बीवीयाँ तुम्हारे खुदा ने पैदा की हैं उन्हे छोड़ देते हो (यह कुछ नहीं) बल्कि तुम लोग हद से गुज़र जाने वाले आदमी हो ”।( 19)

और

“ जब किसी क़ौम में गुद मैथुन की ज़्यादती हो जाती है तो खुदा उस क़ौम से अपना हाथ उठा लेता है और उसे इसकी परवाह (ख्याल) नही होती कि यह क़ौम किसी जंगल में हल़ाक कर दी जाए ”। ( 20)

यह भी मिलता है

“ अल्लाह तआला उस मर्द की तरफ देखना भी पसन्द नही करता जो किसी औरत या मर्द से गुद मैथुन करता है। (यह तो क़ुफ़्र के बराबर है) ” (21)

अतः इस बुरे और हराम काम से सच्चे दिल से तौबः करनी चाहिए और केवल औरतों से उसकी जाएज़ और हलाल जगह से ही सेक्स इच्छा की पूर्ति हासिल करना चाहिए। जो प्राकृतिक है।

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