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Monday 20th of May 2019
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बूट पालिश करने वाले लूला डिसिल्वा भी क्या महातीर मुहम्मद की तरह फिर सत्ता में लौटेंगे? हम क्यों यह समझते हैं कि भ्रष्टाचार के आर

ब्राज़ील के राजनैतिक पटल पर नज़र डाली जाए तो पता चलता है कि वहां लेबर पार्टी एक क्रान्ति लाने में सफल हो गई है जिसने जेल की सलाख़ों के पीछे बंद अपने नेता लूला डिसिल्वा को अकतूबर में होने वाले चुनावों के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है।

लूला डिसिल्वा के बारे में कहा जाता है कि सर्वे रिपोर्टों में उनकी लोकप्रियता सबसे अधिक है और उन्हें एक रियल स्टेट कंपनी को कान्ट्रैक्ट दिलवाने के बदले 3 कमरों का फ़्लैट हासिल करने के आरोप में 12 साल जेल की जो सज़ा सुनाई गई थी उसे जनता अन्यायपूर्ण और झूठा आरोप मानती है। लूला डिसिल्वा अपने ऊपर लगे आरोपों को ख़ारिज करते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कमेटी ने फ़ैसला सुनाया है कि लूला डिसिल्वा अपनी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव में भाग ले सकते हैं और उन्हें मीडिया के सामने आकर अपने चुनावी एजेंडे के बारे में बात करने की भी अनुमति है। मगर जेल से उनकी रिहाई के बारे में इस कमेटी ने कुछ नहीं कहा क्योंकि इसका फ़ैसला न्यायपालिका को करना है।

लूला डिसिल्वा कभी जूतों पर पालिश किया करते थे। उनके घर में फ़्रिज और टीवी नहीं था। उन पर और उनकी सहयोगी डिल्मा रूसेफ़ पर आरोपों की बौछार उद्योग पतियों और भ्रष्टाचारियों के माफ़िया ने की जिसे दक्षिणपंथी पार्टियों और अमरीका का समर्थन प्राप्त है। इसलिए कि इन दोनों नेताओं ने ग़रीबों और वंचितों के उत्थान के लिए काम किया और आर्थिक विकास की अच्छी दर हासिल की और अमरीका की ओर से ब्राज़ील के ख़िलाफ़ जारी भीषण आर्थिक युद्ध के बावजूद उन्होंने ब्राज़ील को आर्थिक ताक़त बना दिया।

अब उम्मीदवार के रुप में चुनाव में डिसिल्वा के उतरने का फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है। यदि अदालत उन्हें अयोग्य घोषित कर देती है तो वंचित वर्गों की उम्मीदों पर पानी फिर जाएगा जो लूला डिसिल्वा को एक बार फिर राष्ट्रपति के रूप में देखना चाहते हैं।

ग़रीबी का जीवन गुज़ार चुके लूला डिसिल्वा हमें फ़िलिस्तीनी संघर्षकर्ता मरवान बरग़ूसी की याद दिलाते हैं जो बहुत लंबा समय इस्राईली जेलों में बंद रहे और जिन्हें क़ैदियों के सरकार की उपाधि दी गई। इस तरह हमें दक्षिणी अफ़्रीक़ा के लौहपुरुष नेल्सन मंडेला की याद दिलाते हैं जिन्होंने जेल से छूट कर देश की सत्ता संभाली और दक्षिणी अफ़्रीक़ा में अपारथाइड व्यवस्था का हमेशा के लिए अंत कर दिया।

ब्राज़ील की पूरी जनता या जनता का बड़ा भाग लूला डिसिल्वा की सत्ता में वापसी चाहता है क्योंकि देश की आर्थिक दशा बहुत ख़राब हो गई है और भ्रष्टाचार बढ़ गया है। राजधानी की सड़कों पर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। दूसरे शहरों में भी लूला डिसिल्वा की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। वर्तमान भ्रष्टाचारी प्रशासन अपनी आर्थिक शक्ति और पुलिस बल से प्रदर्शनों को कुचल रहा है।

सलाख़ों के पीछे बंद पूर्व राष्ट्रपति की व्यापक लोकप्रियता उनकी बेगुनाही का रेफ़रेन्डम है। इससे पता चलता है कि उनके साथ कितना अन्याय हुआ है। इससे यह भी साबित हो गया कि ब्राज़ील में वर्तमान समय में सत्ताधारी धड़ा जिसे अमरीका का समर्थन प्राप्त है और जो अमरीका की नीतियों पर चल रहा है जनता उसे नापसंद करती है।

लूला डिसिल्वा का संबंध उस पीढ़ी से है जिसने अमरीकी वर्चस्व को चुनौती दी और उसके ख़िलाफ़ संघर्ष करके वंचित वर्गों के हित में काम किया। इस पीढ़ी के अन्य लोगों में वेनेज़ोएला के ह्यूगो चावेज़, बोलीविया के मोरालीस, ब्राज़ील के लूला डिसिल्वा और उरुग्वे के ख़ोसिए मोख़ीका शामिल हैं जिन्होंने हाल ही में पेंशन लेने से इंकार कर दिया और जब सत्ता में थे तो अपनी तनख़्वाह का 80 प्रतिशत भाग ग़रीबों में बांट दिया करते थे। वह इस समय अपनी पत्नी के मामूली से घर में जीवन बिताते हैं उनके पास 1978 माडल की एक वाक्सवेगन गाड़ी के अलावा कुछ नहीं है।

लूला डिसिल्वा और उनकी सहयोगी रूसेफ़ ने अरब मुद्दों पर न्याय का साथ दिया। उन्होंने इराक़ पर अमरीकी हमले का विरोध किया, उन्होंने फ़िलिस्तीनी जनता के अपने देश की स्थापना के अधिकार को मान्यता दी। इसी लिए अमरीका और इस्राईल की ओर से उनके ख़िलाफ़ आरोप गढ़े गए और उन्हें सत्ता से बेदख़ल किया गया।

अब क्या लूला डिसिल्वा भी मलेशिया के प्रधानमंत्री महातीर मुहम्मद की तरह सत्ता में लौटेंगे और आकर भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध लड़ाई छेड़ कर देश को भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों से मुक्ति दिलाएंगे। हमारी कामना तो यही है।

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