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Tuesday 17th of October 2017
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सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई का हज संदेश

अहलेबैत  न्यूज़ एजेंसी अबनाः ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़मा सैय्यद अली ख़ामेनई ने हज के अवसर पर अपने संदेश में इस्लामी जगत जिन बीमारियों से ग्रस्त है, उनका उल्लेख करते हुए उसके इलाज का वर्णन किया है। यह संदेश इस प्रकार है...
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
उस महान ईश्वर के हम आभारी हैं कि जिसने इस साल भी पूरी दुनिया के आस्थावानों की एक बड़ी संख्या को हज का अवसर प्रदान किया ताकि वह कृपा व दया के इस शीतल व विशाल स्रोत से लाभान्वित हो सकें और इस अवसर के बहुमूल्य क्षणों को अल्लाह के वैभवशाली घर के निकट उपासना, ईश्वर के गुणगान और उससे निकटता के प्रयास में व्यतीत कर सकें क्योंकि यह क्षण किसी चमत्कारी बूटी की तरह दिलों को बदल देने और आत्मा को शुद्ध व सुसज्जित करने की क्षमता रखते हैं।
    हज, रहस्यमय उपासना है और काबा, ईश्वरीय अनुकंपाओं का घर और अल्लाह की निशानियों के प्रदर्शन का स्थान है। हज आस्थावान व चिंतन करने वाले मोमिन बंदे को आध्यात्मिक विकास प्रदान कर सकता है और उसे एक उच्च व तेजस्वी मनुष्य बना सकता है। इसी तरह हज उसे एक दूरदर्शी, साहसी व कर्मठ व संघर्षकर्ता इन्सान भी बना सकता है। इस अदभुत उपासना में आध्यात्मिक व राजनीतिक और व्यक्तिगत और सामाजिक पहलु बेहद स्पष्ट रूप से नज़र आते हैं। आज मुस्लिम समाज को इन दोनों आयामों की ज़रूरत है।
     एक तरफ आधुनिक साधनों की मदद से भौतिकवाद का जादू, लोगों को बहकाने और तबाह करने में व्यस्त है तो दूसरी तरफ वर्चस्ववादी शक्तियां मुसलमानों के बीच झगड़े का बीज बोने और इसलामी देशों को अशांति  व मतभेद से भरा नर्क बनाने में व्यस्त हैं।
हज इस्लामी राष्ट्र के इन दोनों असाध्य रोगों की प्रभावशाली दवा बन सकता है। यह दिलों को साफ करके उसे ईश्वरीय भय और ज्ञान से प्रकाशमयी कर सकता है और इसी तरह यह आंखों को भी इस्लामी जगत की कटु सच्चाइयों के सामने खोल सकता है और इन कटुताओं को दूर करने के लिए दिल में सकंल्प और क़दम को मज़बूत और हाथों और विचारों को तैयार कर सकता है।
आज, इस्लामी जगत में अशांति  फैली है, नैतिक अशांति, आध्यात्मिक अशांति, और राजनीतिक अशांति, हमारी निश्चेतना और दुश्मन के क्रूर हमलों का मुख्य कारण है। हम ने दुष्ट शत्रु के हमलों के मुक़ाबले के लिए अपने धार्मिक व बौद्धिक कर्तव्यों का पालन नहीं किया। कुरआने मजीद की इस आयत को भूल गये कि ” ईश्वर पर आस्था रखने वाले ईश्वर का इन्कार करने वालों के लिए कठोर होते हैं ।” इसी का नतीजा है कि आज ज़ायोनी शत्रु, इस्लामी जगत के भुगोल के बीचो बीच , दुष्टता की आग फैला रहा है और हम फिलिस्तीनियों को बचाने के अपने मूल्य कर्तव्य को भूल कर सीरिया, इराक़, यमन, लीबिया, बहरैन के गृहयुद्धों में और अफ़ग़ानिस्तान व पाकिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में फंसे हुए हैं।
इस्लामी देशों के राष्ट्रध्यक्ष और इस्लामी जगत की राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक हस्तियों के कांधों पर भारी ज़िम्मेदारी है, उन पर एकता बनाने, धार्मिक व जातीय झगड़ों से सब को दूर रखने की ज़िम्मेदारी है, दुश्मनों की शैलियों और साम्राज्यवादी शक्तियों और ज़ायोनियों की धूर्तता से इस्लामी राष्ट्र को अवगत कराने की ज़िम्मेदारी है। उन पर हर प्रकार के युद्धों के मोर्चों पर दुश्मन से मुक़ाबले के लिए इस्लामी राष्ट्र को प्रशिक्षित व लैस करने की ज़िम्मेदारी है, उन पर इस्लामी देशों में त्रासदियों को तत्काल रोकने की ज़िम्मेदारी है जिसका आज एक कड़वा उदाहरण यमन  है जिस पर पूरी दुनिया में दुख प्रकट किया जा रहा है और जिसका विरोध हो रहा है। इन की एक ज़िम्मेदारी, मियांमार के पीड़ितों जैसे अन्य अत्याचार ग्रस्त अल्पसंख्यकों की रक्षा करना है और इन सब से अधिक महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी, फ़िलिस्तीन का समर्थन और उस राष्ट्र के साथ बिना शर्त का सहयोग है जो लगभग सत्तर साल से अपने अतिग्रहित देश को वापस पाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
यह हम सब के कांधों पर अहम ज़िम्मेदारियां हैं। राष्ट्रों को चाहिए कि वह इन सब की मांग अपनी-अपनी सरकारों से करें और बुद्धिजीवियों को मज़बूत संकल्प व सदभावना के साथ इस दिशा में प्रयास करना चाहिए। यह काम, पूरी तरह से ” अल्लाह  के धर्म की मदद” के दायरे में हैं जो अल्लाह के वचन के मुताबिक़, खुद अल्लाह की तरफ से मदद का कारण बनेंगे।
यह हज से मिलने वाले कुछ पाठ हैं और हमें आशा है कि हम सब इन पाठों को समझेंगे और उन का पालन करेंगे।
मैं आप सब के हज को ईश्वर के निकट स्वीकारीय होने की दुआ करता हूं और ” मिना”  ” मस्जिदुल हराम” के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और कृपालु ईश्वर से उनकी अधिक महानता के लिए दुआ करता हूं।
वस्सलामो अलैकुम व रमतुल्लाहे व बरकातोहू
सैयद अली ख़ामेनई
7 शहरीवर 1396
बराबर 7 ज़िलहिज्

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