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Monday 22nd of April 2019
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तुर्की और आईएसआईएल के बीच मतभेद दिखावटी या वास्तविक?

तुर्की और आईएसआईएल के बीच मतभेद दिखावटी या वास्तविक?

अबना: यह जो तुर्की के सूचना सूत्रों ने घोषणा की है कि तुर्की में इस्लामिक स्टेट आईएसआईएल आतंकवादियों के कार्यालयों और उनकी साइटों को बंद कर दिया गया है अगर यह ख़बर सच्चाई पर आधारित हो कि जिसकी पुष्टि या खंडन की कोई संभावना भी नहीं है तो यह खुद इस बात को स्वीकार करना है कि अब तक तुर्की और आईएस आपस में सहयोग कर रहे थे।
विलायत पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार सीरिया के उत्तरी क्षेत्रों और तुर्की के दक्षिणी क्षेत्रों के पिछले सप्ताह के बदलते हालात सीरिया की लड़ाई में एक बड़े परिवर्तन की खबर दे रहे हैं। रमज़ान के आख़िर तक बश्शार असद सरकार के पतन की अफवाहों के एक महीने बाद, इस समय वही लोग जो इन अफवाहों का असली स्रोत थे यानी तुर्की और आईएस, एक दूसरे के आमने सामने आ चुके हैं, तुर्की के एक छोटे सीमावर्ती शहर सूरोच पर आईएस के 6 दिन पहले किए गए आत्मघाती आतंकवादी हमले के बाद जो सीरिया के कुर्दी शहर कोबानी के पास है, उसने वामपंथी तुर्की के कुर्दों के समूहों की एक बैठक पर हमला किया जिसमें लगभग 40 लोग मारे गए और इस हमले ने तुर्की के लिए ख़तरे का अलार्म बजा दिया, इसलिए कि एक तरफ यह दुर्घटना तुर्की के अंदर घटित हुई जो आईएस और ओर्दगान सरकार के गुप्त समझौते की धज्जियां बिखेर रही है तो दूसरी ओर तुर्की के कुर्दों के मारे जाने से कुर्द पार्टियों के भीतर तुर्की सरकार के खिलाफ़ शक पैदा हो रहा है, जैसा कि इसके दो दिन बाद जब कुर्द पार्टी पी के के ने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया था कि उसने तुर्की सेना के दो सैनिकों को सूरोच दुर्घटना के बदले में मार डाला है।
इसके बाद तुर्की ने एक तरफ अपनी सीमा को जो अब तक सीरिया और इराक़ के आईएस आतंकवादियों के आने जाने का सबसे अच्छा रास्ता था बंद कर दिया और घोषणा की कि उसने दाश के 500 कार्यकर्ताओं को अपने दक्षिणी राज्यों में गिरफ्तार कर लिया है और पूरे तुर्की में इस समूह के कार्यालयों और साइटों को बंद कर दिया है और दूसरी ओर देश की सेना के दो जवानों के मारे जाने के बदले में सीरिया की सीमा पर हलब प्रांत में आईएस के ठिकानों पर व्यापक हमला किया है।
इस संबंध में कुछ बातें उल्लेखनीय हैं:
1. तुर्की के सीमावर्ती शहर सूरोच की दुर्घटना ने, कि जो शानली ओरफह प्रांत का हिस्सा है और कोबानी से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, ओर्दगान सरकार के खिलाफ तुर्क कुर्दों के विरोध के दायरे को बढ़ा दिया है और इस बात का डर पाया जा रहा था कि तुर्की में कुर्द बहुल क्षेत्र में जो इस देश के पूर्व और दक्षिण पूर्व के 21 राज्यों पर आधारित है और जिसकी आबादी लगभग एक करोड़ 90 लाख है, अशांति पैदा हो जाये यहां तक कि इसकी निशानियां दूसरे शहरों जैसे इस्तांबोल में भी दिखाई दें।
इसी लिए ओर्दगान सरकार ने पिछले सप्ताह न्याय व विकास पार्टी के वर्ष 2002 में सत्ता में आने के बाद पहली बार शांति कैबिनेट का गठन किया और बड़े पैमाने पर कदम उठाये। जिनमें से एक टर्की पुलिस का सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने वालों को रोकना था कि जिसके नतीजे में पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई स्थानों पर झड़पें भी हुईं। ओर्दगान ने दूसरा कदम यह उठाया कि सीरिया में कोबानी के कुछ क्षेत्रों पर हमला किया।
उन्होंने दावा किया कि इस गिरोह के दसियों लोगों को मार गिराया है। इसके साथ ही तुर्की की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी एम आई टी ने घोषणा की कि तुर्की के दक्षिणी क्षेत्रों में उसने आईएस के 500 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है और इस देश में आईएस की गतिविधियों पर रोक लगा दी है। इसके बावजूद यह कैसे कहा जा सकता है कि ओर्दगान ने लगभग चार साल तक आईएस आतंकी गुट के साथ सहयोग करने के बाद अब तुर्की के अल्वी और कुर्द बहुल क्षेत्रों में संकट पैदा हो जाने के डर से अपने पक्ष में सुधार लाने की कोशिश की है!
2. लगभग एक साल पहले जब आईएस ने हलब प्रांत के उत्तर पश्चिम में स्थित कोबानी पर कब्जा कर लिया था और वह सीरिया के कुर्दों पी वाई डी और तुर्की के कुर्दों पी के के, के साथ लड़ाई में व्यस्त थे, उस समय ओर्दगान सरकार कोबानी में आईएस पर हमले के खिलाफ थी यहां तक कि उसने तुर्की कुर्दों पर हमला भी किया और उनके कुछ जवानों को मारकर तुर्क कुर्दों की ओर से सीरियाई कुर्दों के लिए सहयोग में बाधा पैदा की थी और यह बहाना बनाते हुए कि सीरिया के केंद्रीय क्षेत्रों में आईएस और सेना दोनों का मुकाबला करना चाहिए उसने आईएस के खिलाफ कार्यवाही में रूकावट पैदा की थी, लेकिन उस समय आखिरकार सीरिया के कुर्द कोबानी को वापस लेने में सफल रहे थे।
आईएस ने पिछले एक महीने में कोबानी के कुछ क्षेत्रों पर कब्जा किया था लेकिन फिर कुर्द, आईएस पर हावी रहने में सफल हो गए और इस क्षेत्र के बहुत बड़े हिस्से को उनके नापाक वुजूद से मुक्त करा दिया, इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि कोबानी में आईएस पर तुर्की की सेना का कल का हवाई हमला, ऐसी सूरत में हुआ है कि जब इस गुट का कोबानी पर क़ब्ज़ा नहीं था और फिर ऐसी स्थिति में हुआ है कि आईएस, हलब के उत्तर में उस हाईवे के दोनों ओर जो तुर्की को हलब के केंद्र से मिलाता है, मौजूद है और इसी राजमार्ग के माध्यम से यहां तक कि आज भी तुर्की सेना उसका समर्थन कर रही है और अगर यह समर्थन केवल एक सप्ताह के लिए डिस्कनेक्ट हो तो रिक़्क़ह, दैरुज़्ज़ोर और हलब के राज्यों में या तो आईएस आतंकवादी मारे जायेंगे या वह वहां से भागने पर मजबूर हो जाएंगे। इसलिये अगर ओर्दगान को आईएस को वास्तव में चोट पहुंचाना होती तो उसे यह काम हलब में करना चाहिए था, न कि कोबानी या कामशली में!
यह जो तुर्की के सूचना सूत्रों ने घोषणा की है कि तुर्की में इस्लामिक स्टेट आईएसआईएल आतंकवादियों के कार्यालयों और उनकी साइटों को बंद कर दिया गया है अगर यह ख़बर सच्चाई पर आधारित हो कि जिसकी पुष्टि या खंडन की कोई संभावना भी नहीं है तो यह खुद इस बात को स्वीकार करना है कि तुर्की और आईएस आपस में सहयोग कर रहे थे। हालांकि इस घोषणा के बिना भी इस सहयोग के स्पष्ट सबूत मौजूद हैं।
3. सूरच शहर में एक सभा पर आईएस का हमला (जिसका क्षेत्रफल 375 किमी और जिसकी आबादी लगभग 60 हजार लोगों पर आधारित हैं) और 40 कुर्दों की हत्या करने को एक आत्मघाती हमला बताया गया था। पिछले दो हफ्तों के दौरान आईएस ने समझ लिया था कि सीरिया के संबंध में तुर्की की राजनीति में बदलाव आ गया है और वह जान गए थे कि इससे आईएस को नुकसान और असद सरकार को फायदा होने वाला है। कुर्दों की सभा पर आईएस के हमले से ओर्दगान को असाधारण नुकसान हो सकता था। इसलिए कि न्याय और विकास पार्टी को हाल के चुनाव में हार के बाद और सरकार बनाने के लिए आंतरिक समर्थन की जरूरत के मद्देनजर काफी हद तक मुश्किलों का का सामना है।
ओर्दगान की तुर्क कुर्दों के साथ लड़ाई और पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में अशांति फैलाना वर्तमान सरकार के पतन का कारण होगा और आईएस इस बात से अच्छी तरह अवगत है, ओर्दगान के खिलाफ कार्रवाई को आईएस आतंकवादी, अंकारा में या किसी दूसरे शहर में जिसकी आबादी तुर्क सुन्नियों पर आधारित है, अंजाम दे सकते थे लेकिन उन्होंने यह काम एक कुर्द शहर में कुर्दों के खिलाफ अंजाम दिया ताकि ओर्दगान को बता सके कि वह कम से कम 20 राज्यों को तार मार कर सकते हैं ।
4. तुर्की ऐसे मोड़ पर पहुंच चुका है कि जब चुनाव होना तय है और इसके साथ ही ओर्दगान एक ऐतिहासिक ग़ल्ती की खाई के कगार पर भी खड़े हैं। ओर्दगान सरकार और उसकी सुरक्षा प्रणाली, वर्तमान स्थिति में कि जिसका बुनियाद सीरिया और इराक़ सरकार के खिलाफ एक आतंकवादी गठबंधन बनाने पर आधारित है वह उसे जारी नहीं रख सकते, इसलिए कि एक ओर पिछले वर्षों के विपरीत इस समय ओर्दगान के अरब सहयोगी जो बश्शार असद और मालिकी के खिलाफ थे वह मैदान छोड़ रहे हैं अब तुर्की अगर पिछले रवैये को बाक़ी रखना चाहता है तो उसे अकेले इस रास्ते पर चलना होगा जबकि न्याय और विकास पार्टी की अंदरूनी हालत पहले जैसी नहीं है,
दूसरी ओर सीरिया की सरकार का रमज़ान की डेड लाइन से गुजर जाना कि ओर्दगान ने जिस पर कुछ ज्यादा ही भरोसा कर लिया था, और सीरिया सेना की एक साथ ज़ुब्दानी, दरआ, बादियतुश्शाम और तदमर क्षेत्रों में सफल कार्रवाई ने साबित कर दिया कि सीरिया की सरकार चार साल घेराबंदी और मुश्किल में रहने के बाद अब भी आतंकवादियों के गठबंधन पर भारी पड़ रही है। इसलिये असद के साथ दुश्मनी जारी रखने का कोई नतीजा नहीं होगा जब कि गलतियों से भरे रास्ते से वापस लौटना ओर्दगान के लिए सस्ता नहीं है आईएस कि जिसके पास 10 से 30 हजार तक सैनिक हैं
अगर सीरिया और इराक़ में हारने के बाद तुर्की का रुख करेंगे कि जिसकी सीमा इराक़ के नैनवा और सीरिया के रिक़्का और हलब के साथ मिली है और आईएस की सीमा भी केवल तुर्की की सीमा से जुड़ी हो इसकी संभावना भी अधिक है, ओर्दगान सरकार और तुर्की सेना, आईएस के मुक़ाबले में टिक नहीं सकते जिसके नतीजे में तुर्की सालों के लिए अशांति के संकट में गिरफ्तार हो जाएगा। इसलिए आज आईएस के साथ सहयोग बनाये रहना या उनसे सहयोग को खत्म कर लेना तुर्की सरकार के लिए आसान नहीं है, लेकिन इन सबके बावजूद टर्की आईएस के साथ अपने सहयोग को बाकी नहीं रख सकता इसलिए कि आईएस और तुर्की के आपसी सहयोग के बावजूद भी आईएस की हार और उसका तुर्की की ओर पलटना पक्का है।
लेकिन ओर्दगान सरकार और तुर्की, एक खुली ऐतिहासिक गलती की खाई के कगार पर हैं और जिसके आसार भी दिखाई दे रहे हैं। एक गैर सरकारी समाचार में जिसको अमीरात से जुड़े स्काई न्यूज अरबी ने प्रकाशित किया है, तुर्की के लड़ाकू विमानों के हमले कि जिन में एफ -16 जैसे आधुनिक विमान शामिल थे, कोबानी क्षेत्र में और आईएस के खिलाफ बने तथाकथित गठबंधन केंद्र से हुए हैं।
अगर यह बात सही हो तो ओर्दगान ने तुर्की को एक ख़तरनाक खाई के कगार पर ला खड़ा किया है और हमें लीबिया के आज के हालात को अपनी आँखों में सुरक्षित कर लेना चाहिए। नॉटो ने जब लीबिया पर हमला किया था जो कि लीबियाई जनता की मदद करने के लिए और तुर्की के 17 युद्धक विमानों के सहयोग से हुआ था, तुर्की के कई निवासी उस हमले मे मारे गये थे। तुर्की अमेरिका और नॉटो का आपसी गठबंधन भी कि जो सीरिया पर हमले की सूरत में है उससे कई गुना बड़े खतरे से तुर्की को दोचार कर सकता है, इसलिए कि सीरिया पर हमला वास्तव में दोनों पक्षों पर यानी प्रतिरोध के मोर्चे पर जिसका अक्ष असद सरकार और आतंकवाद के मोर्चे पर जिसका अक्ष आईएस है, माना जायेगा, इस आधार पर तुर्की को इस हमले के बाद दो ओर से कड़ी प्रतिक्रिया का सामना करना होगा अग तुर्की, अमेरिका और नॉटो पर भरोसा करता है तो जो कुछ कहा गया है
उस आधार पर वह गंभीर शांति संकट का शिकार हो जाएगा और इससे निकल नहीं पाएगा। अपने पिछले ग़लत व्यवहार के सुधार के लिए तुर्की के पास केवल एक रास्ता है और वह यह है कि वह प्रतिरोध के मोर्चे की ओर समस्या के समाधान के लिए बातचीत करे और सीरिया की सरकार के साथ सीधे वार्ता करे। अगर टर्की इस तरह के विकल्प को चुनता है तो उसको ईरान का समर्थन हासिल हो सकता है ओर्दगान को जान लेना चाहिए कि अमेरिका और नॉटो तुर्की में कुर्दों और अलवियों के विरोध को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं हैं, लेकिन ईरान का ओर्दगान सरकार के साथ आपसी सहयोग और तुर्की के कुर्दों और अलवियों के साथ दोस्तान सम्बंध तुर्की में संकट के समाधान का कारण बन सकते हैं।


source : abna
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