Hindi
Wednesday 24th of April 2019
  298
  0
  0

चेहुलम, इमाम हुसैन के श्रद्धालुओं के लिये इमाम सादिक़ की अजीब प्रार्थना

 

प्रस्तावना

इमाम हुसैन (अ) के चेहलुम के आते ही इमाम हुसैन (अ) के चाहने वालों और शियों के बीच एक अलग की प्रकार का जोश भर जाता है और उनके दिल हुसैन (अ) की मोहब्बत में और भी तीव्रता से धड़कने लगते हैं। आख़िर क्या कारण हैं कि इमाम हुसैन (अ) के चेहलुम के लिये उनके चाहने वाले बल्कि अगर शब्द बदल कर कह दिया जाए कि सारी दुनिया इतनी बेक़रार और बेचैन क्यों रहती है? यह दिली खिंचाव और अंदरूनी मोहब्बत धार्मिक हस्तियों के एक सामान्य से कथन से कही अधिक है कि जिसमें उन्होंने इस दिन कुछ मुस्तहेब और वाजिब आमाल के बारे में बताया है।

 

लेकिन चेहलुम के दिन यानी बीस सफ़र को इमाम हुसैन (अ) की ज़ियारत का अपना अलग ही स्थान है, प्रश्न यह उठता है कि इमाम हुसैन (अ) के लिये जो विशेष ज़ियारतें दुआओं और रिवायतों की पुस्तकों में आई हैं उनमें से चेहलुम के दिन की ज़ियारत को विशेष स्थान दिया गया है? इसी प्रकार के और भी बहुत से प्रश्न है जो चेहलुम के बारे में दिमाग़ में आते रहते हैं जैसे यह कि आख़िर क्यों धार्मिक हस्तियों ने अरबईन को इतना आधिक महत्व दिया है? आशूर की क्रांति में चेहलुम का क्या महत्व और रोल है? आदि।

أَبِي (ره) قَالَ حَدَّثَنِي سَعْدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ يَعْقُوبَ بْنِ يَزِيدَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ أَبِي عُمَيْرٍ عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ وَهْبٍ قَالَ: دَخَلْتُ عَلَى أَبِي عَبْدِ اللَّهِ (ع) وَ هُوَ فِي مُصَلَّاهُ فَجَلَسْتُ حَتَّى قَضَى صَلَاتَهُ فَسَمِعْتُهُ وَ هُوَ يُنَاجِي رَبَّهُ فَيَقُولُ:

يَا مَنْ خَصَّنَا بِالْكَرَامَةِ وَ وَعَدَنَا الشَّفَاعَةَ وَ حَمَّلَنَا الرِّسَالَةَ وَ جَعَلَنَا وَرَثَةَ الْأَنْبِيَاءِ وَ خَتَمَ بِنَا الْأُمَمَ السَّالِفَةَ وَ خَصَّنَا بِالْوَصِيَّةِ وَ أَعْطَانَا عِلْمَ مَا مَضَى وَ عِلْمَ مَا بَقِيَ وَ جَعَلَ أَفْئِدَةً مِنَ النَّاسِ تَهْوِي إِلَيْنَا اغْفِرْ لِي وَ لِإِخْوَانِي وَ زُوَّارِ قَبْرِ أَبِي عَبْدِ اللَّهِ الْحُسَيْنِ بْنِ عَلِيٍّ (ع) الَّذِينَ أَنْفَقُوا أَمْوَالَهُمْ وَ أَشْخَصُوا أَبْدَانَهُمْ رَغْبَةً فِي بِرِّنَا وَ رَجَاءً لِمَا عِنْدَكَ فِي صِلَتِنَا وَ سُرُوراً أَدْخَلُوهُ عَلَى نَبِيِّكَ مُحَمَّدٍ (ص) وَ إِجَابَةً مِنْهُمْ لِأَمْرِنَا وَ غَيْظاً أَدْخَلُوهُ عَلَى عَدُوِّنَا أَرَادُوا بِذَلِكَ رِضْوَانَكَ فَكَافِهِمْ عَنَّا بِالرِّضْوَانِ وَ اكْلَأْهُمْ بِاللَّيْلِ وَ النَّهَارِ وَ اخْلُفْ عَلَى أَهَالِيهِمْ وَ أَوْلَادِهِمُ الَّذِينَ خُلِّفُوا بِأَحْسَنِ الْخَلَفِ وَ اصْحَبْهُمْ وَ اكْفِهِمْ شَرَّ كُلِّ جَبَّارٍ عَنِيدٍ وَ كُلِّ ضَعِيفٍ مِنْ خَلْقِكَ وَ شَدِيدٍ وَ شَرَّ شَيَاطِينِ الْإِنْسِ وَ الْجِنِّ وَ أَعْطِهِمْ أَفْضَلَ مَا أَمَّلُوا مِنْكَ فِي غُرْبَتِهِمْ عَنْ أَوْطَانِهِمْ وَ مَا آثَرُوا عَلَى أَبْنَائِهِمْ وَ أَبْدَانِهِمْ وَ أَهَالِيهِمْ وَ قَرَابَاتِهِمْ اللَّهُمَّ إِنَّ أَعْدَاءَنَا أَعَابُوا عَلَيْهِمْ خُرُوجَهُمْ فَلَمْ يَنْهَهُمْ ذَلِكَ عَنِ النُّهُوضِ وَ الشُّخُوصِ إِلَيْنَا خِلَافاً عَلَيْهِمْ- فَارْحَمْ تِلْكَ الْوُجُوهَ الَّتِي غَيَّرَتْهَا الشَّمْسُ وَ ارْحَمْ تِلْكَ الْخُدُودَ الَّتِي تَقَلَّبَتْ عَلَى قَبْرِ أَبِي عَبْدِ اللَّهِ الْحُسَيْنِ (ع) وَ ارْحَمْ تِلْكَ الْعُيُونَ الَّتِي جَرَتْ دُمُوعُهَا رَحْمَةً لَنَا وَ ارْحَمْ تِلْكَ الْقُلُوبَ الَّتِي جَزِعَتْ وَ احْتَرَقَتْ لَنَا وَ ارْحَمْ تِلْكَ الصَّرْخَةَ الَّتِي كَانَتْ لَنَا اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْتَوْدِعُكَ تِلْكَ الْأَنْفُسَ وَ تِلْكَ الْأَبْدَانَ حَتَّى تُرَوِّيَهُمْ مِنَ الْحَوْضِ يَوْمَ الْعَطَشِ- فَمَا زَالَ (ص) يَدْعُو بِهَذَا الدُّعَاءِ وَ هُوَ سَاجِدٌ فَلَمَّا انْصَرَفَ قُلْتُ لَهُ: جُعِلْتُ فِدَاكَ لَوْ أَنَّ هَذَا الَّذِي سَمِعْتُهُ مِنْكَ كَانَ لِمَنْ لَا يَعْرِفُ اللَّهَ لَظَنَنْتُ أَنَّ النَّارَ لَا تَطْعَمُ مِنْهُ شَيْئاً أَبَداً وَ اللَّهِ لَقَدْ تَمَنَّيْتُ أَنْ كُنْتُ زُرْتُهُ وَ لَمْ أَحُجَّ. فَقَالَ لِي: مَا أَقْرَبَكَ مِنْهُ فَمَا الَّذِي يَمْنَعُكَ عَنْ زِيَارَتِهِ يَا مُعَاوِيَةُ وَ لِمَ تَدَعُ الحج ذَلِكَ. قُلْتُ: جُعِلْتُ فِدَاكَ فَلَمْ أَدْرِ أَنَّ الْأَمْرَ يَبْلُغُ هَذَا. فَقَالَ: يَا مُعَاوِيَةُ! وَ مَنْ يَدْعُو لِزُوَّارِهِ فِي السَّمَاءِ أَكْثَرُ مِمَّنْ يَدْعُو لَهُمْ فِي الْأَرْضِ لَا تَدَعْهُ لِخَوْفٍ مِنْ أَحَدٍ فَمَنْ تَرَكَهُ لِخَوْفٍ رَأَى مِنَ الْحَسْرَةِ مَا يَتَمَنَّى أَنَّ قَبْرَهُ كَانَ بِيَدِهِ أَ مَا تُحِبُّ أَنْ يَرَى اللَّهُ شَخْصَكَ وَ سَوَادَكَ مِمَّنْ يَدْعُو لَهُ رَسُولُ اللَّهِ (ص) أَ مَا تُحِبُّ أَنْ تَكُونَ غَداً مِمَّنْ تُصَافِحُهُ الْمَلَائِكَةُ أَ مَا تُحِبُّ أَنْ تَكُونَ غَداً فِيمَنْ رَأَى وَ لَيْسَ عَلَيْهِ ذَنْبٌ فَتُتْبَعَ أَ مَا تُحِبُّ أَنْ تَكُونَ غَداً فِيمَنْ يُصَافِحُ رَسُولَ اللَّهِ (ص)؟

जान लो कि इमाम हुसैन (अ) की ज़ियारत का महत्व बयान से अधिक है और बहुत सी रिवायतों में आया है कि यह हज उमरा और जिहाद के बराबर बल्कि उससे कहीं अधिक महत्व रखता है और फज़ीलत में अधिक है, और यह पापों के क्षमा कर दिये जाने और हिसाम के आसान होने और दर्जों के बढ़ने और दुआ के स्वीकार होने का कारण है, और इससे आयु बढ़ती है और शरीर और माल की सुरक्षा है और रोज़ी और हाजतों के पूरा होने और दुखों और समस्याओं के समाधान का कारण है, और इसका छोड़ देना धर्म और ईमान की कमी और पैग़म्बरे इस्लाम (स) के महान अधिकारों में से एक अधिकार का छोड़ देना है और सबसे कम सवाब जो इमाम हुसैन (अ) की क़ब्र की ज़ियारत करने वाले को मिलता है वह यह है कि उसके पाप क्षमा कर दिये जाते हैं और ईश्वर उसके जानी और माल की सुरक्षा करता है यहां तक कि वह अपने परिवार तक चला जाए और जब महाप्रलय का दिन होगा तो ईश्वर संसार से अधिक उसकी सुरक्षा करने वाला होगा, और बहुत सी रिवायतों में आया हैः आपकी ज़ियारत दुखों को समाप्त और मौत की मुश्किलों और क़ब्र के भय को दूर करती है, और जो भी पैसा आपकी ज़ियारत के लिये ख़र्च होता है, हर दिरहम उसके लिये हज़ार दिरहम बल्कि दस हज़ार दिरहम हिसाब किया जाता है और जब वह आपकी क़ब्र की तरफ़ जाता है तो चार हज़ार फ़रिश्ते उसका स्वागत करते हैं और जब वापस पलटता है तो उसके साथ आते हैं। पैग़म्बर, नबी, मामूस इमाम (अ) सभी इमाम हुसैन (अ) की ज़ियारत के लिये आते हैं और आपके ज़ाएरों (श्रद्धालुओ) के लिये प्रार्थना करते हैं और उनको बशारत (शुभ सूचना) देते हैं और ईश्वर आपके श्रद्धालुओं पर अरफ़ात वालों से पहले नज़र डालता है और क़यामत के दिन हर व्यक्ति आरज़ू करेगा कि काश वह भी आपके श्रद्धालुओं मे से होता, आपके बहुत से चमत्कारों और श्रद्धालुओं पर आपकी अनुकम्पाओं को जब देखेगा,

 

इमाम हुसैन (अ) की ज़ियारत की फ़ज़ीलत और महत्व के बारे में रिवायतों बहुत अधिक मात्रा मे हैं और हम इस लेख में आपकी विशेष ज़ियारत को बयान करने के अंतर्गत आपकी ज़ियारत की कुछ फ़ज़ीलत को बयान करेंगे। लेकिन हम इस लेख में केवल एक रिवायत को बयान कर रहे हैं और अगर ईश्वर ने जीवन दिया और तौफ़ीक़ भी तो आगे भी इस बारे में बयान करेंगेः

इबने क़ूलवैह, और शेख़ कुलैनी और सैय्यद इबने ताऊस और दूसरों ने विश्वसनीय सनदों से महान विश्वस्नीय व्यक्ति मोआविया बिन वहब बिन बिजिल्ली कूफ़ी से रिवायत की हैः

एक दिन मैं इमाम सादिक़ (अ) की ख़िदमत में पहुँचा, मैंने उनको अपने मुसल्ले पर नमाज़ में मगन पाया, मैं रुका रहा ताकि आपकी नमाज़ समाप्त हो जाए, उसके बाद मैंने सुना कि आप ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे और कह रहे थेः

 

हे वह ईश्वर जिसने हमको सम्मान से विशेष किया और हमको शिफ़ाअत और सिफ़ारिश का वादा दिया और रिसालत के ज्ञान को हमें दिया, और हमको नबियों का वारिस बनाया, और पूर्व की उम्मतों को हम पर समाप्त किया और हमको पैग़म्बर की वसीयत में विशेष किया और भूत व भविष्य का ज्ञान हमको दिया और लोगों के दिलों को हमारी तरफ़ कर दिया (اغفرلى و لاخوانى و زوّار قبر ابى الحسين بن علىّ صلوات اللّه عليهما) मुझे और मेरे भाईयों और मेरे पिता इमाम हुसैन (अ) की क़ब्र की ज़ियारत करने वालों को क्षमा कर दे, उन्होंने अपने माल से ख़र्च किया है और अपने शरीरों को शहरों से बाहर लाए हैं, हमारी नेकी की चाहत और तेरे सवाब की उम्मीद में, हमारी मोहब्बत और तेरे पैग़म्बर (स) को प्रसन्न करने और हमारे अम्र का उत्तर देने और उस क्रोध के कारण जो उन्होंने शत्रुओं पर किया है और इस कार्य से इनका लक्ष्य तेरी प्रसन्नता है, तो इनको हमारी तरफ़ से नेक बदला दे, और दिन रात्रि उनकी सुरक्षा कर और उनके अहल और औलाद को जिसे वह वतम में झोड़ आए हैं उनका अच्छा उत्तराधिकारी रह और उनको पदों को उच्च करने वाला रह, और अपन सृष्टि के हर अत्याचारी और शत्रु की बुराई और हर कमज़ोर और शक्तिशाली और जिन्नात और इन्सान की बुराई से उनको बचा, और उनको तेरी तरफ़ से उनकी आशा से अधिक दे, तेरी उम्मीद पर अपने वतनों को छोड़ने में, और हमको चुनने में अपनी संतानों और रिश्तेदारों पर। हे ईश्वर शत्रु बाहर आ चुके हैं वह हमारी ज़ियारत पर उनको बुरा भला कहते हैं लेकिन शत्रुओं का विरोध हमारी तरफ़ आने में इनके लिये रुकावट न बन सका।

 

فَارْحَمْ تِلْكَ الْوُجُوهَ الَّتِي غَيَّرَتْهَا الشَّمْسُ وَ ارْحَمْ تِلْكَ الْخُدُودَ الَّتِي تُقَلَّبُ عَلَى قَبْرِ أَبِي عَبْدِ اللَّهِ عَلَيْهِ السَّلامُ

तो रहम कर उन सूरतों पर जिनका रंग सूरज के बदल दिया और रहम कर उनके गालों पर जो वह इमाम हुसैन (अ) की क़ब्र पर फिराते हैं।

और रहम कर उन आख़ों पर जो हमारे ग़ में उनकी आख़ों से आँसू जारी हुए, और रहम कर उन दिलों पर जो रोए और हमारी मुसीबतों पर कुढ़े, और रमह कर उन आवाज़ों पर जो हमारी मुसीबत पर बुलंद हुईं।

हे ईश्वर उन जानों और शरीरों को तेरे हवाले करता हूँ, ताकि उन्हें हौज़े कौसर से और प्यास के दिन तृप्त करे।

रावी कहता है कि इमाम सादिक़ (अ) लगातार इसी प्रकार सजदे की हालत में दुआ कर रहे थे।

जब आपकी दुआ समाप्त हुई मैंने कहाः यह दुआ जो मैंने आपसे सुनी, अगर आप उसके लिये करते जो ईश्वर को नहीं पहचानता है तब भी मुझे विश्वास था कि नर्क की आग कभी उस तक न पहुँचती, ईश्वर की सौगंध मैंने आरज़ू की कि काश आप (इमाम हुसैन(अ)) की ज़ियारत के लिये गया होता और हज के लिये न जाता!!

 

इमाम ने फ़रमायाः तुम तो इमाम हुसैन (अ) से बहुत क़रीब हो, तुमको किस चीज़ ने ज़ियारत से रोका है? मोआविया! ज़ियारत को न छोड़ो।

मैंने कहाः मेरी जान आप पर क़ुरबान, मुझे नहीं पता था कि इसकी इतनी फ़ज़ीलत और महत्व है।

आपने फ़रमायाः हे मोआविया, जो आसमान में इमाम हुसैन (अ) की ज़ियारत करने वाले के लिये प्रार्थना करते हैं, वह उनसे कहीं अधिक हैं जो ज़मीन पर दुआ करते हैं।

 

उनकी ज़ियारत को किसी के भी डर से न छोड़ो, कि जो भी डर के कारण ज़ियारत को छोड़ दे वह इतना अफ़सोस करेगा कि आशा करेगा कि काश इतना आधिक उनकी क़ब्र के पास रहता कि वहीं दफ़्न हो जाता!

क्या तुम नहीं चाहते हो कि ईश्वर तुमको उन लोगों मे जिनके लिये पैग़म्बरे इस्लाम (स) अली (अ) फ़ातेमा (स) और मामूस इमाम (अ) दुआ करते हैं, देखे?

क्या नहीं चाहते हो कि तुम उन लोगों में हो जिसने क़यामत के दिन फ़रिश्ते मुसाफ़ेहा करते हैं?

क्या तुम नहीं चाहते हो कि तुम उन लोगों में से हो कि जो क़ायमत में आते हैं और उन पर कोई पाप न हो?

क्या तुम नहीं चाहते हो कि उन लोगों में से हो कि क़यामत के दिन रसूले इस्लाम (स) जिनसे मुसाफ़ेहा करते हैं?!

 

 

सैय्यद ताजदार हुसैन ज़ैदी

 

  298
  0
  0
امتیاز شما به این مطلب ؟

آخرین مطالب

      با افتتاح سی ودومین نمایشگاه بین المللی کتاب؛ نشر ...
      گزارش تصویری/ سخنرانی استاد انصاریان در مسجد جامع آل ...
      گزارش تصویری/ سخنرانی استاد انصاریان در حسینیه هدایت ...
      استاد انصاریان: دعا عامِل رفع گرفتاری‌ها، سختی‌ها و ...
      مدیر کتابخانه تخصصی امام سجاد(ع)؛ بیش از 700 نسخه خطی ...
      در آستانه ولادت حضرت امام سجاد علیه السلام؛ تفسیر و ...
      استاد انصاریان تبیین کرد: خداوند در چه صورتی چشم و گوش ...
      نگاهی به کتاب «تواضع و آثار آن» اثر استاد انصاریان
      اعلام برنامه سخنرانی استاد انصاریان درماه شعبان ...
      استاد انصاریان: کنار اسلام دین‌سازی نکنید/ داروی حل ...

بیشترین بازدید این مجموعه

      کودکی که درباره یوسف و زلیخا شهادت داد و جبرئیل را ...
      متن سخنرانی استاد انصاریان در مورد امام علی (ع)
      متن سخنرانی استاد انصاریان در مورد حجاب
      عکس/ پرچم گنبد حرم مطهر امام حسین(ع)
      مطالب ناب استاد انصاریان در «سروش»، «ایتا»، «بله» و ...
      استاد انصاریان: لقمه حلال نسخه شفابخش همه بیماری ها و ...
      استاد انصاریان: کنار اسلام دین‌سازی نکنید/ داروی حل ...
      اعلام برنامه سخنرانی استاد انصاریان درماه شعبان ...
      نگاهی به کتاب «تواضع و آثار آن» اثر استاد انصاریان
      استاد انصاریان: دعا عامِل رفع گرفتاری‌ها، سختی‌ها و ...

 
user comment