Hindi
Friday 26th of April 2019
  187
  0
  0

पवित्र रमज़ान भाग-7

पवित्र रमज़ान भाग-7

आज हम दुआ अर्थात प्रार्थना के विषय पर चर्चा करेंगे।
सर्वसमर्थ एवं महान ईश्वर ने दुआ का आदेश देते हुए कहा है कि जो लोग दुआ करने से मुंह मोड़ेंगे उन्हें मैं निकट ही नरक में डाल दूंगा। इससे यह पता चलता है कि दुआ एक ऐसी चीज़ है जिसे ईश्वर बहुत पसंद करता है। यही नहीं, दुआ ईश्वर को इतनी पसंद है कि जो लोग दुआ करने से मुंह मोड़ेंगे उन्हें वह नरक में डाल देगा। जिस प्रकार से मनुष्य को मकान की छत पर चढ़ने के लिए सीढ़ियों की आवश्यकता होती है उसी प्रकार ईश्वर तक पहुंचने की सीढ़ी दुआ है। दुआ वह साधन है जिसके माध्यम से मनुष्य अपने पालनहार को पुकारता है, परिपूर्णता के शिखर को तय करता है और अपने पालनहार के समीप हो जाता है।
दुआ के महत्व के बारे में पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहि व आलेही वसल्लम कहते हैं, "बेहतरीन उपासना दुआ है। जब ईश्वर किसी बंदे को दुआ करने की कृपा प्रदान करता है तो वह उस बंदे की ओर अपनी कृपा व दया का द्वार खोल देता है। निःसन्देह, दुआ करने वाला व्यक्ति कभी बर्बाद नहीं होगा।"
पैग़म्बरे इस्लाम के कथन से स्पष्ट है कि जो व्यक्ति दुआ करता है वह वास्तव में दुआ व कृपा के ईश्वरीय द्वार को खटखटाता है और मनुष्य का पालनहार इतना बड़ा दानी है कि जिसकी कल्पना उसकी समस्त रचनाएं भी नहीं कर सकतीं। यह ब्रहमाण्ड उसके दान का छोटा सा उदाहरण है। सूर्य, चन्द्रमा, आकाश, तारे तथा जल सहित ब्रहमाण्ड की प्रत्येक वस्तु उसी के दान का परिणाम है। वह मांगने और न मांगने वाले दोनों प्रकार के व्यक्तियों को देता है। उसके द्वार से कोई ख़ाली हाथ वापस नहीं लौटता। वह कितना भी किसी को दे दे उसके ख़ज़ाने में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं होती। हर व्यक्ति जिस वस्तु का निर्माण करता है या कोई पौधा लगाता है तो वह दूसरे लोगों की अपेक्षा अपनी बनाई हुई वस्तु या पौधे से अधिक प्रेम करता है। इस ब्रहमाण्ड का रचयिता, सर्वसमर्थ व महान ईश्वर के अतिरिक्त और कौन हो सकता है? कौन है जो अपनी रचना से अधिक प्रेम करता है? हर माता-पिता अपनी संतान से प्रेम करते हैं, चाहे वह मनुष्य हो या पशु-पक्षी। इन सबके भीतर अपनी संतान से प्रेम करने की भावना किसने उत्पन्न की? प्रेम करने की यह भावना यदि नहीं होती तो क्या मां-बाप, अपनी संतान को बड़ा करने के लिए नाना प्रकार की कठिनाइयां सहन करते? अपनी रचना को अस्तित्व प्रदान करने और उसे बाक़ी रखने के लिए ईश्वर ने ही माता-पिता के अंदर प्रेम की भावना पैदा की है। हम सबका पालनहार यदि हम सबसे प्रेम न करता तो हमारे माता-पिता को ही अस्तित्व में न लाता। यह प्रेम ही है जिसके कारण उसने हमारे माता-पिता को अस्तित्व प्रदान किया। जब कोई बच्चा अपने मां-बाप से कोई चीज़ मांगता है तो माता-पिता उसे पूरा करने का प्रयास करते हैं तो क्या हमारा पालनहार, जो हमारे माता-पिता से कहीं अधिक हमसे प्रेम करता है। मनुष्य को अपनी कृपा के द्वार से ख़ाली वापस कर देगा जबकि उसके प्रेम से माता-पिता के प्रेम की तुलना नहीं की जा सकती।(एरिब डाट आई आर के धन्यवाद के साथ)


source : www.islamquest.net
  187
  0
  0
امتیاز شما به این مطلب ؟

آخر المقالات

      السنّة والبدعة
      لماذا تُنسَب الشيعة لابن سبأ ؟
      هل الدعوة لإزالة ذهب القباب عُمَرِيَةُ المنشأ فعلاً ؟
      القدرة المطلقة وإحياء الموتى
      ما هو الفرق بين بيعة الناس لعلي و بيعة الناس للخلفاء ؟
      ضرورة وحدة الأمة الإسلامیة
      علاقة الشیعة الامامیة بالغلاة
      لماذا ولد علي عليه السلام في الكعبة ؟!
      ما حكم الأكل من العقيقة لمن يعق عن نفسه؟
      ما حكم التوضؤ للصلاة قبل دخول الوقت؟ و هل تصح الصلاة ...

 
user comment