Hindi
Saturday 22nd of February 2020
  2059
  0
  0

क्या एक पादरी मुसलमान बन गया

इसके बाद मैं ऊपर के कमरे में गया और इस मुद्दे पर अपनी पत्नी से बात की। मेरी पत्नी ने मुझे बताया कि वह भी जल्दी ही इस्लाम अपनाने जा रही है, क्योंकि वह इस नतीजे पर पहुंची है कि इस्लाम सच्चा धर्म है। यह जानकर मुझे तगड़ा झटका लगा। मैंने नीचे आकर मुहम्मद को जगाया और उसे बाहर आकर मेरे साथ चर्चा करने को कहा। हम दोनों रात भर टहलते रहे और इस्लाम पर चर्चा करते रहे। फज्र की नमाज का वक्त हो गया था। अब तक मैं जान चुका था कि इस्लाम सत्य है और अब मुझे इस मामले में अपनी भूमिका निभानी है। मैं पीछे की तरफ अपने पिता के घर गया। वहां एक पलाई का टुकड़ा पड़ा था। मैंने उसी पलाई के टुकड़े पर अपना माथा रख दिया। मेरा मुंह उस दिशा में था जिस तरफ मुंह करके मुसलमान नमाज पढ़ते हैं। मेरा बदन पलाई पर फैला था और मेरा ललाट जमीन पर टिका था।मैंने उसी स्थिति में सच्चे ईश्वर से प्रार्थना की- है ईश्वर अगर तुम यहां है तो मेरा मार्गदर्शन कर, मुझे सच्ची राह पर ले चल।थोड़ी देर बाद मैंने अपना सिर उठाया तो मैंने कुछ खास महसूस किया। नहीं,नहीं मैंने चिडिय़ा या फरिश्तों को आसमान से आते हुए नहीं देखा। ना मैंने किसी तरह की आवाज सुनी और ना कोई संगीत। ना ही मैंने कोई तेज रोशनी देखी या रोशनी की कोई झलक। जो कुछ मैंने महसूस किया वह था मेरे अंदर हुआ बदलाव। मैंने खुद के अंदर बदलाव महसूस किया। अब मैं ज्यादा जागरूक हो गया था कि अब समय गया है कि मैं झूठ बोलना, धोखा देना और झूठ पर आधारित बिजनेस बंद कर दूं। अब समय गया है कि मैं अपने आपको सीधा, नेक और ईमानदार इंसान बनाने के काम में लग जाऊं। अब मेरी समझ में गया था कि मुझे अब क्या करना है। मैं ऊपर गया और फंव्वारे के नीचे बैठ नहाने लगा, इस सोच के साथ कि अब मैं अपने पुराने सभी गुनाह धो रहा हूं। और अब एक नई जिंदगी में दाखिल हो रहा हूं। एक ऐसी जिंदगी जिसका आधार सच्चाई है और जिसे किसी प्रमाण की जरूरत नहीं है। सुबह ग्यारह बजे दो गवाहों एक पूर्व पादरी फादर पीटर जेकब (जो अब मुसलमान हो चुका था) और मुहम्मद अब्दुल रहमान की उपस्थिति में मैंने इस्लाम का कलमा शहादत पढ़ लिया। खुली गवाही दी कि अल्लाह एक ही है और मुहम्मद(...)अल्लाह के पैगम्बर हैं। कुछ देर बाद ही मेरी पत्नी ने भी इस्लाम का कलमा पढ़ लिया। उसने तीन गवाहों के सामने कलमा पढ़ा। तीसरा मैं था।

मेरे पिता थोड़े संकोची स्वभाव के थे, इस वजह से उन्होंने कुछ महीने बाद इस्लाम कबूल किया लेकिन उसके बाद उन्होंने अपनी सारी ताकत और सामथ्र्य इस्लाम के लिए लगा दी। फिर तो हम अन्य मुसलमानों के साथ स्थानीय मस्जिद में नमाज अदा करने लगे।

मैंने बच्चों को भी ईसाई स्कूलों से हटाकर मुस्लिम स्कूलों में दाखिल करा दिया। इन दस सालों में बच्चे कुरआन और इस्लामी शिक्षा को याद करने में जुटे हैं।

सबसे बाद में मेरे पिता की पत्नी (मेरी सौतेली मां) ने इस बात को स्वीकार किया कि ईसा ईश्वर का बेटा नहीं हो सकता। ईसा तो ईश्वर का पैगम्बर था, ईश्वर नहीं था।

अब आप थोड़ा गौर करें और सोचें कि कैसे अलग-अलग पृष्ठभूमियों और पंथ वालों ने सत्य को अपनाया और यह जानने की कोशिश की कि किस तरह सृष्टि के रचयिता और अपने पालनहार को जाना जाए। आप जरा सोचिए तो सही। एक कैथोलिक पादरी। एक चर्च संगीतकार और पादरी। एक अधिकृत पादरी और ईसाई स्कूलों का संस्थापक। सब एक साथ मुसलमान हो गए। यह तो ईश्वर की मेहरबानी ही है कि हमारी आंखों से परदा हटा और इस्लाम रूपी सत्य को देखने के लिए ईश्वर ने हमारा मार्गदर्शन किया।

अगर मैं अपने जीवन की कहानी को यहीं पूरी कर दूं तो आपको लगेगा कि यह कहानी तो चकित करने वाली है। आश्चर्य वाली बात ही है कि तीन अलग-अलग पंथों के पादरियों ने अपने धर्म के एकदम खिलाफ माने जाने वाली मान्यताओं और विचारों को अपनाया। और उन्होंने ही नहीं बाद में उनके परिवार वालों ने भी इस्लाम अपनाया।

लेकिन बात अभी पूरी नहीं हुई। और भी है। उसी साल मैं टेक्सास के ग्रांड प्रेयरी स्थान पर था। वहां पर मेरी मुलाकात जोय नाम के बेपटिस्ट सेमीनारी के एक विद्यार्थी से हुई जिसने पादरियों को शिक्षा देने वाली संस्था सेमीनारी कॉलेज में पढ़ाई के दौरान कुरआन का अध्ययन किया और इस्लाम अपना लिया। और भी कई ऐसे लोग हैं। मुझे एक और कैथोलिक पादरी याद रहा है जो इस्लाम की अच्छाइयां इतनी ज्यादा बयान करता था कि एक दिन मैं उससे पूछ बैठा-आप इस्लाम में दाखिल क्यों नहीं हो जाते? उसका जवाब था-क्या? मैं अपनी नौकरी खो दूं? उसका नाम है-फादर जॉन और मुझे अब भी उससे उम्मीद है। इसी साल मेरी एक और पूर्व कैथोलिक पादरी से मुलाकात हुई जो पिछले आठ सालों से अफ्रीका में ईसाई धर्म प्रचारक था। उसने इस्लाम के बारे में वहीं सीखा और फिर इस्लाम कबूल कर लिया। उसने अपना नाम उमर रखा और अभी वह डलास टैक्सास में रहता है।

इस्लाम अपनाने के बाद जब मैं एक प्रचारक के रूप में दुनियाभर में घूमा तो मेरी कई राजनीतिज्ञ, प्रोफेसर,दूसरे धर्मों के विद्वान और वैज्ञानिकों से मुलाकात हुई जिन्होंने इस्लाम धर्म का अध्ययन किया और फिर मुसलमान हो गए। इन लोगों में यहूदी,हिंदू,कैथोलक,प्रोटेस्टेंट,जहोवाज,विटनेसेस,ग्रीक और रसियन रूढि़वादी चर्च,मिश्र के कॉप्टिक ईसाई और नास्तिक लोग शामिल हैं।

जो शख्स सच की तलाश में है उसे इन नौ बातों पर गौर करना चाहिए-

1  अपने दिल,दिमाग और आत्मा को वास्तविक भलाई के लिए पवित्र करो। साफ रखो।

2  हर तरह के पूर्वाग्रह और भेदभाव को अपने दिल और दिमाग से निकाल दो।

3  जो भाषा आप अच्छी तरह से जानते हैं उस भाषा में अनुवादक किया गया कुरआन पढ़ो।

4  थोड़ा रुको,ठहरो।

5   गौर फिक्र-चिंतन करो।

6   सोचो और ईश्वर से प्रार्थना करो।

7   जिस सर्वशक्तिमान ने आपको बनाया है, उससे दिल से प्रार्थना करो कि वह आपको सत्य तक पहुंचाने में आपका मार्गदर्शन करे। आपको सच्ची राह दिखाए।

8  कुछ महीनों तक इस अभ्यास को जारी रखें और नियमानुसार इसे रोजाना करें।

9   जब आपको लगे कि आपकी आत्मा एक नए रूप में करवट ले रही है। आपको लगे मानो आप एक नए रूप में जन्म ले रहे हैं तो ऐसे में ऐसे लोगों से बचें जिनकी सोच में जहर भरा हो जो आपको गुमराह कर सकते हैं। 

अब आपका मामला आपके और इस ब्रह्माण्ड के सर्वशक्तिमान मालिक के बीच है। अगर आप वाकई में सच्चे ईश्वर से सच्चा प्रेम करते हैं तो वह इस बात से अंजान नहीं है क्योंकि वह तो दिलों तक की बात जानने वाला है। और वह उसी हिसाब से आपका मामला तय करेगा जो आपके दिल में है।

ईश्वर से दुआ है कि वह आपको सच्ची राह दिखाने में आपका मार्गदर्शन करे। वह इस जगत की सच्चाई और जिंदगी का मकसद जानने के लिए आपके दिल और दिमाग को खोले। आमीन


source : hamarianjuman.blogspot.com
  2059
  0
  0
امتیاز شما به این مطلب ؟

latest article

    विश्व मज़दूस दिवसः सो जाते हैं ...
    पत्रकारों के ख़िलाफ़ इस्राईल के ...
    इराक़ी धर्मगुरु और नेता के बयान से ...
    आयतुल्लाह ज़कज़की के संबंध में ...
    फ़्रांस पूंजीवादी व्यवस्था के ...
    अफ़ग़ानिस्तान में शांति के लिए ...
    श्रीलंका में होटलों और गिरजाघरों में ...
    भारत ने किया एमीसैट, 28 विदेशी उपग्रहों ...
    इस्राईली कार्यवाहियों का कोई कानूनी ...
    किस हद तक गिरती जा रही हैं सरकारें?!

latest article

    विश्व मज़दूस दिवसः सो जाते हैं ...
    पत्रकारों के ख़िलाफ़ इस्राईल के ...
    इराक़ी धर्मगुरु और नेता के बयान से ...
    आयतुल्लाह ज़कज़की के संबंध में ...
    फ़्रांस पूंजीवादी व्यवस्था के ...
    अफ़ग़ानिस्तान में शांति के लिए ...
    श्रीलंका में होटलों और गिरजाघरों में ...
    भारत ने किया एमीसैट, 28 विदेशी उपग्रहों ...
    इस्राईली कार्यवाहियों का कोई कानूनी ...
    किस हद तक गिरती जा रही हैं सरकारें?!

 
user comment