Hindi
Sunday 24th of March 2019
  497
  0
  0

मासूमीन अलैहेमुस्सलाम के स्वर्ण कथन

मुसलमान, मुसलमान का भाई है, उससे बेइमानी नहीं करता, उससे झूठ नहीं बोलता और उसे अकेला नहीं छोड़ता। 

पैग़म्बरे इस्लाम की नज़र में मुसलमान कौन है

मुसलमान वह है जिसकी ज़बान और हाथ से दूसरे मुसलमान सुरक्षित हों। 

सबसे अच्छी प्रार्थना

ईश्वर से पापों की क्षमा मांगना सबसे अच्छी दुआ हैः पैग़म्बरे इस्लाम 

दूसरों के बारे में बुरा सोचने का नुक़सान

दूसरों के बारे में बुरा सोचने वाला सदैव का बीमार हैः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

नेमत, ईश्वर की ओर से परीक्षा 

इमाम जाफ़रे सादिक़ अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैः ईश्वर ने एक क़ौम को नेमतें दी तो उन्होंने उसका आभार व्यक्त नहीं किया परिणामस्वरूप वे नेमतें उनके जी का जंजाल बन गयी और एक क़ौम को ईश्वर ने मुसीबत में डाल दिया तो उन्होंने धैर्य से काम लिया परिणामस्वरूप उनकी मुसीबत नेमत में बदल गयी। 

कर्म में निष्ठा का महत्व

उपासना की बुनियाद निष्ठा व निस्वार्थ भाव पर टिकी हैः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

शिष्टाचार और दुर्व्यवहार का कारण

शिष्टाचार अक़्ल का परिणाम है और दुर्व्यवहार अज्ञानता का परिणाम हैः हज़रत अली अलैहिस्सलाम

अक़्ल और धर्म में संबंध

पैग़म्बरे इस्लाम ने फ़रमाया कि सारी अच्छाईयां अक़्ल की मदद से समझी जाती हैं और जिसके पास अक़्ल नहीं है उसके पास धर्म नहीं है।

संबंधियों से मेल जोल और दान का फ़ायदा

दान और संबंधियों से मेल जोल द्वारा स्वंय को पापों से पाक करो और अपने पालनहार के प्रिय बन जाओ

नास्तिकता का सबसे घटिया स्तर

इमाम जाफ़रे सादिक़ अलैहिस्सलाम से पूछा गया कि नास्तिकता का सबसे घटिया स्तर क्या है तो आपने कहा कि घमंड नास्तिकता का सबसे घटिया स्तर है।

सबके लिए दुआ करने का फ़ायदा

जब भी तुम में से कोई दुआ करे तो सबके लिए करे क्योंकि ऐसा करने से दुआ के क़ुबूल होने की संभावना प्रबल हो जाती हैः पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल लाहो अलैहि वे आलेही व सल्लम 

मनुष्य की सबसे अच्छी संपत्ति क्या है?

मनुष्य की सबसे अच्छी धन-संपत्ति, दान-दक्षिणा से प्राप्त पुण्य हैः इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम

 

मशवेरे का महत्व

जो सिर्फ़ अपनी राय पर अमल करता है वह बर्बाद हो जाता है और जो बड़ों से सलाह-मशेवेरा करता है वह उनकी बुद्धि में शामिल हो जाता हैः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

ईश्वर से मांगने का तरीक़ा

जब भी ईश्वर से दुआ करो तो उससे पहले नमाज़ पढ़ो, या दान करो, या सदकर्म करो या उसका स्मरण करोः पैग़म्बरे इस्लाम 

फलदार पेड़ लगाने का महत्व

जो कोई एक पेड़ लगाए और वह फल देने लगे तो ईश्वर उसे उतना बदला देगा जितना वह पेड़ फल देता है। 

दो सबसे अच्छे और दो सबसे बुरे कर्म

दो भले कर्म (नेकी) ऐसे हैं जिनसे बेहतर कोई नेकी नहीं। एक ईश्वर पर आस्था (ईमान) और दूसरे लोगों की मदद करना और दो कर्म ऐसे हैं जिनसे बुरा कोई कर्म नहीं एक अनेकेश्वरवाद (ईश्वर का शरीक बनाना) और दूसरे लोगों को तकलीफ़ देनाः पैग़म्बरे इस्लाम 

पाप का नुक़सान

जो भी कोई पाप (गुनाह )करता है तो उसकी बुद्धि (अक़्ल) का एक भाग उससे अलग हो जाता है और फिर उस तक नहीं लौटताः पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम 

मन की पवित्रता

मन की पवित्रता ईश्वर की याद से हासिल होती हैः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

आत्मसुधार के बिना सुधार का प्रयास

जो ख़ुद को सुधार नहीं सकता वह दूसरों को नहीं सुधार सकताः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

लांछन लगाना

निराधार आरोप व लांछन लगाने से अधिक नीचता और कुछ नहीं हैः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

दूसरों की कमियां ढूंढने का सामाजिक नुक़सान

लोगों की कमियां मत ढूंढो वरना कोई दोस्त नहीं बनेगाः पैग़म्बरे इस्लाम 

रोज़ी-रोटी और उम्र में वृद्धि की कुन्जी

पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने फ़रमाया कि जो मुझे इस बात की गरेंटी दे कि मां-बाप के साथ भलाई और सगे संबंधियों से मेल-जोल रखेगा तो मैं भी उसके माल, उम्र तथा संबंधियों के दिल में उसकी मुहब्बत में वृद्धि की ज़मानत देता हूं। 

चार प्रकार के लोग

पैग़म्बरे इस्लाम ने फ़रमाया कि लोग चार प्रकार के होते हैः दानी, करीम, कंजूस और नीच। दानी वह है जो ख़ुद भी खाता है और दूसरों को भी खिलाता है। करीम वह है जो ख़ुद न खाकर दूसरे को खिलाता है। कंजूस वह है जो सिर्फ़ ख़ुद खाता है, दूसरों को नहीं देता और नीच वह है जो न ख़ुद खाता है और न ही दूसरों को देता है। 

मिलंसारी का महत्व

हे अब्दुल मुत्तलिब की संतानो! तुम अपने माल से सबको लाभ नहीं पहुंचा सकते तो फिर लोगों से मिलंसारी से मिलोः पैग़म्बरे इस्लाम 

मिलंसारी का महत्व

मिलंसारी पहला और सबसे आसान दान हैः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

ज़िंदगी का चैन छीनने वाली तीन चीज़े

जिस व्यक्ति में तीन बातें होंगी वह कभी ख़ुश नहीं रह सकताः द्वेष(कीना), ईर्ष्या (हसद) और दुर्व्यवहार (बुरा एख़लाक़)  हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

इंसान का मित्र और उसका दुश्मन

हर इंसान की मित्र उसकी बुद्धि और उसकी अज्ञानता उसकी शत्रु हैः पैग़म्बरे इस्लाम 

दुर्व्यवहार

जान लो कि बंदा अपने दुर्व्यवहार के कारण नरक के अंतिम दर्जे में होगाः पैग़म्बरे इस्लाम 

ईर्ष्या से हानि

ईर्ष्या शरीर को कमज़ोर और रोगी बनाती हैः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

जल्दबाज़ी का नुक़सान

लोग जल्दबाज़ी के कारण बर्बाद होते हैं अगर लोग जल्दबाज़ी से दूर रहते तो कोई भी बर्बाद न होताः पैग़म्बरे इस्लाम 

संयम (सब्र) की अहमियत

कामों में सब्र की भूमिका, जिस्म पर सिर की तरह है कि अगर सिर, जिस्म से अलग हो जाए तो जिस्म बेजान हो जाता है उसी तरह अगर काम में सब्र न हो तो काम बर्बाद हो जाते हैः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

सलाद पत्ता खाने का लाभ

सलाद पत्ता खाओ कि इससे नींद आती है और खाना हज़्म होता हैः पैग़म्बरे इस्लाम 

गोश्त खाने और न खाने की अहमियत

जो इंसान चालीस दिन गोश्त न खाए वह चिड़चिड़े व्यवहार का हो जाता है और जो इंसान चालीस दिन लगातार गोश्त खाए वह कठोर दिल का हो जाता हैः पैग़म्बरे इस्लाम। 

शलजम का फ़ायदा

शलजम खाओ क्योंकि कोई व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसके शरीर में कोढ़ की नस न हो और शलजम इस नस को जला देती हैः इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम 

सदकर्म (भलाई, नेकी) का फ़ायदा और पाप से नुक़सान

लोगों की उम्र सदकर्म (भलाई, नेकी) से बढ़ जाती है और पापों (गुनाहों) के कारण लोग ईश्वर की ओर से निर्धारित आयु सीमा से पहले मर जाते हैः पैग़म्बरे इस्लाम 

सबसे बड़ा पाप

सबसे बड़ा पाप वह है जिसे करने वाला छोटा समझेः हज़रत अली 

अज्ञानता का नुक़सान

बुद्धि हर व्यक्ति की मित्र और अज्ञानता उसकी दुश्मन हैः पैग़म्बरे इस्लाम

अक़ल इंसान की दोस्त है और जेहालत उसकी दुश्मन 

बुद्धि का महत्व

बुद्धि से मार्गदर्शन प्राप्त करो ताकि मार्ग मिल जाए, बुद्धि की अवज्ञा न करो कि पछताना पड़ेः पैग़म्बरे इस्लाम

अक़्ल से हेदायत हासिल करो ताकि रास्ता मिल जाए और अक़्ल की नाफ़रमानी मत करो शर्मिंदा होना पड़ेः पैग़म्बरे इस्लाम 

इच्छाओं की प्राप्ति व लंबी लंबी उम्मीदें

मैं अपनी उम्मत के संबंध में इच्छाओं और लंबी लंबी उम्मीदों की ओर से डरता हूः पैग़म्बरे इस्लाम 

क्रोध (ग़ुस्से) पर क़ाबू रखने का फ़ायदा

सबसे अधिक दूरदर्शी वह है जो अपने ग़ुस्से पर क़ाबू रखेः पैग़म्गरे इस्लाम

 

पूर्वजों की तबाही का कारण

तुम्हारे पूर्वजों को दिरहम व दीनारों से तबाह किया और यही दो तुम्हें भी तबाह करेंगेः पैग़म्बरे इस्लाम 

दुनिया की प्राप्ति के लिए मध्यमार्ग अपनाने की अहमियत

दुनिया प्राप्त करने में मध्यमार्ग अपनाओ और लालच से बचो क्योंकि जिसकी क़िस्मत में जो है वह उसे मिल कर रहेगाः पैग़म्बरे इस्लाम

दुनिया हासिल करने में दरमियानी रास्ता अपनाओ और लालच से बचो क्योंकि जिसकी क़िस्मत जो लिखा है वह उसे मिल कर रहेगाः पैग़म्बरे इस्लाम 

इस संसार में ईश्वर की ओर से दो पापों की सज़ा

दो चीज़ की सज़ा ईश्वर इस संसार में देता है एक अत्याचार और दूसरे मां-बाप की अकृतज्ञता (नाशुकरी) पैग़म्बरे इस्लाम 

पीड़ित की बददुआ का असर

पीड़ित (मज़लूम) की बददुआ से डरो कि उसकी बददुआ आग की तरह आसमान में जाती हैः पैग़म्बरे इस्लाम 

मितव्ययिता (क़ेनाअत) का फ़ायदा

हे आदम की संतान! जिससे तुम्हारी ज़रूरतें पूरी हो सकती हैं वह तुम्हारी पहुंच में है, उस चीज़ की प्राप्ति के प्रयास में न रहो जो तुम्हें उद्दंड (सरकश) बना दे, अगर कम पर राज़ी न हुए तो अधिक पाकर भी तुम्हारा जी नहीं भरेगाः पैग़म्बरे इस्लाम

ए आदम की औलाद जिस चीज़ से तुम्हारी ज़रूरतें पूरी हो सकती हैं वह तुम्हारी पहुंच में है, उस चीज़ की कोशिश में न रहो जो तुम्हें सरकश बना दे, अगर कम पर राज़ी न रहोगे तो ज़्यादा पाकर भी तुम सेराब नहीं होगेः पैग़म्बरे इस्लाम 

ईश्वर के निकट हलाल किन्तु सबसे घृणित कर्म

ईश्वर के निकट हलाल किन्तु सबसे घृणित कर्म तलाक़ हैः पैग़म्बरे इस्लाम

(ख़ुदा के नज़दीक हलाल मगर सबसे ज़्यादा बुरा काम तलाक़ हैः पैग़म्बरे इस्लाम)

नमाज़ की अहमियत

जो भी नमाज़ को देर से पढ़ेगा उसे मेरी सिफ़ारिश (शेफ़ाअत) नहीं मिलेगीः पैग़म्बरे इस्लाम 

लोगों से सम्मान पाने का मंत्र

जो चाहता है कि लोग उसका सम्मान (इज़्ज़त) करें उसे चाहिए कि जिस तरह वह लोगों के सामने पाप करने से बचता है उसी तरह उसे तन्हाई में भी पाप करने से बचना चाहिएः इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम 

हलाल आजीविका का महत्व

उपासना के दस भाग हैं कि इसका नौ भाग हलाल आजीविका कमाने से संबंधित हैः पैग़म्बरे इस्लाम 

मन की पवित्रता का महत्व

अपने मन को पाक रखोगे तो थोड़ा सा कर्म भी काफ़ी होगाः पैग़म्बरे इस्लाम 

ईश्वर का भय रखने का महत्व

जो ईश्वर का भय रखे लोग उससे भय रखते हैः इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम 

मेहमान नवाज़ी की अहमियत

मेहमान अपनी रोज़ी ख़ुद लाता है और मेज़बान के घर वालों के गुनाहों को ले जाता हैः पैग़म्बरे इस्लाम 

चिंतन-मनन की अहमियत

चिंतन-मनन(ग़ौर-फ़िक्र) करना उपासना हैः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

पेट भर खाने का नुक़सान

पेट भर खाने से बचो क्योंकि ऐसा करने वाला अधिक बीमार होता हैः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

अधिक दुआ करने का फ़ायदा

अधिक दुआ करो ताकि शैतान की ओर से पहुंचने वाले नुक़सान से सुरक्षित रहोः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

रोज़ी-रोटी के लिए दर्मियानी रास्ता अपनाने का महत्व

दुनिया पाने में दर्मियानी रास्ता अपनाओ, लालच मत करो क्योंकि जिसकी क़िस्मत में जो लिखा है उसे मिल कर रहेगाः पैग़म्बरे इस्लाम 

पाप पर प्रसन्नता

पाप पर प्रसन्न होने से बचो क्योंकि पाप पर प्रसन्न होना उसे अंजाम देने से अधिक बुरा हैः इमाम ज़ैनुल आबेदीन 

भले कर्म को जताने का नुक़सान

भले कर्म को जता कर बर्बाद मत करोः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

ग़ुस्से का नुक़सान

ग़ुस्सा हर बुराई की कुंजी हैः इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम 

बीमारी पैग़म्बरे इस्लाम की नज़र में

ज़मीन पर बीमारी ईश्वर का कोड़ा है जिसके ज़रिये वह अपने बंदों को शिष्टाचार सिखाता हैः पैग़म्बरे इस्लाम 

मां-बाप के साथ भेल कार्म का लाभ

अपने मां-बाप के साथ भलाई करो ताकि तुम्हारे बच्चे तुम्हारे साथ भलाई करेः इमाम जाफ़र सादिक़ 

आत्ममुग्धता का नुक़सान

आत्ममुग्धता (ख़ुद को पसंद करना) अक़्ल के लिए सबसे ज़्यादा नुक़सानदेह हैः हज़रत अली 

रोज़ी के मार्ग में रुकावट बनने वाला पाप

व्याभिचार (स्त्री-पुरुष के बीच अवैध संबंध) भी उन पापों में है जिससे रोज़ी (आजीविका)कम हो जाती हैः इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम 

सबसे बुरा व्यक्ति

सबसे बुरा व्यक्ति वह है जो ख़ुद को सबसे अच्छा समझेः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

ख़ुदा के नज़दीक सबसे नापसंद व्यक्ति

घमंडी विद्वान, ईश्वर के निकट सबसे अधिक घृणित व्यक्ति हैः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

सबसे मज़बूत सहारा

ईश्वर के आदेशों का पालन, सबसे मज़बूत सहारा हैः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

अभागा व्यक्ति

अभागा है वह व्यक्ति जो अपनी इच्छाओं पर मर मिटेः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

पहले मज़दूरी तय करने की अहमियत

पैग़म्बरे इस्लाम ने मज़दूर को मज़दूरी तय करने से पहले काम पर लगाने से मना किया हैः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

दिखावे का नुक़सान

ईश्वर उस कर्म (अमल) को स्वीकार नहीं करता जिसमें तनिक भी दिखावा होः पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम। 

भाग्यवान हज़रत अली की दृष्टि में

भाग्यवान वह व्यक्ति है जो ईश्वर को दृष्टि में रखे और अपने पाप से डरेः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

ईश्वर की अवज्ञा का परिणाम

जिसे ईश्वर की अवज्ञा में आनंद आता है ईश्वर उसे अपमानित करता हैः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

बुराइयों से दूरी

बुराइयों से दूरी भले कर्म करने से बेहतर हैः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

छोटे पाप बड़े पाप की पृष्ठिभूमि

जो छोटे गुनाह करते वक़्त ईश्वर से नहीं डरता वह बड़े गुनाह करते वक़्त भी ईश्वर से नहीं डरेगाः इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम 

पाखंडी की पहचान

पाखंडी (मुनाफ़िक़) की तीन पहचान हैः झूठ बोलता है, वादा पूरा नहीं करता और अमानत में ख़यानत करता हैः पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम 

मन की शुद्धि का फ़ायदा

अपने मन को शुद्ध करो कि ऐसी हालत में थोड़ा सा कर्म भी काफ़ी होगाः पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम 

अच्छे कर्म करने में अक़्ल की भूमिका

बुद्धि ही अच्छाइयों का रास्ता दिखाती हैः इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम 

लोगों के साथ शिष्टाचार का फ़ायदा

बुद्धि (अक़्ल) का एक तिहाई भाग लोगों के साथ शिष्टाचार (ख़ुश एख़्लाक़ी) से पेश आने में छिपा हैः इमाम जाफ़रे सादिक़ अलैहिस्सलाम 

मोमिन की विशेषता

मोमिन अपने अच्छे काम से ख़ुश और बुरे काम से दुखी होता हैः पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम 

अच्छे कर्म का फ़ायदा

अच्छे काम के लिए जल्दी करो ताकि तुम्हारी सीधे रास्ते की ओर रहनुमाई हो सके 

चिंतन-मनन (ग़ौर-व-फ़िक्र) करने का महत्व

ग़ौर-व-फ़िक्र करना इबादत हैः हज़रत अली 

ईश्वर से डरने का इनाम

जो शख़्स ईश्वर से डरता है लोग उसे अहमियत देते हैः इमाम अली नक़ी 

कब किससे कोई बात कहनी चाहिए

जब किसी बात के लिए मुनासिब वक़्त न हो उस वक़्त बात न करोः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

सदक़ा देने का वक़्त

सदक़ा सुबह जल्दी दो कि इससे इबलीस का चेहरा काला हो जाता हैः इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम 

हज और उमरा करने वाला ख़ुदा का मेहमान

हज और उमरा करने वाला ख़ुदा का मेहमान है और ख़ुदा गुनाहों की माफ़ी की शक्ल में उसे तोहफ़ा देता हैः हज़रत अली अलैहिस्सलाम 

मोमिन और मुनाफ़िक़ में फ़र्क़

मोमिन पहले सलाम करता है जबकि मुनाफ़िक़ कहता हैः मुझे सलाम किया जाएः पैग़म्बरे इस्लाम 

लोगों में इज़्ज़त व शोहरत पाने का तरीक़ा

जो लोगों के बीच इज़्ज़त व शोहरत चाहता है उसे तन्हाई और सबके सामने दोनों ही हालत में गुनाह से बचना चाहिएः इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम 

दुनिया में अधिक ज़िन्दगी पाने का राज़

इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम फ़रमाते है कि जो शख़्स अपने घरवालों और भाइयों के साथ नेकी करे तो उसकी ज़िन्दगी बढ़ जाएगी। 

अपनी औलाद की इज़्ज़त करना

अपनी औलाद की इज़्ज़त करो और उन्हें अदब सिखाओः पैग़म्बरे इस्लाम 

दूसरों के ऐब से पहले अपने ऐब पर नज़र.

हज़रत इमाम जाफ़रे सादिक़ अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं कि इंसान के लिए सबसे ज़्यादा फ़ायदेमंद चीज़ यह है कि वह दूसरों के ऐब व कमियों पर नज़र डालने से पहले अपने ऐब व कमी पर नज़र रखे।


source : irib.ir
  497
  0
  0
امتیاز شما به این مطلب ؟

latest article

      संरा मियांमार में जनसंहार की जांच ...
      सुन्नी श्रद्धालु इमाम अली रज़ा ...
      फ़िदक के छीने जाने पर फ़ातेमा ज़हरा (स) ...
      अमरीका और तालेबान के बीच वार्ता
      दरबारे इब्ने जियाद मे खुत्बा बीबी ...
      दुआ फरज
      इमाम हसन असकरी अलैहिस्सलाम की ...
      हज़रत इमाम हसन असकरी (अ.स.) के इरशाद
      इमाम हसन असकरी अलैहिस्सलाम की अहादीस
      इमाम असकरी अलैहिस्सलाम और उरूजे ...

 
user comment