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Tuesday 16th of July 2019
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अल्लाह 1

अल्लाह 1

पुस्तक का नामः कुमैल की प्रार्थना का वर्णन

लेखकः आयतुल्लाह अनसारियान

 

ईश्वर के लिए शब्द अल्लाह एक व्यापक तथा पूर्ण नाम है, जिसमे पूर्णता सौंदर्य तथा महिमा के सभी गुण एकत्रित है।

कहते है किः अल्लाह शब्द मे तीन अर्थ सूचिबद्ध है।

1- अनंत काल से स्थाई, शाश्वता से मौजूद एंव सरमदी है।

2- बुद्धि एवम कल्पनाऐ उसको पहचानने से चकित और भ्रमित तथा आत्माए और समझने की शक्ति उसकी तलाश मे असमर्थ है।

3- सभी प्रणीयो के वापस होने का एक मात्र संदर्भ है।

असहाबे लताएफ़ और इशारात ने उल्लेख किया हैः

अल्लाह एक बड़ा नाम है और एकेश्वरवाद इसी पर आधारित है तथा नास्तिक व्यक्ति इसी शब्द के कहने के कारण – हृदय की गहराई तथा सच्ची जबान से कहे तो – नास्तिकता के निचले स्थर से इमान के शिखर मे परिवर्तित हो जाता है।

नास्तिक इस शब्द के कहने से दुनयावी प्रमाद, अपवित्रता, अकेलेपन तथा भयानक एरेना से निकल कर चेतना और सदभावना, पवित्रता, उन्स तथा सुरक्षा की शरण मे आ जाता है। यदि लाएलाहा इललल्लाह के स्थान पर लाएलाहा इल्लर्रहमान अथवा कोई और नाम ले, तो नास्तिकता से बाहर नही आता और इसलाम मे प्रवेश नही करता है। लोगो की फ़लाह और उद्धार एंव मोक्ष इसी शुद्ध और पवित्र शब्द के जपन (ज़िक्र करने) मे निर्भर है।

 

जारी

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