Hindi
Tuesday 18th of June 2019
  1044
  0
  0

अशीष का समापन 2

अशीष का समापन 2

 

लेखक: आयतुल्लाह हुसैन अनसारियान

किताब का नाम: पश्चताप दया की आलंगन

 

हमने अशीष का समापन भाग 1 मे कहा था कि पैग़म्बर ने परमेश्वर की आज्ञा से 18 ज़िल्हिज्जा[1] को ग़दीरे ख़ुम[2] के मैदान मे अपने बाद लोगो का नेतृत्व करने हेतु अपना उतराधिकारी (ख़लीफ़ा) स्थापित किया। ईश्वर ने धर्म के पूर्ण होने, अशीष की समाप्ति, इस्लाम से सहमति -कि जो मृतोस्थान (क़यामत) तक लोगो का धर्म रहेगा- की घोषणा की।

 

 . . . الْيَوْمَ أَكْمَلْتُ لَكُمْ دِينَكُمْ وَأَتْمَمْتُ عَلَيْكُمْ نِعْمَتِي وَرَضِيتُ لَكُمُ الاْسْلاَمَ دِيناً 

... अलयौमा अकमलतो लकुम दीनाकुम वअतमम्तो अलैकुम नैमती वरज़ीतो लकुमुलइस्लामा दीना[3]

हॉ, इमाम अली (अ.स.) के प्रशासन, संरक्षकता, नेतृत्व और दुनिया और भविष्य के मामलो मे उनकी आज्ञाकारीता ही धर्म का पूर्ण होना एंव अशीष की समाप्ति है।

पवित्रता, सफ़ाई और प्रदीप्ति जो कि वुज़ू[4] से प्राप्त होती है इस संम्बंध मे इमाम रज़ा[5] (अ.स.) से रिवायत हैः इस लिए वुज़ू का आदेश पारित किया गया है प्रारम्भिक पूजा वह है कि जब मनुष्य पूजा के लिए ईश्वर के सामने खडा होता है और रहस्य की बाते तथा भजन (मुनाजात) करता है और ईश्वर के आदेश का पालन करता है, तो प्रदूषण (आलूदगी) और उत्सर्ग (निजासत) उस से दूर हो जाती है। इसके अतिरिक्त यह कि वुज़ू इन्सान से नींद और बीमारी के प्रभाव को दूर करने तथा ईश्वर की पूजा करने हेतु ह्रदय को प्रकाश प्रदान करने का कारण बनता है।[6]

जारी



[1] ज़िल्हिज्जा इस्लामी साल का आख़री महीना है। इस्लामी साल का आरम्भ मोहर्रम से होता है और अंत ज़िल्हिज्जा पर। (अनुवादक)

[2] ग़दीरे ख़ुम सऊदी अरब मे एक स्थान है जहा पर पैग़म्बर (स.अ.व.व.) ने हज की तीर्थ यात्रा से लौटते समय अली (अ.स.) को अपना उत्तराधिकारी (ख़लीफ़ा) बनाने की घोषणा की थी। (अनुवादक)

[3] सुरए मायदा 5, छंद 3

[4] वुज़ू का व्याख्या पूर्व मे की जा चुकी है।

[5] इमाम रज़ा (अ.स.) शिया समुदाय के आठवे इमाम (नेता) है। (अनुवादक)

[6] عن الفضل بن شاذان عن الرضا (عليه السلام) قال : إنما أمر بالوضوء وبدأ به لأن يكون العبد طاهراً إذا قام بين يدى الجبار عند مناجاته إياه مطيعاً له فيما أمره نقيا من الأدناس و النجاسة مع ما فيه من ذهاب الكسل و طرد النعاس و تزكية الفؤاد للقيام بين يدي الجبار...

अनिल फ़ज़्ल बिन शाज़ान अनिर रज़ा (अ.स.) क़ालाः इन्नमा अमरा बिल वुज़ूए वबदाआ बेहि लेअय्यकूनल अबदो ताहेरन एज़ा क़ामा बैय्ना यदैइल जब्बारो इनदा मुनाजातेही इय्याहो मुतीअन लहू फ़ीमा अमाराहु नक़ीयन मिनल अदनासे वन्निजासते माअ माफ़ीहे मिन ज़िहाबिल कसले व तरोदिन्नेआसे वत्तज़कियातिल फ़ोआदे लिलक़ियामे बैय्ना यदैइल जब्बारे ...

ओयूने अख़बारिर्रज़ा, भाग 2, पेज 103, अध्याय 34;  एलालुश्शराए, भाग 1, पेज 256, अध्याय 182, हदीस 9; वसाएलुश्शिया, भाग 1, पेज 367, हदीस 968  

  1044
  0
  0
امتیاز شما به این مطلب ؟

latest article

      सऊदी अरब में सज़ाए मौत पर भड़का संरा, ...
      मानवाधिकार आयुक्त का कार्यालय खोलने ...
      मियांमार के संकट का वार्ता से समाधान ...
      शबे यलदा पर विशेष रिपोर्ट
      न्याय और हक के लिए शहीद हो गए हजरत ...
      ईरान और तुर्की के मध्य महत्वपूर्ण ...
      बहरैन में प्रदर्शनकारियों के दमन के ...
      बहरैन नरेश के आश्वासनों पर जनता को ...
      विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता का ...
      अफ़ग़ानिस्तान से अमरीकी सैनिकों की ...

 
user comment